अरवल में भू-जल दोहन बना बड़ा खतरा, सबमर्सिबल और डीप बोरिंग से गहराता पेयजल संकट, विशेषज्ञों ने जताई चिंता

सबमर्सिबल और डीप बोरिंग
Arwal News: अरवल जिले में अनियंत्रित भू-जल दोहन के कारण पेयजल संकट गहराने की आशंका तेजी से बढ़ रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि सबमर्सिबल पंप और डीप बोरिंग के बढ़ते उपयोग से भू-जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, जो भविष्य में गंभीर जल संकट का कारण बन सकता है. प्रशासनिक नियंत्रण और स्पष्ट मानकों के अभाव में हालात और भी चिंताजनक होते जा रहे हैं.
Arwal News: जिले में लगातार बढ़ते भू-जल दोहन ने भविष्य में गंभीर पेयजल संकट की आशंका को और बढ़ा दिया है. विशेषज्ञों का कहना है कि अनियंत्रित सबमर्सिबल पंप और डीप बोरिंग के कारण भू-जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में पानी की भारी किल्लत हो सकती है.
अनियंत्रित भू-जल दोहन से बिगड़ रहा संतुलन
शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बिना नियंत्रण के हो रहे भू-जल दोहन को विशेषज्ञ खतरनाक मान रहे हैं. उपलब्ध जल संसाधनों की तुलना में लगातार बढ़ते उपयोग के कारण भू-जल स्तर तेजी से गिर रहा है, जिससे पारिस्थितिक संतुलन पर भी असर पड़ रहा है.
सबमर्सिबल पंप बने भू-जल गिरावट की बड़ी वजह
जिले में सबमर्सिबल पंपों का बढ़ता उपयोग भू-जल स्तर में गिरावट का प्रमुख कारण माना जा रहा है. शहर से लेकर गांव तक बड़ी संख्या में लोग निजी स्तर पर सबमर्सिबल पंप लगा रहे हैं, जिससे पानी का अत्यधिक दोहन हो रहा है.
‘हर घर नल का जल’ योजना में भी नहीं है स्पष्ट नियंत्रण
सरकार की ‘हर घर नल का जल’ योजना के तहत जल आपूर्ति तो बढ़ी है, लेकिन इसमें उपयोग होने वाले सबमर्सिबल पंपों के लिए कोई स्पष्ट मानक तय नहीं किए गए हैं. इससे जल दोहन पर नियंत्रण मुश्किल होता जा रहा है.
एनओसी अनिवार्यता न होने से बढ़ रहा अवैध बोरिंग
सबमर्सिबल पंप लगाने के लिए नगर परिषद से एनओसी लेना अनिवार्य नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में लोग बिना अनुमति बोरिंग करा रहे हैं. इस पर न तो प्रभावी प्रशासनिक नियंत्रण है और न ही नियमित निगरानी व्यवस्था.
डीप बोरिंग का चलन भी तेजी से बढ़ा
जिले में डीप बोरिंग का चलन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके लिए भी कोई स्पष्ट मानक या गहराई सीमा तय नहीं की गई है. शहर के कई इलाकों में 200 से 500 फीट तक गहरे बोरिंग किए जा रहे हैं, जिससे भू-जल स्तर पर गंभीर असर पड़ रहा है.
विशेषज्ञों ने जताई चेतावनी, तुरंत कदम जरूरी
जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते भू-जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और बोरिंग के लिए स्पष्ट नियम लागू नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है. उन्होंने सरकार और प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग की है.
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