Varalakshmi Vrat Katha: इस व्रत कथा के बिना अधूरा माना जाता है वरलक्ष्मी व्रत, पढें पौराणिक कथा

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वरलक्ष्मी. इमेज- एआई

वरलक्ष्मी व्रत माता लक्ष्मी का वरदान देने वाला स्वरूप है. इस व्रत कथा के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है. जानें क्यों शिव भक्त चित्रनेमि को मिला था श्राप और कैसे मिली मुक्ति.

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Varalakshmi Vrat Katha: धर्म-शास्त्रों के अनुसार, वरलक्ष्मी माता लक्ष्मी के आठ स्वरूपों में से एक हैं. माता लक्ष्मी का यह स्वरूप वरदान देने वाला माना जाता है. पौराणिक मान्यता है कि माता लक्ष्मी के इस स्वरूप की पूजा करने से धन और समृद्धि का वरदान प्राप्त होता है.

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हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल वरलक्ष्मी व्रत शुक्रवार, 28 अगस्त को रखा जाएगा. इस दिन लोग माता लक्ष्मी के वरलक्ष्मी स्वरूप की पूजा करेंगे. साथ ही, उनकी कृपा प्राप्त करने और धन-समृद्धि का वरदान पाने के लिए व्रत कथा का पाठ भी करेंगे.

मान्यता के अनुसार, वरलक्ष्मी व्रत तभी पूर्ण माना जाता है, जब पूजन के साथ-साथ सच्ची श्रद्धा से इस व्रत कथा का पाठ किया जाए. आइए जानते हैं वरलक्ष्मी व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा.

शिव भक्त चित्रनेमि ने क्यों बोला झूठ?

पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय भगवान शिव कैलाश पर्वत पर माता पार्वती के साथ चौसर खेल रहे थे. उस दौरान माता पार्वती और भगवान शिव के बीच इस बात को लेकर विवाद होने लगा कि विजेता कौन हुआ. खेल में दोनों ही स्वयं को विजेता घोषित करने लगे. तब दोनों ने वहां मौजूद चित्रनेमि, जो भगवान शिव के भक्त थे, से पूछा कि विजेता कौन हुआ. चित्रनेमि ने झूठ का सहारा लेते हुए भगवान शिव को विजेता बता दिया.

माता पार्वती ने चित्रनेमि को क्या श्राप दिया?

झूठ बोलने के कारण माता पार्वती ने चित्रनेमि को श्राप दे दिया. पार्वती ने श्राप देते हुए चित्रनेमि से कहा, "तुमने मेरे सामने झूठ बोलकर मेरा अपमान किया है, इसलिए तुम कुष्ठ रोग से ग्रसित हो जाओगे."

माता पार्वती के श्राप से चित्रनेमि बहुत डर गया. इसके बाद भगवान शिव ने अपने भक्त की रक्षा के लिए माता पार्वती से कहा, "देवि! मैंने झूठ बोलने से अधिक घोर और विकट पाप न तो देखा है और न ही सुना है. लेकिन चित्रनेमि विद्वान है और झूठ नहीं बोलता. इसलिए आप उस पर कृपा करें और उसका उद्धार करें."

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देवी पार्वती ने बताया श्राप से मुक्ति का उपाय

क्रोध शांत होने के बाद माता पार्वती ने चित्रनेमि को क्षमा करते हुए श्राप से मुक्ति का उपाय बताया. माता पार्वती ने चित्रनेमि से कहा, "जब सुंदर तालाब के किनारे अप्सराएं व्रत करेंगी और उसके बारे में बताएंगी, तब तुम श्राप से मुक्त हो जाओगे."

इसके बाद चित्रनेमि कैलाश पर्वत के नीचे स्थित एक तालाब के किनारे कुष्ठ रोगी के रूप में जीवन जीने लगा.

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अप्सराओं ने चित्रनेमि को बताया वरलक्ष्मी व्रत का महत्व

एक दिन चित्रनेमि ने तालाब के किनारे अप्सराओं को पूजा करते हुए देखा. उन्हें प्रणाम करते हुए उसने अप्सराओं से पूछा, "आप लोग किसका पूजन कर रही हैं और आपकी क्या मनोकामना है? कृपया मुझे ऐसे व्रत के बारे में बताएं, जिसका लाभ मुझे इस लोक के साथ-साथ परलोक में भी मिले. साथ ही, ऐसा उपाय भी बताएं, जिससे मुझे माता पार्वती के श्राप से मुक्ति मिल सके."

एक अप्सरा ने कहा, "सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला और जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला व्रत वरलक्ष्मी व्रत है. तुम भी अगर यह व्रत रखकर कथा का पाठ करोगे, तो तुम्हारी मनोकामना भी पूरी होगी."


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