शंभुगंज में 25 साल पुराना सरकारी चापाकल हुआ बंद, पेयजल संकट जूझ रहे दिव्यांग शिक्षक समेत ग्रामीण

खराब चापाकल. | Prabhat Khabar Network
Water Crisis in Banka : बांका जिले के शंभुगंज प्रखंड में पीएचईडी विभाग की लापरवाही से पेयजल संकट गहरा गया है. 19 पंचायतों के सैकड़ों गांवों में सरकारी चापाकल वर्षों से खराब पड़े हैं, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी हो रही है.
Water Crisis in Banka : बांका जिले के शंभुगंज प्रखंड में पीएचईडी विभाग की लापरवाही के कारण पेयजल संकट गहराता जा रहा है. 19 पंचायतों के सैकड़ों गांवों में कई सरकारी चापाकल वर्षों से खराब पड़े हैं. कुरमा पंचायत के चटमा बाजार में 25 साल पुराना चापाकल बंद होने से दिव्यांग शिक्षक सहित स्थानीय लोगों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
19 पंचायतों में खराब पड़े हैं कई सरकारी चापाकल
शंभुगंज प्रखंड के विभिन्न गांवों में पीएचईडी विभाग द्वारा लगाए गए कई सरकारी चापाकल वर्षों से खराब पड़े हैं. जुलाई के महीने में उमस और गर्मी के बीच जब बिजली कटौती होती है, तब ग्रामीणों के लिए सरकारी चापाकल ही पेयजल का प्रमुख सहारा बनते हैं. लेकिन समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है.
दिव्यांग शिक्षक के सामने खड़ा हुआ पेयजल संकट
कुरमा पंचायत के वार्ड संख्या छह स्थित चटमा बाजार में रहने वाले अविवाहित दिव्यांग शिक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि करीब 25 वर्ष पहले पीएचईडी विभाग द्वारा लगाया गया सरकारी चापाकल पिछले वर्ष से पूरी तरह खराब पड़ा है. वे घर के बाहर बच्चों को पढ़ाकर अपना जीवनयापन करते हैं और इसी चापाकल से स्नान तथा पीने के पानी की व्यवस्था होती थी. अब चापाकल बंद होने से उन्हें दूसरे घरों से बाल्टी में पानी मंगवाकर किसी तरह दैनिक जरूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं.
राहगीरों की भी बढ़ी परेशानी
स्थानीय लोगों के अनुसार यह चापाकल केवल आसपास के ग्रामीणों के लिए ही नहीं, बल्कि तारापुर मार्ग से आने-जाने वाले राहगीरों के लिए भी महत्वपूर्ण था. रायपुरा, धरमपुर, गढ़ी कुरमा और आसपास के कई गांवों के लोग भी इसी चापाकल से अपनी प्यास बुझाते थे. अब इसके खराब होने से सभी को परेशानी उठानी पड़ रही है.
ग्रामीणों ने नए चापाकल की उठाई मांग
दिव्यांग शिक्षक मनोज कुमार सिंह ने पीएचईडी विभाग से जल्द नया चापाकल लगाने की मांग की है. उनका कहना है कि नया चापाकल लगने से न केवल उन्हें, बल्कि आसपास के ग्रामीणों और राहगीरों को भी राहत मिलेगी.
क्या कहता है पीएचईडी विभाग
पीएचईडी विभाग के कनीय अभियंता सुबोध कुमार ने बताया कि संबंधित पुराने चापाकल को तकनीकी जांच के बाद 'डेड' घोषित कर दिया गया है. विभाग उसी स्थान पर नया चापाकल लगाने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रयास कर रहा है. विभाग का कहना है कि आवश्यक स्वीकृति मिलने के बाद जल्द ही लोगों को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी.
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लेखक के बारे में
By सुभाष वैद्य
सुभाष वैद्य प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत वर्ष 2005 में की. अभी प्रभात खबर के बांका कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.
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