सब्जी बेची, रिक्शा चलाया...अब CWG 2026 में जीता मेडल, मां ने सरकार से की नौकरी की मांग

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झंडू कुमार ब्रॉन्ज मेडल के साथ (फोटो- सोशल मीडिया)

झंडू कुमार ब्रॉन्ज मेडल के साथ (फोटो- सोशल मीडिया)

ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में झंडू कुमार ने पैरा पावरलिफ्टिंग में भारत को ब्रॉन्ज मेडल दिलाया. पोलियो और आर्थिक तंगी से जूझते हुए उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है. उनकी मां अब सरकार से नौकरी की गुहार लगा रही हैं.

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ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले झंडू कुमार की सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष छिपा है. बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले झंडू ने 190 किलोग्राम का सर्वश्रेष्ठ वजन उठाकर भारत को ब्रॉन्ज मेडल दिलाया. यह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पैरा पावरलिफ्टिंग में भारत का पहला पदक भी रहा. अब भारत के खाते में कुल 6 मेडल आ गए हैं.

पोलियो के बाद भी नहीं मानी हार

झंडू के पिता रमानंद पासवान ने बताया कि उनके बेटे को 1990 में पोलियो हो गया था. इलाज के लिए उन्हें लखनऊ और कोलकाता तक ले जाया गया, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ. उन्होंने बताया कि परिवार आज भी किराए के मकान में रहता है और आर्थिक तंगी के बीच झंडू ने कभी हिम्मत नहीं हारी.

उसने रिक्शा चलाया, बिस्कुट बेचे और मेहनत-मजदूरी करके परिवार का सहारा बना. आज उसकी जीत से बहुत खुशी हो रही है.
Once they mocked his name, now Jhandu Kumar is a Commonwealth Games  medallist
झंडू कुमार के माता-पिता (फोटो- एक्स/ सोशल मीडिया)

मां बोलीं- अब बेटे को अच्छी नौकरी मिले

झंडू की मां कमला देवी ने कहा कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए पूरे परिवार ने कई मुश्किलें झेली हैं. उन्होंने बताया कि झंडू ई-रिक्शा चलाता था और परिवार की मदद के लिए छोटे-मोटे काम भी करता था. लोगों के ताने सुनने के बावजूद उसने हार नहीं मानी.

लोग उसका मजाक उड़ाते थे, लेकिन वह हमेशा कहता था कि एक दिन खुद को साबित करके दिखाऊंगा. आज उसने वह कर दिखाया है. अब मेरी बस यही इच्छा है कि सरकार उसे एक अच्छी नौकरी दे.

रिकॉर्ड तोड़ने से चूके

28 वर्षीय झंडू कुमार ने पहले प्रयास में 181 किलोग्राम और दूसरे प्रयास में 190 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया. तीसरे प्रयास में उन्होंने 196 किलोग्राम उठाने की कोशिश की, जो सफल होती तो कॉमनवेल्थ गेम्स का नया रिकॉर्ड बन जाता. हालांकि वह इसमें सफल नहीं हो सके, लेकिन 190 किलोग्राम के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के दम पर ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रहे. उनकी इस उपलब्धि ने न सिर्फ भारत को पदक दिलाया, बल्कि संघर्ष और मेहनत की एक प्रेरणादायक कहानी भी दुनिया के सामने रख दी.

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उज्जवल सिन्हा

लेखक के बारे में

By उज्जवल सिन्हा

उज्जवल कुमार सिन्हा | स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट

उज्जवल कुमार सिन्हा एक अनुभवी स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट हैं और पिछले छह वर्षों से खेल पत्रकारिता एवं डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. वर्तमान में वह प्रभात खबर के स्पोर्ट्स सेक्शन में लीड की भूमिका निभा रहे हैं, जहां कंटेंट प्लानिंग, SEO-आधारित डिजिटल कंटेंट, एक्सप्लेनर, डेटा-ड्रिवन स्टोरी, एक्सक्लूसिव रिपोर्ट, लाइव कवरेज और प्रमुख राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की डिजिटल रणनीति से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालते हैं.

पत्रकारिता का अनुभव

अपने करियर के दौरान उज्जवल ने क्रिकेट, फुटबॉल, प्रो कबड्डी लीग, महिला क्रिकेट, रणजी ट्रॉफी, झारखंड प्रीमियर लीग (JPL) और अन्य प्रमुख खेल आयोजनों की व्यापक कवरेज की है. वह मैच रिपोर्ट, खिलाड़ियों की प्रोफाइल, रिकॉर्ड्स एवं आंकड़ों पर आधारित विश्लेषण, एक्सप्लेनर, विशेष फीचर स्टोरी और खेल जगत से जुड़े विषयों पर नियमित लेखन करते हैं. उनकी विशेष रुचि डेटा-आधारित खेल विश्लेषण और जटिल खेल विषयों को सरल एवं रोचक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में है.

पेशेवर सफर

प्रभात खबर से पहले उज्जवल नवभारत, CricTracker, स्पोर्ट्स तक (इंडिया टुडे ग्रुप), जनसत्ता और एपीएन न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू खिलाड़ियों, कोचों, खेल प्रशासकों और स्पोर्ट्स कमेंटेटरों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं. डिजिटल पत्रकारिता, रियल-टाइम न्यूज कवरेज, SEO रणनीति और ऑडियंस-केंद्रित कंटेंट निर्माण उनकी प्रमुख कार्यक्षमताओं में शामिल हैं.

शैक्षणिक पृष्ठभूमि

शैक्षणिक रूप से उज्जवल ने संत जेवियर्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी से मास कम्युनिकेशन में स्नातक तथा सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार से मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है.

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पत्रकारिता में आने से पहले उज्जवल स्वयं क्रिकेट खेल चुके हैं और बिहार स्टेट क्रिकेट कैंप का हिस्सा रहे हैं. मैदान पर खेलने का यह अनुभव उन्हें खेल की तकनीकी बारीकियों, खिलाड़ियों की मानसिकता, रणनीति और मैच परिस्थितियों को गहराई से समझने में मदद करता है. यही अनुभव उनकी रिपोर्टिंग और विश्लेषण को अधिक सटीक, तथ्यपरक और विश्वसनीय बनाता है.

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