भोजपुर: बड़हरा में बाढ़ के बीच ‘संकटमोचक’ बनी SDRF की टीम; पांच दिनों में 100 से अधिक ग्रामीणों को रेस्क्यू कर पहुंचाया सुरक्षित स्थान
रेस्क्यू कर गर्भवती महिला को मेडिकल के लिए निकालकर ले जाती एसडीआरएफ टीम | Prabhat Khabar Network
बड़हरा प्रखंड में प्रलयंकारी बाढ़ के बीच राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम जीवनदायिनी साबित हो रही है. उफनती गंगा ने दर्जनों गांवों का संपर्क काट दिया है, ऐसे में एसडीआरएफ के जवान दिन-रात लोगों को बचाने के लिए अभियान चला रहे हैं. पिछले पांच दिनों में 100 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें बीमार, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं.
Arrah News: भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड क्षेत्र में आई प्रलयंकारी बाढ़ के बीच राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम स्थानीय ग्रामीणों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है. उफनती गंगा के कारण प्रखंड के दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से पूरी तरह कट चुका है और चारों ओर केवल पानी ही पानी नजर आ रहा है. ऐसे अत्यंत विकट समय में एसडीआरएफ के जवान पिछले पांच दिनों से दिन-रात एक कर सघन रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं. तेज जलधारा, अथाह गहराई और लगातार चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद इंस्पेक्टर बलराम राय के नेतृत्व में सब-इंस्पेक्टर बसंत सिंह, दिनानाथ कुमार सहित पूरी टीम नावों और आधुनिक बचाव उपकरणों के सहारे सुदूर जलमग्न बस्तियों तक पहुंचकर अब तक 100 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाल चुकी है.
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बखोरापुर पुल के पास नाव हादसे में पांच श्रद्धालुओं को बचाया
एसडीआरएफ के इस साहसिक अभियान के दौरान कई मौकों पर त्वरित कार्रवाई से बड़ी मानवीय त्रासदियां टली हैं. बीते दो सितंबर को छह लोग छोटी देशी नाव पर सवार होकर प्रसिद्ध बखोरापुर काली मंदिर दर्शन के लिए जा रहे थे. इसी क्रम में बखोरापुर-सकुचाही पुल के समीप भंवर और तेज धारा की चपेट में आकर नाव अनियंत्रित होकर पलट गई. नाव चालक किसी प्रकार तैरकर बाहर निकल गया, लेकिन उस पर सवार पांच अन्य श्रद्धालु गहरे पानी के बीच फंस गए और डूबने लगे. घटना की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की मोटरबोट तुरंत मौके पर पहुंची और जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए सभी पांचों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया.
डायलिसिस मरीज और सर्पदंश पीड़ितों के लिए बने जीवनरक्षक
बाढ़ के पानी से घिरे इलाकों में गंभीर रूप से बीमार लोगों को समय पर चिकित्सा सुविधा दिलाना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है. चार सितंबर को टीम ने फरहदा गांव निवासी अरुण सिंह को उनके घर से निकालकर डायलिसिस के लिए समय पर अस्पताल पहुंचाया. उसी दिन नथमलपुर गांव में एक महिला को विषैले सांप द्वारा डसने की आपात सूचना मिली. संपर्क मार्ग डूबे होने के बावजूद एसडीआरएफ के जवानों ने जलभराव के बीच नाव चलाकर महिला को तत्परता से निकाला और स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया, जिससे उसकी जान बच सकी.
गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर रेस्क्यू
पांच सितंबर को भी जवानों ने कई संवेदनशील मामलों में देवदूत की भूमिका निभाई. नेकनाम टोला निवासी रामकुमार राय की पत्नी पिंकी कुमारी की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया, साथ ही घर में पानी घुसने के कारण फंसे एक अन्य व्यक्ति को भी बचाया गया. महूदही गांव निवासी संजय पंडित के पुत्र प्रीतम कुमार को सर्पदंश के बाद तत्काल रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया. इसी तरह आलेखी टोला निवासी विकास कुमार की पत्नी ज्योति कुमारी को असहनीय प्रसव पीड़ा उठने पर बाढ़ के बीच से रेस्क्यू कर सुरक्षित प्रसूति केंद्र भेजा गया. वहीं इसी गांव के 80 वर्षीय वृद्ध रघुनाथ यादव की हालत बिगड़ने पर जवानों ने उन्हें तत्काल अस्पताल शिफ्ट कराया.
ग्रामीणों में बढ़ा भरोसा, विपरीत परिस्थितियों में भी अभियान जारी
सड़क संपर्क पूरी तरह भंग हो जाने के कारण बाढ़ पीड़ित अपने ही घरों में कैद होकर रह गए थे, लेकिन एसडीआरएफ की निरंतर सक्रियता ने ग्रामीणों में सुरक्षा और विश्वास का माहौल पैदा किया है. टीम द्वारा बीमारों, असहाय बुजुर्गों, नवप्रसूताओं और जहरीले जीव-जंतुओं के शिकार लोगों को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर तुरंत रेस्क्यू किया जा रहा है. विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों और जान जोखिम में डालकर लगातार चलाए जा रहे इस मानवीय अभियान की पूरे जिले में सराहना हो रही है.
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