बिहार के सबसे नए जिले में पहली बार खुला कोर्ट, 25 साल तक 35KM दूर जाते रहे लोग
AI निर्मित सांकेतिक तस्वीर.
25 साल के इंतजार के बाद अरवल को मिला पहला जिला न्यायालय. अब न्याय के लिए 35KM दूर नहीं जाना पड़ेगा. जानिए पूरी खबर.
Arwal District Court : पुरानी मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने अपने वामन अवतार में यहां के पतित ग्राम में कदम रखा था. महान संस्कृत कवि बाणभट्ट ने यहीं जन्म लिया और हर्षचरितम्, चंडीशतकम् व कादम्बरी जैसी यादगार रचनाएं लिखीं. स्वतंत्रता सेनानी गोदानी सिंह यहीं के थे, जिन्होंने आजादी के आंदोलन के दौरान थाने पर तिरंगा फहराया था.
ये पौराणिक-ऐतिहासिक कहानियाँ उस धरती से जुड़ी हैं, जिसे बिहार में अरवल के नाम से जानते हैं. इन महान हस्तियों की भूमि पर आज न्याय का मंदिर स्थापित हुआ है. अरवल को ज़िला बने हुए करीब 25 साल हो गए हैं, और 26वें साल में इसे यह पहला न्यायालय मिला है. गुरुवार 10 सितंबर को अरवल ज़िले में प्रधान ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश समेत दूसरे न्यायाधीशों के न्यायालयों का उद्घाटन किया गया. साथ ही सबके लिए रहने के घरों का भी उद्घाटन हुआ.
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अब तक न्याय के लिए 35KM दूर जाते थे लोग
यह मौका अरवल ज़िले के लोगों के लिए भी खास तौर पर ज़रूरी रहा. इससे पहले लोगों को अपने आपसी झगड़ों को सुलझाने के लिए करीब 35 किलोमीटर दूर जहानाबाद जाना पड़ता था. अब अरवल में ही न्यायालय खुल जाने से लोगों का समय और पैसा बचेगा, और उन्हें त्वरित न्याय मिलेगा. जहानाबाद से ही अलग होकर 20 अगस्त, 2001 को अरवल नया ज़िला बना था. इस तरह यह बिहार का फिलहाल सबसे नया बना ज़िला है.
Arwal District को पूर्ण न्याय मंडल का दर्जा प्राप्त हुआ
अरवल पहले जहानाबाद न्याय मंडल के तहत आता था. सबसे पहले 20 मई 2015 को अरवल में अनुमंडलीय न्याय मंडल का उद्घाटन हुआ. इसके बाद सात दिसंबर 2024 को पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डॉ अंशुमान ने अरवल व्यवहार न्यायालय के भवन का उद्घाटन किया. साथ ही दो अपर ज़िला एवं सत्र न्यायाधीशों की नियुक्ति भी की गई. अब 10 सितंबर 2026 के दिन आखिरकार अरवल को पूर्ण न्याय मंडल का दर्जा प्राप्त हुआ.

पहले प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनना गौरव की बात : प्रजेश कुमार
उद्घाटन कार्यक्रम में सबसे पहले पटना उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुधीर सिंह का मधुबनी पेंटिंग, शॉल, फूल और बुके के साथ स्वागत किया गया. उन्होंने रिमोट से न्यायालय का विधिवत उद्घाटन किया. इससे पहले विधि सेक्रेटरी बलिराम दुबे ने नोटिफिकेशन पढ़कर विधिवत अरवल न्याय मंडल का तोहफा दिया. इसके साथ ही जहानाबाद में नए बने उत्पाद न्यायालय भवन का भी ई-उद्घाटन किया गया.
वहीं प्रधान ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश प्रजेश कुमार ने अपने भाषण में कहा कि आज का दिन अरवल ज़िले के लिए एक सुनहरा अध्याय है. अरवल को पूर्ण मंडल का दर्जा मिल चुका है. इस गौरवशाली ज़िले के पहले प्रधान एवं ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में काम संभालना मेरे लिए गर्व की बात है. साथ ही यह एक बहुत ज़रूरी और पवित्र ज़िम्मेदारी भी है. अरवल के लोगों को न्याय के लिए जहानाबाद नहीं जाना पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने मुझ पर बहुत भरोसा जताया और अरवल को पूर्ण न्याय मंडल के पहले और बहुत ज़रूरी पद को संभालने के लायक समझा. इस पवित्र ज़िम्मेदारी और भरोसे की इज़्ज़त बनाए रखना मेरा सबसे बड़ा फ़र्ज़ है. निरीक्षण न्यायाधीश का अच्छा मार्गदर्शन, प्रशासनिक सूझबूझ और लगातार साथ मिलना हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है, जिसका हम अच्छे से पालन करेंगे.

Arwal District Court : ये लोग भी रहे मौजूद
इस मौके पर अपर ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम रवि रंजन मिश्रा, अपर ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय प्रीतम कुमार, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सह प्रभारी न्यायाधीश मनीष कुमार पांडे, सब जज प्रथम नंदकिशोर ,अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी ज्योति कुमारी, न्यायिक दंडाधिकारी राज पराशर और न्यायिक दंडाधिकारी सौरभ कुमार समेत जहानाबाद न्याय मंडल के न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे.
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