ICC World Cup 2023 : पिछला तीन विश्वकप मेजबान देश ने जीता, क्या टीम इंडिया 2023 में दोहरा पाएगी इतिहास?
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 29 Sep 2023 1:40 PM
2023 में 13वां विश्वकप खेला जा रहा है, जिसकी मेजबानी भारत कर रहा है. इससे पहले भारत दो बार विश्वकप जीत चुका है. पहली बार भारत ने 1983 में इंग्लैंड में आयोजित विश्वकप जीता था. उस वक्त किसी को भी यह अनुमान नहीं था कि भारत विश्वकप जीत सकता है, क्योंकि भारत को कमजोर टीम माना जा रहा था.
क्रिकेट का महाकुंभ यानी विश्वकप 2023 कुछ ही दिनों में शुरू होने वाला है. इस बार यह टूर्नामेंट भारत में आयोजित किया जा रहा है. विश्वकप में हिस्सा ले रहीं टीमें भारत पहुंचने लगी हैं और उनका भव्य स्वागत भी यहां हो रहा है. 2011 का विश्वकप भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश में संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था, लेकिन इस साल यह आयोजन सिर्फ भारत में हो रहा है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि पिछले तीन विश्वकप में मेजबान देश ही विश्वकप विनर बनी है, ऐसे में सवाल यह है कि क्या भारत 2011 का इतिहास दोहरा पाएगा? आइए आंकड़ों पर गौर करें.
2023 में 13वां विश्वकप खेला जा रहा है, जिसकी मेजबानी भारत कर रहा है. इससे पहले भारत दो बार विश्वकप जीत चुका है. पहली बार भारत ने 1983 में इंग्लैंड में आयोजित विश्वकप जीता था. उस वक्त किसी को भी यह अनुमान नहीं था कि भारत विश्वकप जीत सकता है, क्योंकि भारत को कमजोर टीम माना जा रहा था. 2011 में भारत ने दूसरी बार विश्वकप जीता था. अब भारत को तीसरी बार विश्वकप जीतने का इंतजार है.
पिछले तीन विश्वकप के आंकड़ों पर अगर गौर करें तो उससे यह पता चलता है कि मेजबान देशों ने ही विश्वकप पर अपना कब्जा किया. शुरुआत 2011 से करते हैं. 2011 में विश्वकप भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था. उस साल महेंद्र सिंह धौनी के नेतृत्व में भारत ने शानदार खेल दिखाते हुए कप पर कब्जा किया. 2011 में भारत को सबसे प्रबल दावेदार के रूप में देखा भी जा रहा था.
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2015 में क्रिकेट का विश्वकप संयुक्त रूप से ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में आयोजित किया गया था. 2015 में ऑस्ट्रेलिया ने विश्वकप जीता था. उस वक्त ऑस्ट्रेलिया के कप्तान माइकल क्लार्क थे. ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड को फाइनल मुकाबले में हराया था. अबतक ऑस्ट्रेलिया से सर्वाधिक पांच बार विश्वकप जीता है. 2019 में विश्वकप क्रिकेट का आयोजन इंग्लैंड में हुआ था. इंग्लैंड ने ही विश्वकप अपने नाम किया था. इंग्लैंड का मुकाबला न्यूजीलैंड के साथ था और इंग्लैंड ने सुपर ओवर में यह रोमांचक मैच अपने नाम किया था. इस मैच में 241 का टारगेट था.
इन आंकड़ों के अनुसार 2011, 2015 और 2019 में मेजबान देशों ने ही क्रिकेट विश्वकप को अपने नाम किया. ऐसे में जब 2023 का विश्वकप शुरू हो रहा है और भारतीय टीम का प्रदर्शन काबिलेगौर है, यह संभावना जताई जा रही है कि टीम इंडिया इस बार फिर विश्वकप पर अपना कब्जा जमा सकती हैं. सबसे पाॅजिटिव बात जो इस टूर्नामेंट में है वो है अपनी पिच पर खेलने का फायदा. इसके अलावा टीम इंडिया के खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी अपने चरम पर है. बात अगर बैटर की करें तो विराट कोहली, शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर सभी फाॅर्म में हैं. रविंद्र जडेजा अपनी बैट और गेंद दोनों से आग उगलने की क्षमता रखते हैं और वे लगातार इस बात को साबित भी कर रहे हैं. भारतीय तेज गेंदबाज चाहे वो जसप्रीत बुमराह हों,मोहम्मद शमी हों या फिर मोहम्मद सिराज सभी अपने फाॅर्म के उस दौर में है कि बल्लेबाज उनसे नाम से खौफ खाएं. रोहित शर्मा एक बेहतर कप्तान हैं, इसमें भी कोई दो राय नहीं है.
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08 अक्टूबर : भारत vs ऑस्ट्रेलिया, चेन्नई
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11 अक्टूबर : भारत vs अफगानिस्तान, नई दिल्ली
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14 अक्टूबर : भारत vs पाकिस्तान, अहमदाबाद
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19 अक्टूबर : भारत vs बांग्लादेश, पुणे
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22 अक्टूबर : भारत vs न्यूजीलैंड, धर्मशाला
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29 अक्टूबर : भारत vs इंग्लैंड, लखनऊ
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02 नवंबर : भारत vs श्रीलंका, मुंबई
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05 नवंबर : भारत vs साउथ अफ्रीका, कोलकाता
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12 नवंबर : भारत vs नीदरलैंड्स, बेंगलुरु
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रोहित शर्मा (कप्तान)
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हार्दिक पंड्या
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शुभमन गिल
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विराट कोहली
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श्रेयस अय्यर
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केएल राहुल
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रवींद्र जडेजा
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शार्दुल ठाकुर
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जसप्रीत बुमराह
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मोहम्मद सिराज
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कुलदीप यादव
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मोहम्मद शमी
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रविचंद्रन अश्विन
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ईशान किशन
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सूर्यकुमार यादव.
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लेखक के बारे में
By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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