बिहार में आपदा से गाय और भैंस की मौत पर अब मिलेगा 30 हजार मुआवजा, मछुआरों को भी मिलेगी सहायता राशि

Bihar News: पशुओं की मौत पर मुआवजा को लेकर भी अनुदान की दर की सूची सभी जिलों को भेज दी गयी है. दुधारू पशु जैसे गाय, भैंस की मौत पर 30 हजार रुपये मिलेंगे. एक परिवार को तीन पशुओं के लिए ही मुआवजा मिलेगा.
पटना. आपदा के समय पशुओं और पशुपालकों को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए सरकार ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर दी है. बाढ़ पीड़ित गाय- भैंस (बड़े पशु) को छह किलो चारा और सहायता मानदर के रूप में 70 रुपये प्रतिदिन मिलेंगे. छोटे पशुओं के लिए तीन किलो चारा और 35 रुपये की मदद दी जायेगी. भेड़-बकरी के लिए एक किलो चारा का वितरण किया जायेगा. पशुओं की मौत पर मुआवजा को लेकर भी अनुदान की दर की सूची सभी जिलों को भेज दी गयी है. दुधारू पशु जैसे गाय, भैंस की मौत पर 30 हजार रुपये मिलेंगे. एक परिवार को तीन पशुओं के लिए ही मुआवजा मिलेगा.
शनिवार को बामेती सभागार में बिहार राज्य आपदा प्राधिकार के उपाध्यक्ष डॉ उदय कांत मिश्र की अध्यक्षता में पशुपालन एवं मत्स्य निदेशालय के वरीय पदाधिकारियों की कार्यशाला का आयोजन किया गया. इसमें आपदा के समय पशुओं और पशुपालकों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में जानकारी दी गयी. पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के सचिव डॉ एन सरवण कुमार ने बताया कि आपदा की घड़ी में पशुपालकों को हर संभव सहायता के लिए एक सप्ताह के अंदर जिला स्तर पर कार्यशाला का आयोजन कर लिया जायेगा. 15 जून तक सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएगी.
सरकार बाढ़ आदि आपदा में मछुआरों को होने नुकसान की भी भरपायी करेगी. नाव को आंशिक नुकसान पहुंचता है, तो मरम्मत के लिए 4100 रुपये, पूरी तरह से क्षतिग्रस्त नाव के लिए 9600 रुपये दिये जायेंगे. यदि जाल पूरी तरह नष्ट हो जाती है, तो 2600 रुपये का अनुदान मिलेगा. थोड़े नुकसान पर 2100 रुपये का प्रावधान है. मत्स्य बीज फार्म के लिए 8200 प्रति हेक्टेयर इनपुट सब्सिडी दी जायेगी. मछली फार्म पुनर्स्थापन व मरम्मत के लिए 12 हजार 200 प्रति हेक्टेयर अनुदान का प्रावधान है.
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आपदा की मानक संचालन प्रक्रिया की पुस्तिका को सभी जिला पशुपालन पदाधिकारी के माध्यम से विधायक, प्रमंडलीय आयुक्त, डीएम, जिला आपदा पदाधिकारी, सभी एसडीओ तथा मुखिया को उपलब्ध कराने के लिए वितरित की गयी है. पशु की मौत पर अनुदान कैसे दिया जायेगा इसकी प्रक्रिया को समाचार पत्रों, रेडियो एवं दूरदर्शन के माध्यम से प्रचारित- प्रसारित कराया जायेगा. -डॉ रमेश कुमार, सहायक निदेशक पशुपालन सूचना एवं प्रसार
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