औरंगाबाद में मौत का कुआं’ बने एनएच-139 को फोरलेन बनाने की मांग तेज, जन आंदोलन की तैयारी शुरू

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एसडीओ को ज्ञापन देते संघर्ष समिति के कार्यकर्ता

Aurangabad News: औरंगाबाद जिले में “मौत का कुआं” के नाम से कुख्यात हो चुके एनएच-139 को फोरलेन बनाने और क्षतिग्रस्त दोमुहान पुल के पास अविलंब डाइवर्जन निर्माण की मांग को लेकर ‘एनएच 139 फोरलेन संघर्ष समिति’ का गठन किया गया है. इस सर्वदलीय समिति ने जिलाधिकारी (डीएम) और एसडीओ को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया है.

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Aurangabad News: (औरंगाबाद से सुजीत कुमार सिंह की रिपोर्ट):
औरंगाबाद जिले में लगातार हो रहे हादसों के कारण “मौत का कुआं” के नाम से प्रचलित हो चुके एनएच-139 को फोरलेन बनाने की मांग अब तेज हो गई है. दोमुहान पुल के क्षतिग्रस्त होने के पश्चात दिख रही सरकारी उदासीनता को ध्यान में रखकर ‘एनएच 139 फोरलेन संघर्ष समिति’ का गठन किया गया है. इस समिति में सभी राजनैतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम जनता को जोड़कर एक बड़ा जन आंदोलन खड़ा करने का निर्णय लिया गया है.

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समिति के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रामानुज पांडेय, राजद के प्रदेश महासचिव एवं जिला परिषद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि ई सुबोध कुमार सिंह, जन सुराज के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ सिंह, प्रदेश कांग्रेस नेता व वार्ड पार्षद चुलबुल सिंह, जिला पार्षद शंकर यादवेंदु, सीपीआई नेता सिनेश राही और पृथ्वीराज चौहान ट्रस्ट के सचिव स्वर्णजीत सिंह आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं.

शिष्टमंडल ने अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन, 8 जून को जिला परिषद के सामने धरना

एनएच-139 को फोरलेन बनाने और दोमुहान पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण वहां तुरंत एक डाइवर्जन (वैकल्पिक पुल) के निर्माण की मांग को लेकर संघर्ष समिति का एक शिष्टमंडल जिलाधिकारी और अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) से मिला और उन्हें संबंधित ज्ञापन सौंपा. इसके साथ ही समिति के सदस्यों ने एसडीओ से मुलाकात कर आगामी 8 जून को जिला परिषद कार्यालय के सामने प्रातः 10 बजे से आयोजित होने वाले एक दिवसीय धरना कार्यक्रम की आधिकारिक जानकारी दी.

डाइवर्जन नहीं बनने के कारण लोग झेल रहे महाजाम

समिति के वरिष्ठ सदस्य रामानुज पांडेय ने बताया कि जिला प्रशासन समेत पूर्व एवं वर्तमान जनप्रतिनिधियों को एनएच-139 से उत्पन्न होने वाली दीर्घकालिक तथा अल्पकालिक परेशानियों से अवगत कराना समिति का मुख्य उद्देश्य है, ताकि जल्द से जल्द इसका निदान निकल सके.

विगत 16 मई को दोमुहान पुल में दरार आने और उसके क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई थी. इस बात को 18 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक डाइवर्जन नहीं बन सका है. इसके कारण अंबा से बालूगंज, देव होते हुए औरंगाबाद और नवीनगर से सुंदरगंज होते हुए औरंगाबाद आने वाले वाहनों के कारण लोगों को 10-10 घंटे के भीषण जाम का सामना करना पड़ रहा है. भारी वाहनों के दबाव के कारण ग्रामीण सड़कें और पुल-पुलिया पूरी तरह बर्बाद होने की स्थिति में हैं. उन्होंने कहा कि राजनैतिक सुस्ती और प्रशासनिक लापरवाही इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेवार है, जिससे आम जनता के साथ-साथ स्थानीय व्यापार चौपट हो रहा है.

नियमों का दिया हवाला: 12 हजार की जगह रोज चल रही हैं 40 हजार गाड़ियां

समिति के सदस्यों ने जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से बताया कि एनएचएआई (NHAI) के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार यदि किसी सड़क पर प्रतिदिन 12 हजार गाड़ियों का परिचालन होता है, तो उस दो लेन की सड़क को फोरलेन में अपग्रेड करने का नियम है. इसके विपरीत, एनएच-139 पर वर्तमान में प्रतिदिन 40 हजार से अधिक भारी व छोटे वाहनों का परिचालन हो रहा है.

ज्यादा ट्रैफिक के कारण इस मार्ग पर प्रतिवर्ष औसतन 200 से अधिक लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में दर्दनाक मौत हो रही है. समिति ने साफ किया कि अरवल, ओबरा, दाउदनगर, औरंगाबाद और अंबा में केवल बाईपास बना देने से मौत का यह सिलसिला नहीं थमेगा. बाईपास निर्माण इस गंभीर समस्या का दूरगामी समाधान नहीं है. ऐसे में एनएच-139 को अविलंब फोरलेन घोषित किया जाए और दोमुहान पर शीघ्र डाइवर्जन का निर्माण कराया जाए. समिति ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा.

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