शरद के आगमन पर कुदरत ने ओढ़ी सफेद चादर, पंजवारा में कांस के फूलों की मनमोहक छटा बनी आकर्षण का केंद्र
पंजवारा क्षेत्र में खिले सफेद कांस के फूल. | Prabhat Khabar Network
बांका: शरद ऋतु के आगमन के साथ कुदरत का अनूठा शृंगार, पंजवारा क्षेत्र में खिले सफेद कांस के फूल बने आकर्षण का केंद्र
पंजवारा. वर्षा ऋतु की विदाई और ठंडी बयार के साथ पंजवारा क्षेत्र में शरद ऋतु की आहट साफ महसूस होने लगी है. नदी-नालों, जलाशयों और खेतों के किनारे खिले सफेद कांस के फूल मौसम में बदलाव का सुंदर संदेश दे रहे हैं. दूर तक फैली हरियाली के बीच लहराती कांस की सफेद चादर प्राकृतिक दृश्य को मनमोहक बना रही है. यही नजारा शारदीय नवरात्र और महालया के आगमन की आहट भी दे रहा है.
प्रकृति का अपना पारंपरिक कैलेंडर है कांस
कांस के फूलों को लंबे समय से ऋतु परिवर्तन का प्राकृतिक संकेत माना जाता रहा है. पर्यावरणविदों के अनुसार कांस एक बारहमासी घास है, जो नदी किनारे और नम भूमि वाले क्षेत्रों में आसानी से उगती है. इसकी जड़ें मिट्टी को बांधने में मदद करती हैं, जिससे मिट्टी के कटाव को रोकने में भी इसकी भूमिका रहती है.
पर्यावरणविद रास मोहन ठाकुर का कहना है कि जलवायु और मानसून चक्र के संतुलन के साथ प्राकृतिक वनस्पतियों का अपना चक्र चलता है. कांस का खिलना भी इसी प्राकृतिक बदलाव का हिस्सा है. यह स्थानीय आबोहवा और ऋतु परिवर्तन को समझने का पारंपरिक संकेत देता है.
बुजुर्गों की यादों में आज भी जिंदा है कांस
कांस के फूलों का ग्रामीण जीवन और लोक परंपराओं से पुराना रिश्ता रहा है. क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि तीन-चार दशक पहले मौसम की जानकारी के आधुनिक साधन गांवों तक आसानी से नहीं पहुंचते थे. ऐसे में खेतों और नदी किनारे खिलने वाले कांस के सफेद फूलों को देखकर लोग शरद ऋतु के आने का अनुमान लगाते थे.
ग्रामीण संस्कृति में कांस का सफेद रंग पवित्रता, शांति और उमंग का प्रतीक माना जाता रहा है. नवरात्र और दुर्गापूजा के मौसम से इसका प्राकृतिक जुड़ाव भी लोगों की स्मृतियों में बसा हुआ है. पितृपक्ष के समय भी कांस की मौजूदगी को ग्रामीण परंपरा में विशेष महत्व दिया जाता रहा है.
कांस के फूलों के बीच सेल्फी और रील्स का क्रेज
समय बदला तो प्रकृति को देखने और उसे संजोने का अंदाज भी बदल गया. पंजवारा क्षेत्र में इन दिनों सुबह और शाम के सुहाने मौसम में बांधों, तालाबों और खेतों के किनारे युवाओं की आवाजाही बढ़ गयी है.
सफेद कांस के फूलों के बीच खड़े होकर तस्वीरें खींचना और सोशल मीडिया के लिए रील्स व वीडियो बनाना युवाओं को खूब आकर्षित कर रहा है. मोबाइल कैमरे में कैद होती कांस की लहराती चादर प्राकृतिक सौंदर्य को डिजिटल दुनिया तक पहुंचा रही है.
सफेद कांस के बीच दिख रहा शरद का मनमोहक रूप
एक ओर खेतों में हरियाली और दूसरी ओर हवा के साथ लहराते सफेद कांस के फूल पंजवारा के ग्रामीण इलाकों को अलग ही रंग दे रहे हैं. मौसम में आये इस बदलाव के बीच प्रकृति जैसे अपने पारंपरिक अंदाज में शरद ऋतु के स्वागत की तैयारी कर रही है. इसी के साथ लोगों को अब नवरात्र, महालया और दुर्गापूजा के आने का इंतजार भी सताने लगा है.
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