कठौन स्कूल में टॉफी के बहाने बच्चों में जग रही सीखने की ललक, प्रश्नोत्तरी में जवाब देने को मचती है होड़

Updated:
विज्ञापन
WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

कटोरिया प्रखंड के प्रोन्नत मध्य विद्यालय कठौन में 'सुरक्षित शनिवार' कार्यक्रम के तहत बच्चों को खेल-खेल में सिखाया जा रहा है. प्रश्नोत्तरी में टॉफी और शाबाशी मिलने से बच्चों में सीखने की ललक और आत्मविश्वास बढ़ रहा है.

विज्ञापन

कटोरिया प्रखंड के प्रोन्नत मध्य विद्यालय कठौन में सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम के तहत बच्चों को शिक्षित, जागरूक और प्रोत्साहित करने का अनूठा प्रयास किया जा रहा है. विद्यालय का चेतना सत्र अब सिर्फ प्रार्थना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बच्चों के लिए सीखने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर बन गया है. चेतना सत्र के दौरान होने वाली प्रश्नोत्तरी बच्चों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहती है.

विज्ञापन

सही जवाब पर मिलती है टॉफी और शाबाशी

छात्रा को प्रोत्साहित करते प्रधानाध्यापक तुलसी दास | Prabhat Khabar Network
छात्रा को प्रोत्साहित करते प्रधानाध्यापक तुलसी दास | Prabhat Khabar Network

शिक्षक जैसे ही बच्चों से कोई सवाल पूछते हैं, छोटे-छोटे हाथ जवाब देने के लिए उठने लगते हैं. कई बच्चे उत्साह में उछलकर भी जवाब देने की कोशिश करते हैं. बच्चों की आंखों में सीखने की ललक और सही उत्तर देने का उत्साह विद्यालय परिसर के माहौल को जीवंत बना देता है.

सुरक्षित शनिवार के अवसर पर बच्चों को पहले ही बताया जाता है कि सवाल का सही जवाब देने वाले बच्चों को चॉकलेट के साथ शाबाशी भी मिलेगी. इसके बाद बच्चों में सवालों का जवाब देने की होड़ शुरू हो जाती है.

सवाल पूछने और बोलने का बढ़ रहा आत्मविश्वास

कठौन विद्यालय के छात्र-छात्राएं व शिक्षक.
कठौन विद्यालय के छात्र-छात्राएं व शिक्षक.

प्रश्नोत्तरी के इस छोटे से प्रयास के माध्यम से बच्चों को सुरक्षित रहने के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सवाल पूछने, अपनी बात रखने और आत्मविश्वास के साथ बोलने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है. शिक्षक बच्चों को जवाब देने का मौका देते हैं, जिससे वे बिना झिझक अपनी बात सामने रखने का अभ्यास कर रहे हैं.

जिज्ञासा को जिंदा रखना भी शिक्षा का हिस्सा

विद्यालय के प्रधानाध्यापक तुलसी दास ने बताया कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है. बच्चों में जिज्ञासा पैदा करना, उन्हें सवाल पूछने के लिए प्रेरित करना और सही जवाब देने पर उनका उत्साह बढ़ाना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

उन्होंने कहा कि प्रधानाध्यापक के रूप में उनका उद्देश्य केवल बच्चों की हाजिरी लेना नहीं, बल्कि उनके अंदर सीखने और जानने की जिज्ञासा को लगातार जीवित रखना है.

खुशनुमा माहौल में दूर हो रही बच्चों की झिझक

प्रधानाध्यापक ने बताया कि चेतना सत्र में प्रश्नोत्तरी को खुशनुमा माहौल में आयोजित किया जाता है, ताकि बच्चे बिना झिझक सवालों के जवाब दे सकें. सही उत्तर देने वाले बच्चों को चॉकलेट के साथ प्रोत्साहन और शाबाशी दी जाती है. इससे बच्चों में सीखने के प्रति रुचि के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है.

छोटे प्रयास से बन रही बड़ी सोच

विद्यालय का यह छोटा सा प्रयास बच्चों के लिए सीखने का बड़ा माध्यम बन रहा है. सवाल सुनते ही छोटे हाथों का उठना और जवाब देने की ललक इस बात का संकेत है कि बच्चों में जिज्ञासा और आत्मविश्वास को बढ़ावा मिल रहा है. सुरक्षित शनिवार का यह रचनात्मक प्रयोग बच्चों को जागरूक करने के साथ उन्हें अपनी बात खुलकर रखने का अवसर भी दे रहा है.

ये भी पढ़ें : बांका के अभिजात ने फिनलैंड में रचा इतिहास, अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिला सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र का सम्मान

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन