आरा: भूजल में आर्सेनिक की बढ़ रही मात्रा खतरे की घंटी! सेमिनार में विद्यार्थियों को किया गया जागरूक

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आर्सेनिक प्रदूषण पर सेमिनार में शामिल छात्र

एमएम महिला कॉलेज, आरा में 'बिहार में आर्सेनिक प्रदूषण' विषय पर एक सेमिनार आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में भूजल में आर्सेनिक की बढ़ती मात्रा को एक गंभीर चुनौती बताया गया. सेमिनार में विद्यार्थियों को प्रदूषण के स्रोत, रोकथाम के उपाय और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया.

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Arsenic Pollution in Bihar: एमएम महिला कॉलेज, आरा के जंतु विज्ञान विभाग की ओर से ‘‘बिहार में आर्सेनिक प्रदूषण’’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. नरेंद्र प्रताप पालित ने की. मुख्य अतिथि डॉ. विभा वर्मा रहीं, जबकि महाराजा कॉलेज, आरा की डॉ. उषा कुमारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं.

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भूजल में आर्सेनिक की बढ़ती मात्रा पर चर्चा

सेमिनार में वक्ताओं ने बिहार के भूजल में बढ़ती आर्सेनिक की मात्रा को गंभीर पर्यावरणीय एवं जनस्वास्थ्य चुनौती बताया. डॉ. विभा वर्मा ने विभिन्न केस स्टडी के माध्यम से आर्सेनिक प्रदूषण के दुष्प्रभावों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि दूषित भूजल के लंबे समय तक सेवन से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. उन्होंने आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, पानी की नियमित जांच और लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने पर जोर दिया.

आर्सेनिक प्रदूषण पर सेमिनार में शामिल गणमान्य
आर्सेनिक प्रदूषण पर सेमिनार में शामिल गणमान्य

प्रदूषण के स्रोत और रोकथाम के उपाय बताये

जंतु विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष राखी सिंह ने आर्सेनिक प्रदूषण के स्रोत, जल प्रदूषण की प्रक्रिया तथा इसके नियंत्रण और रोकथाम के उपायों पर प्रकाश डाला. प्राचार्य प्रो. डॉ. नरेंद्र प्रताप पालित ने कहा कि पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता पैदा करना उच्च शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. उन्होंने विद्यार्थियों से स्वच्छ जल और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग रहने का आह्वान किया.

सर्वश्रेष्ठ वक्ता प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

कार्यक्रम के दौरान सर्वश्रेष्ठ वक्ता प्रतियोगिता भी आयोजित की गयी. इसमें एकता कुमारी, नांसी गोस्वामी और सिमरन सिंह को प्रथम पुरस्कार, मोहिनी पटेल (सेमेस्टर-7) को द्वितीय तथा अंजलि गुप्ता और अनिशा कुमारी को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया. निर्णायक मंडल में मनोविज्ञान विभाग की डॉ. सादिया और रसायन विज्ञान विभाग की डॉ. प्रियंका शामिल रहीं.

शिक्षक और विद्यार्थियों ने की सहभागिता

सेमिनार में प्रो. डॉ. राजीव कुमार (बर्सर), डॉ. शुमैला फातिमा, डॉ. सरोज कुमारी, डॉ. अमरेश कुमार, डॉ. कंचन कुमारी, डॉ. नेहा वर्मा और डॉ. शीला समेत महाविद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे. कार्यक्रम के अंत में डॉ. राजबाला ने धन्यवाद ज्ञापन किया. उन्होंने प्राचार्य, अतिथियों, शिक्षकों, निर्णायक मंडल और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार जताया.

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