कटोरिया की खुशबू कुमारी को मिलेगा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार; 'बड़का गुरुजी' के बाद गांव को मिला दूसरा सबसे बड़ा सम्मान
फोटो- शिक्षिका खुशबू कुमारी | Prabhat Khabar Network
बांका के राधानगर की शिक्षिका खुशबू कुमारी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित करेंगी। गांव के लिए यह एक गौरवपूर्ण क्षण है।
Banka News: कटोरिया के राधानगर गांव के लिए आगामी शिक्षक दिवस ऐतिहासिक होने जा रहा है. राधानगर निवासी शिक्षिका खुशबू कुमारी को 5 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित करेंगी. खास बात यह है कि करीब पांच दशक पहले इसी गांव के शिक्षक राधारमण प्रसाद सिंह उर्फ ‘बड़का गुरुजी’ को तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने सम्मानित किया था. एक ही गांव से अलग-अलग पीढ़ियों में राष्ट्रपति के हाथों शिक्षक सम्मान मिलना क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण और दुर्लभ संयोग बन गया है.
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‘बड़का गुरुजी’ की यादों से जुड़ा है राधानगर
राधारमण प्रसाद सिंह उर्फ ‘बड़का गुरुजी’ का राधानगर की पहचान से गहरा रिश्ता रहा है. 70 के दशक में शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान और समर्पण को देखते हुए उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के हाथों सम्मानित किया गया था. ग्रामीणों के अनुसार वे सरल, सहज और मिलनसार स्वभाव के शिक्षक थे. उन्होंने अपना जीवन बच्चों को शिक्षा देने और ग्रामीण समाज में शिक्षा की अलख जगाने के लिए समर्पित कर दिया था.
‘बड़का गुरुजी’ के सम्मान में बदला गांव का नाम
स्थानीय लोगों के अनुसार राधारमण प्रसाद सिंह की लोकप्रियता और शिक्षा के प्रति समर्पण का असर इतना गहरा था कि उनके सम्मान में तत्कालीन नंगाजोर गांव का नाम बदलकर राधानगर कर दिया गया. ग्रामीणों की ओर से किसी शिक्षक के सम्मान में गांव का नाम बदलना अपने आप में अनूठी मिसाल मानी जाती है. आज भी गांव के बुजुर्ग उन्हें श्रद्धा से ‘बड़का गुरुजी’ के नाम से याद करते हैं.
किताबी ज्ञान के साथ संस्कार और अनुशासन पर देते थे जोर
राधारमण प्रसाद सिंह विद्यार्थियों को केवल किताबी शिक्षा तक सीमित नहीं रखते थे. वे बच्चों को अनुशासन, संस्कार, मेहनत और जिम्मेदारी का पाठ भी पढ़ाते थे. ग्रामीणों के अनुसार विद्यार्थियों का उनके घर से भी गहरा जुड़ाव था. बच्चे उनसे सहजता से मिलते थे और उनके स्नेह एवं मार्गदर्शन का लाभ लेते थे. यही वजह रही कि समय के साथ उनका नाम राधानगर की पहचान का हिस्सा बन गया.
राष्ट्रपति से सम्मान के बाद भी नहीं बदला जीवन
ज्ञानी जैल सिंह के हाथों सम्मान मिलने के बावजूद राधारमण प्रसाद सिंह के जीवन में कोई दिखावा नहीं आया. वे पहले की तरह सादगीपूर्ण जीवन जीते रहे और शिक्षा के प्रति समर्पित रहे. उनके पढ़ाए कई विद्यार्थियों ने आगे चलकर अलग-अलग क्षेत्रों में पहचान बनाई. राधानगर स्थित विद्यालय में आज भी उनके योगदान और शैक्षणिक परंपरा की स्मृतियां जुड़ी हुई हैं.

अब खुशबू कुमारी के सम्मान से फिर चमकेगा राधानगर
समय के साथ राधानगर को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने जा रही है. आगामी 5 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा शिक्षिका खुशबू कुमारी को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाना तय है. इससे राधानगर बाजार सहित कटोरिया प्रखंड और बांका जिले में खुशी का माहौल है.
एक गांव, दो पीढ़ियां और राष्ट्रपति के हाथों शिक्षक सम्मान
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ही गांव से अलग-अलग दौर में दो शिक्षकों को राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिलना बेहद दुर्लभ उपलब्धि है. यह केवल खुशबू कुमारी की व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि राधानगर की शिक्षा-परंपरा की निरंतरता का प्रतीक भी है. जिस गांव की पहचान कभी एक समर्पित शिक्षक के सम्मान में बदली थी, उसी गांव की बेटी का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन उस गौरवगाथा की अगली कड़ी बन गया है.
शिक्षा की विरासत को आगे बढ़ा रही नयी पीढ़ी
Banka News: राधारमण प्रसाद सिंह ने जिस दौर में ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाई, आज उसी विरासत को नई पीढ़ी आगे बढ़ा रही है. खुशबू कुमारी का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन राधानगर की पहचान को शिक्षा और शिक्षक सम्मान की धरती के रूप में और मजबूत करता है. शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति के हाथों मिलने वाला यह सम्मान राधानगर के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रहा है.
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