औरंगाबाद में फिर आंदोलन की तैयारी में कार्यपालक सहायक, वेतनमान-स्वास्थ्य बीमा समेत कई हैं मांगें, रविवार की बैठक पर टिकी निगाहें

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कार्यपालक सहायकों ने लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन की तैयारी तेज कर दी है. रविवार को होने वाली जिला स्तरीय बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी. वेतनमान, स्वास्थ्य बीमा और राज्य कर्मी का दर्जा जैसी मुख्य मांगें शामिल हैं.

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Executive Assistant Protest : औरंगाबाद के सरकारी दफ्तरों में ऑनलाइन कामकाज से लेकर आम लोगों से जुड़ी कई सेवाओं में कार्यपालक सहायकों की भूमिका अहम है. ऐसे में उनकी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर जिले में आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है. लंबे समय से मांगे पूरी नहीं होने से नाराज कार्यपालक सहायक अब अगले कदम की तैयारी में जुटे हैं.

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बिहार राज्य कार्यपालक सहायक सेवा संघ के निर्देश पर रविवार को जिला स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी. इसमें जिले के अलग-अलग विभागों में कार्यरत सैकड़ों कार्यपालक सहायक शामिल होंगे. बैठक में सरकार की ओर से अब तक लिए गए निर्णयों की समीक्षा के साथ आगे की आंदोलन की रणनीति पर चर्चा होगी.

एक साल बाद भी नहीं हुआ मांगों का समाधान

संघ के भूपेंद्र ठाकुर ने बताया कि कार्यपालक सहायकों की कई मांगे लंबे समय से लंबित हैं. सरकार की ओर से इन मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है. उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष आंदोलन के दौरान बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी के अधिकारियों ने मांगों पर उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया था.

आश्वासन मिलने के बाद उस समय आंदोलन समाप्त कर दिया गया था. संघ का कहना है कि आंदोलन समाप्त हुए करीब एक साल बीत जाने के बावजूद मांगों के समाधान की दिशा में उम्मीद के मुताबिक पहल नहीं हुई. ऐसे में कार्यपालक सहायकों के बीच फिर से आंदोलन की जरूरत महसूस की जा रही है.

रविवार की बैठक में बनेगी आंदोलन की रूपरेखा

जिला स्तरीय बैठक में मांगों को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी. संघ की ओर से चरणबद्ध आंदोलन का प्रस्ताव रखा जा सकता है. इसमें काली पट्टी लगाकर काम करने से लेकर जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन करने का फैसला लिया जा सकता है.

जरूरत पड़ने पर हड़ताल पर जाने को लेकर भी बैठक में चर्चा हो सकती है. संघ का कहना है कि यदि सरकार की ओर से मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.

वेतनमान से स्वास्थ्य बीमा तक कई मांगे

कार्यपालक सहायक वेतनमान का लाभ देने के साथ राज्य कर्मी का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा पिछले आंदोलन के दौरान प्रधान सचिव की ओर से किए गए वादों को पूरा करने और सभी विभागों में कार्यरत कार्यपालक सहायकों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने की मांग भी शामिल है.

संघ की अन्य मांगों में कॉरपोरेट सैलरी अकाउंट खोलना, पूर्व में हुई हड़ताल की अवधि को सामान्य अवकाश में समायोजित करना और उस दौरान कटौती किए गए वेतन का भुगतान करना शामिल है. विभिन्न विभागों से हटाए गए कार्यपालक सहायकों के समायोजन की मांग भी संघ की ओर से की जा रही है.

हड़ताल हुई तो सरकारी कामकाज पर पड़ सकता है असर

कार्यपालक सहायकों के हड़ताल पर जाने की स्थिति में जिले के विभिन्न सरकारी विभागों में ऑनलाइन से जुड़े काम प्रभावित हो सकते हैं. इसका सीधा असर सरकारी सेवाओं से जुड़े काम कराने वाले आम लोगों पर पड़ने की आशंका है.

संघ का कहना है कि मांगों पर समय रहते सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो आंदोलन की स्थिति टाली जा सकती है. वहीं, रविवार की बैठक के बाद यह स्पष्ट होगा कि कार्यपालक सहायक अपनी मांगों को लेकर किस चरण में आंदोलन शुरू करने का फैसला लेते हैं.

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