भोजपुर : हरिगांव हेल्थ सेंटर में मरीज बेहाल, डॉक्टरों के लिए AC कमरे में आराम तो मरीजों को पंखा भी नहीं

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हरिगांव हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर

भोजपुर के हरिगांव स्थित स्वास्थ्य केंद्र की दयनीय स्थिति सामने आई है. जहां डॉक्टरों के लिए आरामदायक व्यवस्था है, वहीं मरीजों को बुनियादी सुविधाओं तक से वंचित रहना पड़ रहा है. सरकारी दावों की पोल खोलती इस अव्यवस्था पर रिपोर्ट.

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Bhojpur Harigaon Health Centre : स्वास्थ्य विभाग की बदहाल व्यवस्था का असर जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सदर अस्पताल में भी देखने को मिल रहा है. छोटे अस्पतालों में स्थिति और भी खराब है.

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एक ओर जहां चिकित्सकों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, वहीं मरीजों को कई बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं. इससे सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों पर सवाल उठ रहे हैं.

हरिगांव अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र की खस्ता हालत

जिले के जगदीशपुर थाना क्षेत्र के हरिगांव स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति काफी दयनीय है और सरकार का इस पर कोई विशेष ध्यान नहीं है, जिससे लोगों को इस स्वास्थ्य केंद्र का कोई खास लाभ नहीं मिल रहा है.

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ऐसे में मरीजों को मजबूरी में इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जहां उन्हें भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है.

मॉरीशस के प्रधानमंत्री के नाम पर है स्वास्थ्य केंद्र

उल्लेखनीय है कि यह स्वास्थ्य केंद्र मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम के नाम पर है. डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम के पूर्वज इसी गांव के रहने वाले थे, जिन्हें अंग्रेजों ने अपने शासनकाल में गिरमिटिया मजदूर के रूप में मॉरीशस भेजा था.

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अस्पताल में कमरों की उपलब्धता और स्टाफ की लापरवाही

इस अस्पताल में मरीजों के लिए कुल 6 कमरे बनाए गए हैं ताकि उन्हें सुविधा मिल सके और जांच की भी व्यवस्था की गई है, परंतु अधिकांश लोग गायब रहते हैं.

मनमर्जी से जांच करने वाले पहुंचते हैं और कंपाउंडर भी अपनी इच्छा से आते हैं, जबकि किसी तरह एक डॉक्टर बैठे हुए रहते हैं, पर सरकार द्वारा मरीजों के लिए दी गई अन्य सुविधाओं का कोई मायने नहीं रह गया है.

मरीजों की कठिनाई और प्रशासनिक उदासीनता

इस व्यवस्था के चलते मरीजों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, पर सदर अस्पताल प्रबंधन इसकी जांच कराने और इस पर किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई करने से बच रहा है.

क्या कहते हैं सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ. शिवेंद्र कुमार सिंहा ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था। इसकी जांच करायी जाएगी। मरीजों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य विभाग हमेशा प्रयासरत रहता है। जांच के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी पाये जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी


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