मिट्टी को आकार देकर बबली ने संवारी परिवार की तकदीर, हर माह कमा रहीं 8 हजार रुपये
मिट्टी का बर्तन बेचती बबली देवी | Prabhat Khabar Network
अररिया की बबली देवी ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने पुश्तैनी मिट्टी के बर्तन के काम को नई पहचान दी और अब हर महीने आठ हजार रुपये कमा रही हैं।
अररिया : मदनपुर की बबली देवी के लिए मिट्टी के बर्तन बनाना अब सिर्फ पुश्तैनी काम नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक मजबूती का जरिया बन चुका है. कभी सीमित आमदनी के कारण बच्चों की पढ़ाई और घरेलू खर्च चलाना चुनौती था, लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद बबली ने अपने पारंपरिक हुनर को नया रूप दिया. आज वह मिट्टी के बर्तन बनाकर करीब 8 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रही हैं और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.
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स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बदली काम करने की राह
बबली देवी के परिवार में पति-पत्नी, तीन बेटियां और एक बेटा समेत छह सदस्य हैं. पति की नियमित आय नहीं होने के कारण परिवार के खर्च में बबली का योगदान अहम है. गांव की अन्य जीविका दीदियों से प्रेरित होकर वह स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं. समूह से जुड़ने के बाद उन्हें नियमित बचत, बैंकिंग व्यवस्था, समूह की बैठकों और ऋण सुविधा की जानकारी मिली.
पुश्तैनी हुनर को मिला आर्थिक सहारा
समूह के माध्यम से जरूरत के अनुसार ऋण लेकर बबली ने मिट्टी के बर्तन बनाने के अपने पुश्तैनी काम को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया. आर्थिक सहयोग मिलने से कच्चे माल की उपलब्धता आसान हुई और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली. धीरे-धीरे उनके कारोबार में तेजी आई और आमदनी भी बढ़ने लगी.
हर महीने करीब 8 हजार रुपये की आमदनी
बबली वर्तमान में मिट्टी के बर्तन बनाकर करीब 8 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रही हैं. इससे वह परिवार की घरेलू जरूरतों के साथ बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्च को भी बेहतर तरीके से संभाल पा रही हैं. समूह से लिए गए ऋण का भुगतान भी वह धीरे-धीरे कर रही हैं.
आत्मनिर्भर बनने का मिला अवसर
बबली बताती हैं कि आमदनी बढ़ने से परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है. स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी हुई. वह नियमित रूप से समूह की बैठकों और सामुदायिक गतिविधियों में हिस्सा लेती हैं. उनका कहना है कि जीविका से जुड़ना उनके जीवन का महत्वपूर्ण निर्णय रहा, जिससे उन्हें अपने हुनर को आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला.
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