BCCI Supreme Court Hearing: BCCI और राज्य क्रिकेट संघों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, Sports Act पर मांगा जवाब

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बीसीसीआई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त (एक्स)

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BCCI Supreme Court Hearing: BCCI और राज्य क्रिकेट संघों को National Sports Governance Act 2025 के दायरे में लाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया. जानें कोर्ट ने क्या कहा.

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BCCI Supreme Court Hearing: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और राज्य क्रिकेट संघों के प्रशासन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर अहम सवाल उठाया है. कोर्ट ने पूछा है कि BCCI और उसके राज्य संघों को नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025 के दायरे में क्यों नहीं लाया जाना चाहिए?

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चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान BCCI और राज्य क्रिकेट संघों की ओर से पेश वकीलों से इस मुद्दे पर निर्देश लेकर जवाब देने को कहा. बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं.

12 साल से चल रहा है क्रिकेट प्रशासन का मामला

BCCI से जुड़े प्रशासनिक सुधारों का मामला सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2014 से चल रहा है. इस दौरान कोर्ट ने क्रिकेट प्रशासन में सुधार के लिए कई अहम कदम उठाए. अलग-अलग राज्य क्रिकेट संघों और उनके पदाधिकारियों की ओर से समय-समय पर संविधान, चुनाव और प्रशासन से जुड़े मुद्दे भी कोर्ट के सामने आते रहे हैं.

इसी लगातार चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच अब सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया है कि जब देश में खेल प्रशासन के लिए नया केंद्रीय कानून लागू हो चुका है, तो BCCI और राज्य क्रिकेट संघों की व्यवस्था उसके दायरे से बाहर क्यों रहे.

लोढ़ा कमेटी के बाद BCCI में क्या बदला था?

क्रिकेट प्रशासन में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व CJI आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी. कमेटी की सिफारिशों के आधार पर BCCI के कामकाज और संविधान में कई बदलाव किए गए. सितंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने BCCI के संविधान में कुछ बदलावों को मंजूरी दी थी. इसके तहत किसी पदाधिकारी को राज्य क्रिकेट संघ और BCCI में मिलाकर कुल 12 साल तक लगातार काम करने की अनुमति दी गई थी.

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इसके बाद तीन साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड रखा गया. यानी उस समय कोर्ट ने BCCI की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में कुछ राहत दी थी. अब नए कानून के लागू होने के बाद यह सवाल फिर सामने आ गया है कि क्रिकेट बोर्ड की व्यवस्था आगे किस नियम के तहत चलेगी.

नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट लागू होने से क्या बदलेगा?

नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025 देश में खेल संस्थाओं के प्रशासन के लिए नया कानूनी ढांचा तैयार करता है. केंद्र सरकार ने इसके तहत अलग-अलग नियम और प्रावधान भी अधिसूचित किए हैं. अगर सुप्रीम कोर्ट BCCI और राज्य क्रिकेट संघों को इस कानून के दायरे में लाने का रास्ता साफ करता है, तो क्रिकेट प्रशासन में पदाधिकारियों के कार्यकाल, चुनाव, शासन व्यवस्था और जवाबदेही से जुड़े नियमों पर इसका असर पड़ सकता है. सबसे अहम बात यह है कि इसका असर सिर्फ BCCI तक सीमित नहीं होगा. राज्य क्रिकेट संघों की प्रशासनिक व्यवस्था भी इससे प्रभावित हो सकती है.

क्या क्रिकेट विवाद अब कानूनी संस्था तक जाएंगे?

नए खेल कानून में खेल प्रशासन से जुड़े विवादों के लिए अलग संस्थागत व्यवस्था का प्रावधान है. ऐसे में BCCI और राज्य संघों को कानून के तहत लाए जाने की स्थिति में क्रिकेट से जुड़े प्रशासनिक विवादों के निपटारे का तरीका भी बदल सकता है.

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह फैसला नहीं दिया है कि BCCI और सभी राज्य क्रिकेट संघ निश्चित रूप से इस कानून के अधीन होंगे. फिलहाल कोर्ट ने BCCI और राज्य संघों से इस बात पर जवाब मांगा है कि उन्हें इस कानून के दायरे में क्यों नहीं लाया जाना चाहिए.

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अब BCCI और राज्य संघों के जवाब पर नजर

सुप्रीम कोर्ट के इस सवाल के बाद BCCI और राज्य क्रिकेट संघों का पक्ष अहम हो गया है. उन्हें यह बताना होगा कि उनके पदाधिकारियों की सेवा शर्तों और कार्यकाल को नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025 के तहत क्यों नहीं रखा जाना चाहिए.

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