दहेज हत्या मामले में पति को 10 साल की सजा, औरंगाबाद कोर्ट का बड़ा फैसला

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औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय | Prabhat Khabar Network

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औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय ने दहेज हत्या के एक मामले में पति को दोषी करार देते हुए 10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. शादी के बाद अतिरिक्त दहेज की मांग और प्रताड़ना के चलते विवाहिता की हुई मौत के मामले में यह फैसला आया है.

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Aurangabad Dowry Death Verdict : औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय के जिला एवं सत्र न्यायाधीश (सप्तम) संतोष कुमार झा ने दहेज हत्या के चर्चित मामले में दोषी पति को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने रफीगंज थाना कांड संख्या-500/23 में बलिगांव निवासी सत्येन्द्र चौधरी को भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी के तहत दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई.

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Aurangabad News : 8 जुलाई को ठहराया गया था दोषी

अदालत ने 8 जुलाई को सत्येन्द्र चौधरी को दहेज हत्या का दोषी करार दिया था. इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश (सप्तम) ने 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई. अपर लोक अभियोजक संजीव कुमार ने बताया कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने यह निर्णय दिया.

शादी के बाद शुरू हुई अतिरिक्त दहेज की मांग

अभियोजन के अनुसार, ओबरा थाना क्षेत्र के मनोरा गांव निवासी राजकुमार चौधरी ने 19 नवंबर 2023 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी. उन्होंने बताया कि उनकी 20 वर्षीय भतीजी मनीषा देवी की शादी 16 मार्च 2023 को सत्येन्द्र चौधरी के साथ हुई थी. शादी में तीन लाख रुपये नकद और एक अपाचे बाइक दी गई थी. आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही सोने की चेन और अंगूठी की अतिरिक्त मांग को लेकर मनीषा को प्रताड़ित किया जाने लगा.

जहर देने का आरोप, इलाज के दौरान हुई मौत

प्राथमिकी के अनुसार, 13 नवंबर 2023 को ससुराल वालों ने कथित रूप से मनीषा के साथ मारपीट की और उसे जहर पिला दिया. गंभीर हालत में उसे गया के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 14 नवंबर 2023 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. आरोप है कि घटना के बाद ससुराल पक्ष के लोग अस्पताल छोड़कर फरार हो गए.

सुनवाई के बाद अदालत ने सुनाया फैसला

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पांच और बचाव पक्ष की ओर से दो गवाहों की गवाही हुई. 30 मई 2024 को अदालत ने आरोप तय किए थे. सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने पति को दहेज हत्या का दोषी मानते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई.


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