आरा में रक्षाबंधन को लेकर बाजार गुलजार: ₹15 से लेकर ₹25,000 की सोने-चांदी की राखियां, देखें इस बार क्या है खास
राखी की खरीदारी करते लोग
Arrah Raksha Bandhan Rakhi Market : आरा के बाजारों में रक्षाबंधन की रौनक बढ़ गई है, जहां 15 रुपये से लेकर ₹25,000 तक की राखियां उपलब्ध हैं. सोने-चांदी की राखियों की विशेष मांग देखी जा रही है, जो इस बार के त्योहार को और भी खास बना रही हैं.
Arrah Raksha Bandhan Rakhi Market : आरा में रक्षाबंधन को लेकर बाजारों की रौनक बढ़ने लगी है. शहर से लेकर मोहल्लों तक राखी की दुकानें सज गई हैं और खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ पहुंच रही है. बाजार में 15 रुपये से लेकर 200-250 रुपये तक की सामान्य राखियां उपलब्ध हैं. वहीं, सोने और चांदी की राखियों की भी मांग देखी जा रही है. चांदी की राखियां 500 से 1500 रुपये और सोने की राखियां 10 हजार से 25 हजार रुपये तक बताई गई हैं.
आपके शहर में
रक्षाबंधन से पहले आरा में बढ़ी बाजार की चहल-पहल
रक्षाबंधन को लेकर आरा शहर और जिले के विभिन्न बाजारों में राखी की दुकानें सजने लगी हैं. रंग-बिरंगी और अलग-अलग डिजाइन की राखियां ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं. मुख्य बाजार के साथ ही मोहल्लों की सड़कों पर भी अस्थायी दुकानें लगाई गई हैं.

15 रुपये से शुरू होकर 250 रुपये तक पहुंची सामान्य राखियों की कीमत
बाजार में हर वर्ग के ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग कीमतों की राखियां उपलब्ध हैं. सामान्य राखियों की कीमत करीब 15 रुपये से शुरू होकर 200 से 250 रुपये तक बताई जा रही है. अलग-अलग डिजाइन और सजावट वाली राखियों को ग्राहक अपनी पसंद और बजट के अनुसार खरीद रहे हैं.
राखी की दुकानों पर उमड़ रही खरीदारों की भीड़
रक्षाबंधन नजदीक आने के साथ राखी खरीदने के लिए बाजार में लोगों की आवाजाही बढ़ गई है. दुकानदारों के अनुसार, भाई की पसंद और बहन की पसंद को ध्यान में रखते हुए लोग अलग-अलग डिजाइन की राखियां देख रहे हैं. बाजार में बढ़ी भीड़ से मुख्य सड़कों और आसपास के इलाकों में भी चहल-पहल बढ़ गई है.
सोने और चांदी की राखियों ने खींचा ग्राहकों का ध्यान
सामान्य राखियों के अलावा आरा के आभूषण बाजार में सोने और चांदी की राखियां भी उपलब्ध हैं. आर्थिक रूप से सक्षम ग्राहक इन राखियों की खरीदारी के लिए ज्वेलरी दुकानों का रुख कर रहे हैं. अलग-अलग डिजाइन में तैयार की गई इन राखियों को लेकर ग्राहकों में रुचि दिखाई दे रही है.
चांदी की राखी 500 से 1500 रुपये तक
जैन आर्नामेंट्स के प्रोपराइटर निखिल कुमार जैन के अनुसार, बाजार में चांदी की राखियों की कीमत करीब 500 रुपये से 1500 रुपये तक है. उन्होंने बताया कि ग्राहकों की पसंद को देखते हुए अलग-अलग डिजाइन में चांदी की राखियां तैयार कराई गई हैं.
सोने की राखियों की कीमत 10 हजार से 25 हजार रुपये तक
बाजार में सोने की राखियां भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं. इनकी कीमत करीब 10 हजार रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक बताई गई है. दुकानदार के अनुसार, ग्राहक इन राखियों के डिजाइन और लुक को पसंद कर रहे हैं. हालांकि, इनकी खरीदारी सामान्य राखियों की तुलना में सीमित वर्ग के ग्राहक कर रहे हैं.
रक्षाबंधन में भाई-बहन के रिश्ते का खास महत्व
रक्षाबंधन को भाई-बहन के प्रेम और विश्वास से जुड़े प्रमुख त्योहार के रूप में मनाया जाता है. इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी या रक्षा सूत्र बांधती है और भाई बहन की रक्षा तथा सहयोग का संकल्प लेते हैं. इसी भाव के कारण इस पर्व को परिवार और रिश्तों से जुड़ा खास अवसर माना जाता है.
पौराणिक कथाओं में भी मिलता है रक्षा सूत्र का उल्लेख
रक्षाबंधन के महत्व को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं. महाभारत से जुड़ी मान्यता के अनुसार, भगवान कृष्ण के हाथ में चोट लगने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक हिस्सा बांध दिया था. मान्यता है कि इसके बाद कृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा का संकल्प लिया और चीरहरण के प्रसंग में उनकी लाज बचाई.
राजा बलि और मां लक्ष्मी की कथा भी है प्रचलित
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु के राजा बलि के साथ पाताल लोक में रहने के दौरान मां लक्ष्मी चिंतित हुईं. मान्यता है कि नारद मुनि की सलाह पर लक्ष्मी ने राजा बलि को भाई बनाया और उनके हाथ में रक्षा सूत्र बांधा. इसके बाद उन्होंने उपहार में भगवान विष्णु को मांगा और विष्णु उनके साथ लौट आए.
इंद्र और शचि की कथा से भी जोड़ा जाता है रक्षासूत्र
एक अन्य मान्यता में रक्षासूत्र की परंपरा को इंद्र और उनकी पत्नी शचि से जोड़ा जाता है. कथा के अनुसार, जब इंद्र वृत्रासुर से युद्ध के लिए जा रहे थे, तब शचि ने उनकी रक्षा की कामना से उनके हाथ में कलावा या मौली बांधी थी. धार्मिक मान्यताओं में इसे भी रक्षा सूत्र की परंपरा से जुड़ी कथा माना जाता है.
पूजा की थाली में रखें ये सामग्री
ज्योतिषाचार्य पं. गिरधर तिवारी के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन पूजा की थाली में रोली, चंदन, अक्षत, दही, राखी, मिठाई और घी का दीपक रखा जा सकता है. पूजा की थाली को पहले भगवान को समर्पित करने के बाद भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाने की बात कही गई है.
तिलक के बाद बांधा जाता है रक्षा सूत्र
बताए गए विधि-विधान के अनुसार, बहन पहले भाई के माथे पर तिलक लगाती है. इसके बाद रक्षा सूत्र बांधकर आरती की जाती है और मिठाई खिलाई जाती है. बहन भाई की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती है. इसके बाद परिवार के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने और बहन को उपहार देने की परंपरा भी बताई गई है.
Also Read : भोजपुर के बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए बड़ी खबर, खेतों में फसल नुकसान का सर्वे शुरू
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए