बेटी के जन्म होने पर झूम उठा बांका का चौधरी परिवार, अस्पताल से बैंड-बाजा संग रथ पर 'नन्ही परी' को ले गये घर

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रथ पर सवार होकर बच्ची को अस्पताल से घर ले जाते दंपती.

रथ पर सवार होकर बच्ची को अस्पताल से घर ले जाते दंपती.

Good News : बांका के सदर अस्पताल से आई एक तस्वीर ने सबका दिल जीत लिया. बेटी के जन्म की खुशी में एक परिवार ने बैंड-बाजा, फूलों से सजे रथ और गाड़ियों के काफिले के साथ नवजात का भव्य स्वागत किया. यह अनूठी पहल बेटा-बेटी समानता का संदेश दे रही है.

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Good News : बांका सदर अस्पताल से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने लोगों का दिल जीत लिया. बेटी के जन्म की खुशी में एक परिवार ने बैंड-बाजा, फूलों से सजे रथ और गाड़ियों के काफिले के साथ नवजात का भव्य स्वागत किया. इस अनोखी पहल ने बेटा-बेटी में समानता का मजबूत संदेश देते हुए पूरे शहर में चर्चा बटोर ली.

सदर अस्पताल के बाहर उमड़ी भीड़, वजह जानकर लोग रह गए भावुक

मंगलवार की शाम सदर अस्पताल परिसर में अचानक बैंड-बाजे की आवाज गूंजने लगी. अस्पताल के मुख्य गेट पर लोगों की भीड़ जुट गई. पहले लोगों को लगा कि शायद किसी की बारात निकलने वाली है, लेकिन कुछ ही देर बाद जब फूलों से सजे रथ और कई वाहनों पर लगे बैनर दिखाई दिए तो सभी को पता चला कि यह जश्न किसी शादी का नहीं, बल्कि एक बेटी के जन्म का है.

पहली बेटी के स्वागत में सज गया पूरा काफिला

नगर परिषद क्षेत्र के दुधारी गांव निवासी नीतेश कुमार चौधरी की पत्नी पूजा चौधरी ने सदर अस्पताल में एक पुत्री को जन्म दिया. परिवार ने इस खुशी को यादगार बनाने के लिए अस्पताल से घर तक फूलों से सजा रथ, कई कारों और बैंड-बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली. मां और नवजात को सम्मानपूर्वक वाहन पर बैठाकर पहले शहर में घुमाया गया, फिर पूरे उत्साह के साथ पैतृक गांव दुधारी ले जाया गया.

सदर अस्पताल परिसर में गोद में बच्ची के साथ पूजा चौधरी व साथ में पति नीतेश चौधरी.
सदर अस्पताल परिसर में गोद में बच्ची के साथ पूजा चौधरी व साथ में पति नीतेश चौधरी.

अस्पताल में मौजूद मरीजों, परिजनों और कर्मचारियों के बीच मिठाइयां भी बांटी गईं. गाड़ियों पर लगे बैनरों में मां-बेटी की तस्वीर के साथ "बेटी हुई है" जैसे संदेश लिखे गए थे, जिन्हें देखकर लोग रुककर इस पहल की सराहना करते रहे.

दुल्हन की तरह सजा घर, पोती के स्वागत में झूम उठा परिवार

देवदा स्थित चौधरी परिवार के घर को नवजात के स्वागत के लिए दुल्हन की तरह सजाया गया था. गाजे-बाजे और आतिशबाजी के बीच बेटी का स्वागत किया गया. पहली संतान के रूप में बेटी के जन्म से परिवार की खुशी देखते ही बन रही थी.

बच्ची के पिता नीतेश कुमार चौधरी ने कहा कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं होतीं. उनके जन्म का उत्सव भी उतनी ही धूमधाम से मनाया जाना चाहिए. उनका उद्देश्य समाज में बेटा-बेटी के बीच भेदभाव खत्म करने और "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" का संदेश देना है.

दादा के शब्द बने प्रेरणा का संदेश

नवजात के दादा निरंजन चौधरी ने बैंड-बाजे की धुन पर जमकर नृत्य किया और कहा, "बेटा भाग्य से होता है, लेकिन बेटियां सौभाग्य से होती हैं. आज मेरे घर लक्ष्मी के रूप में पोती आई है."

चौधरी परिवार की यह अनूठी पहल पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है. इस आयोजन ने समाज को यह संदेश दिया कि बेटियां परिवार की शान हैं, दो घरों को जोड़ने वाली कड़ी हैं और उनका जन्म भी उतने ही सम्मान और उत्साह के साथ मनाया जाना चाहिए.

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चंदन कुमार

लेखक के बारे में

By चंदन कुमार

चंदन कुमार बांका में प्रिंट माध्यम में 15 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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