"वो बुर्का या नकाब नहीं, सिर्फ काले कपड़े थे..." फारबिसगंज कोचिंग वीडियो विवाद पर बवाल के बीच डायरेक्टर की सफाई; जताया खेद

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थाना में आवेदन देने पहुंचे कांग्रेस अल्प संख्यक विभाग के जिलाध्यक्ष सहित अन्य | Prabhat Khabar Network

फारबिसगंज के एक कोचिंग संस्थान में छात्राओं द्वारा प्रस्तुति को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी की मांग की है।

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फारबिसगंज (अररिया). एससीपी कोचिंग संस्थान से संबंधित कथित वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी को लेकर अररिया जिला कांग्रेस कमेटी के अल्पसंख्यक विभाग के जिलाध्यक्ष सैफ अली खान ने फारबिसगंज थाना में आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई की मांग की है. आवेदन में उन्होंने आरोप लगाया है कि वायरल वीडियो में बुर्का या हिजाब जैसे परिधान में छात्राओं को आपत्तिजनक गीत पर प्रस्तुति करते हुए दिखाया गया है. उन्होंने इसे एक समुदाय की धार्मिक पहचान और भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया है.

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कोचिंग संचालक पर नफरत फैलाने का आरोप

सैफ अली खान ने आरोप लगाया कि धार्मिक पहचान और आस्था से जुड़े विषयों को लेकर इस तरह की आपत्तिजनक प्रस्तुति या टिप्पणी सामाजिक तनाव का कारण बन सकती है. उन्होंने कथित तौर पर कोचिंग संचालक की मंशा पर भी सवाल उठाते हुए पूरे मामले की गंभीरता से जांच और दोषियों के खिलाफ न्यायसंगत कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस को वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पर की गयी टिप्पणी की जांच करनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके.

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने की कार्रवाई की मांग

इस मौके पर बिहार प्रदेश कांग्रेस महासचिव रहमत अली, प्रखंड अध्यक्ष सिबरन, हाफिज उमर फारूक, हाम्मद आलम, नौशाद अंसारी और सामाजिक कार्यकर्ता सरवर आलम सहित कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे. कार्यकर्ताओं ने भी मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की.

कोचिंग निदेशक बोले, काले कपड़े में था कार्यक्रम

वहीं मामले को लेकर एससीपी कोचिंग संस्थान के निदेशक ने आरोपों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस के अवसर पर बच्चों की ओर से एक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया था. इसमें बच्चों ने महज काले कपड़े पहनकर प्रस्तुति दी थी. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बुर्का या नकाब नहीं था. निदेशक ने कहा कि उनके संस्थान या संस्थान के बच्चों की ओर से किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का उद्देश्य नहीं था. उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थान को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी को लगता है कि कार्यक्रम से उनकी भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें खेद है.

आवेदन के आधार पर प्राथमिकी, जांच शुरू

फारबिसगंज थानाध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि प्राप्त आवेदन के आलोक में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है. पुलिस वायरल वीडियो और पूरे मामले से जुड़े तथ्यों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई करेगी.

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