जहानाबाद: अफजलपुर में गड्ढे में मगरमच्छ दिखने का एआई वीडियो वायरल होते ही उमड़े हजारों लोग; पटना-गया से पहुंची वन विभाग की टीम ने किया भंडाफोड़

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मगरमच्छ का ए आई जेनरेटेड तसबीर | Prabhat Khabar Network

अफजलपुर गांव में AI से बने मगरमच्छ के वीडियो ने हजारों लोगों को आकर्षित किया. वन विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर जांच की और ग्रामीणों को सच्चाई से अवगत कराया.

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Jehanabad News: जिले के पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत अफजलपुर गांव में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक एआई जनरेटेड वीडियो ने पूरे इलाके में भारी हड़कंप मचा दिया. वायरल वीडियो में गांव के समीप स्थित एक पानी भरे बड़े गड्ढे (चाट) में एक विशालकाय मगरमच्छ तैरते हुए दिखने का दावा किया गया था. वीडियो जंगल की आग की तरह विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और व्हाट्सएप ग्रुपों में फैल गया. इसके बाद गांव और आसपास के दर्जनों इलाकों से हजारों की संख्या में ग्रामीण और तमाशबीन मगरमच्छ को अपनी आंखों से देखने के लिए अफजलपुर पहुंचने लगे, जिससे दिनभर गांव में मेले जैसा माहौल और भारी कौतूहल बना रहा.

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एक नाबालिग युवक ने तैयार किया था एआई वीडियो

मामले की पड़ताल में पता चला कि अफजलपुर गांव के ही एक नाबालिग युवक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल की मदद से यह फर्जी वीडियो तैयार किया था. युवक ने वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया, जिसे स्थानीय लोगों ने असली समझ लिया. वीडियो देखने के बाद लोग अपने परिचितों को फोन कर बुलाने लगे और सैकड़ों युवा मोबाइल कैमरे चालू कर उस गड्ढे के चारों ओर मगरमच्छ की तलाश में जुट गए. देखते ही देखते यह अफवाह पूरे अनुमंडल क्षेत्र में फैल गई और लोगों में मगरमच्छ के हमले को लेकर दहशत का माहौल बन गया.

पटना और गया से दौड़ी वन विभाग की विशेष टीमें

गांव में मगरमच्छ की मौजूदगी और भारी भीड़ जुटने की खबर जैसे ही प्रशासनिक गलियारों में पहुंची, प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया. स्थानीय अंचलाधिकारी (सीओ) और पाली थानाध्यक्ष दलबल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे. मामले की संवेदनशीलता और वन्यजीव के खतरे को देखते हुए जहानाबाद जिला वन विभाग के अलावा पटना और गया से भी वन विभाग की विशेष रेस्क्यू टीमें अफजलपुर बुलाई गईं. विशेषज्ञ अधिकारियों की टीम ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर गड्ढे और आसपास के जलस्रोतों का घंटों तक गहन निरीक्षण किया.

जांच में सामने आई एआई की बाजीगरी, ग्रामीणों को समझाया गया सच

काफी देर तक की गई तकनीकी जांच, इलाके की छानबीन और ग्रामीणों से पूछताछ के बाद वन विभाग की टीम ने पुष्टि की कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार का कोई मगरमच्छ मौजूद नहीं है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो पूरी तरह फर्जी और एआई तकनीक से बनाया गया था. इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने लाउडस्पीकर और संवाद के जरिए ग्रामीणों को स्थिति से अवगत कराया तथा अफवाहों पर ध्यान न देने की समझाइश देकर भीड़ को वहां से हटाया.

फर्जी वीडियो शेयर न करने की चेतावनी, नाबालिग से पूछताछ जारी

वन विभाग और पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों से पुरजोर अपील की है कि आज के दौर में एआई से किसी भी वास्तविक दिखने वाली फर्जी तस्वीर या वीडियो को आसानी से गढ़ा जा सकता है, इसलिए सोशल मीडिया पर आई किसी भी भ्रामक सामग्री का बिना आधिकारिक पुष्टि के सत्यापन न करें और न ही उसे आगे शेयर करें. पुलिस ने बताया कि वीडियो बनाने और उसे वायरल करने वाले नाबालिग युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और पूरे मामले में विधिक पहलुओं के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है.

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