अरवल: आंगनबाड़ी सेविका को वर्ग-3 और सहायिका को वर्ग-4 का सरकारी कर्मी घोषित करे सरकार; एटक के जिला सम्मेलन में उठी 26 हजार मानदेय और ग्रेच्युटी की मांग

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आंगनबाड़ी सेविका सहायिका संघ का बैठक | Prabhat Khabar Network

बिहार के अरवल में आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन ने एक जिला सम्मेलन आयोजित किया. सेविकाओं और सहायिकाओं ने सरकारी कर्मचारी का दर्जा, ₹26 हजार तक मानदेय, ग्रेच्युटी और पेंशन जैसी मांगों को लेकर आवाज उठाई.

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Arwal News: बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन (एटक से सम्बद्ध) की अरवल जिला इकाई का द्वितीय जिला सम्मेलन उमैराबाद स्थित एक निजी मैरेज हॉल में पूरे उत्साह और संकल्प के साथ संपन्न हुआ. सम्मेलन की अध्यक्षता मीरा देवी ने की, जबकि मंच संचालन संजय कुमार भारती द्वारा किया गया. इस सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन यूनियन के राज्य महासचिव कुमार बिंदेश्वर सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया. सम्मेलन में जिले भर से बड़ी संख्या में पहुंची आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं ने अपनी लंबित मांगों और विभागीय उपेक्षा के खिलाफ आवाज बुलंद की.

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सरकारी कर्मचारी का दर्जा और 26 हजार रुपये मानदेय देने की मांग

सम्मेलन को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए राज्य महासचिव कुमार बिंदेश्वर सिंह ने सरकार से आंगनबाड़ी कर्मियों को अविलंब नियमित करने की मांग उठाई. उन्होंने स्पष्ट कहा कि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य और पोषण की रीढ़ बन चुकीं आंगनबाड़ी सेविकाओं को तृतीय श्रेणी (वर्ग-3) और सहायिकाओं को चतुर्थ श्रेणी (वर्ग-4) का सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए. उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक इन्हें पूर्ण सरकारी कर्मी का दर्जा नहीं मिल जाता, तब तक सेविकाओं को न्यूनतम 26,000 रुपये और सहायिकाओं को 18,000 रुपये प्रतिमाह सम्मानजनक मानदेय का भुगतान सुनिश्चित किया जाए.

ग्रेच्युटी, 10 हजार पेंशन और लंबित मानदेय भुगतान पर जोर

वक्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि आंगनबाड़ी कर्मियों को उनकी लंबी सेवा के बदले ग्रेच्युटी का भुगतान तुरंत लागू किया जाए. इसके साथ ही सेवानिवृत्ति के उपरांत कर्मियों के सुरक्षित भविष्य के लिए 10 लाख रुपये एकमुश्त सहायता राशि अथवा 10,000 रुपये मासिक पेंशन का कानूनी प्रावधान होना चाहिए. नेताओं ने पिछले 6 से 7 माह से लंबित पड़े मानदेय का भुगतान अविलंब करने की मांग की और कहा कि कुछ माह पूर्व मानदेय की आधी राशि काटा जाना पूरी तरह नियम विरुद्ध और दुर्भाग्यपूर्ण था, जिसकी पुनरावृत्ति भविष्य में किसी भी कीमत पर नहीं होनी चाहिए.

आकस्मिकता निधि और मोबाइल-गैस मद की राशि सीधे खाते में भेजने की मांग

सम्मेलन में विभागीय व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की बात कहते हुए नेताओं ने मांग की कि पोषाहार मेनू के अनुसार बर्तनों की खरीद, केंद्र संचालन की आकस्मिकता निधि और गुणवत्तापूर्ण मोबाइल क्रय हेतु आवश्यक राशि सीधे सेविका के बैंक खाते में स्थानांतरित की जाए. परियोजना कार्यालय द्वारा की जाने वाली खरीद में गुणवत्ता और समयबद्धता का अभाव रहता है, जिससे केंद्र संचालन में बाधा आती है. इसके अतिरिक्त अप्रैल और मई माह से लंबित एलपीजी गैस सिलेंडर की राशि का भुगतान, मोबाइल रिचार्ज भत्ता और सभी सीडीपीओ द्वारा समय पर अनुभव प्रमाण पत्र निर्गत करने का निर्देश देने की मांग रखी गई. साथ ही तमिलनाडु की तर्ज पर एक माह का अग्रिम पोषाहार बांटकर ग्रीष्मावकाश लागू करने की वकालत भी की गई.

राज्य और जिला स्तर के प्रमुख पदाधिकारी रहे उपस्थित

इस महत्वपूर्ण जिला सम्मेलन में राज्य अध्यक्ष चंद्रावती देवी, प्रदेश अंकेक्षक गौतम कुमार सिंह, प्रदेश पदाधिकारी सबीन परवीन, जिला महासचिव ललीन शर्मा सहित संघ के कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे. सभी वक्ताओं ने एकजुटता प्रदर्शित करते हुए कहा कि यदि सरकार ने उनकी इन जायज मांगों पर शीघ्र सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में संगठन राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ने को बाध्य होगा.

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