Asia Cup 2022: गंभीर आर्थिक संकट के बीच श्रीलंका एशिया कप की मेजबानी के लिए उत्सुक, एक रिपोर्ट में दावा

एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन 2022 के अगस्त महीने में होने वाला है. श्रीलंका इस टूर्नामेंट की मेजबानी करने के लिए तैयार है. जबकि देश आर्थिक संकट में है. श्रीलंका में खाने के सामान और तेल की काफी किल्लत हो गयी और देश इस समय कई मित्र देशों से मदद लेने को मजबूर है.
एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) के एक सूत्र ने कहा कि श्रीलंका आगामी एशिया कप की मेजबानी करना चाहता है. एशिया कप इसी साल 27 अगस्त से शुरू होगा, जो पहले से ही श्रीलंका में शेड्यूल किया गया है. अब जबकि श्रीलंका टूर्नामेंट का मेजबान है, तब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या इस गंभीर आर्थिक संकट के बावजूद श्रीलंका एशिया कप की मेजबानी कर सकता है.
समाचार एजेंसी एएनआई ने एशियाई क्रिकेट परिषद के एक अधिकारी के हवाले से कहा कि श्रीलंका क्रिकेट अधिकारियों और एसीसी अध्यक्ष ने अहमदाबाद में आईपीएल फाइनल के मौके पर मुलाकात की. इस बैठक के दौरान, श्रीलंकाई अधिकारियों ने बताया कि वे एशिया कप की मेजबानी करना चाहते हैं और इसके लिए व्यवस्था कर रहे हैं. श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड इस आयोजन की मेजबानी करने के लिए उत्सुक है और उन्होंने बैठक के दौरान अपना रुख स्पष्ट किया.
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इससे पहले, एसीसी अध्यक्ष जय शाह ने एएनआई को बताया था कि वह आईपीएल फाइनल के दौरान एसएलसी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे. सूत्र ने हालांकि कहा कि मेजबानी के अधिकारों के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है और कुछ अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है. यदि श्रीलंका इस आयोजन की मेजबानी नहीं कर सकता है तो संयुक्त अरब अमीरात और बांग्लादेश पर भी विचार किया जा रहा है.
सूत्र ने कहा कि यह अपनी मूल तारीख से पहले भी शुरू हो सकता है, उम्मीद है कि एक या दो दिन में फैसला हो जायेगा और एसीसी आधिकारिक घोषणा करेगी. महामारी की शुरुआत के बाद से श्रीलंका भोजन और ईंधन की कमी के साथ एक गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, जिससे द्वीप राष्ट्र में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं. श्रीलंका की सरकार भी गिर गयी है.
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COVID-19 महामारी की शुरुआत के बाद से अर्थव्यवस्था में गिरावट आयी है, जिससे पर्यटन प्रभावित हुआ है, जो श्रीलंका के सकल घरेलू उत्पाद में सबसे बड़ा योगदानकर्ता है. श्रीलंका को विदेशी मुद्रा की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है, जिससे खाद्य और ईंधन आयात करने की उसकी क्षमता प्रभावित हुई है. आवश्यक वस्तुओं की कमी ने श्रीलंका को मित्र देशों से सहायता लेने के लिए मजबूर किया है.
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