वरलक्ष्मी व्रत 2026: पहली बार रख रही हैं व्रत? अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि के लिए इस विधि से करें पूजा
पहली बार रख रही हैं वरलक्ष्मी व्रत? जानें पूजा का सही समय और जरूरी नियम
वरलक्ष्मी व्रत 2026 शुक्रवार 28 अगस्त को रखा जाएगा. पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं यहां जानें पूजा की आसान विधि, कलश स्थापना के नियम, शुभ मुहूर्त, जरूरी सामग्री और माता वरलक्ष्मी व्रत का धार्मिक महत्व.
Varalakshmi Vrat 2026: वरलक्ष्मी व्रत माता लक्ष्मी के स्वरूप मां वरलक्ष्मी को समर्पित एक विशेष व्रत है. यह व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाएं पति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं. पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए पूजा की विधि और नियमों को जानना जरूरी है. वर्ष 2026 में वरलक्ष्मी व्रत शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को रखा जाएगा.
वरलक्ष्मी व्रत 2026: तारीख और पंचांग
- तारीख: शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
- सूर्योदय: सुबह 6:00 बजे
- सूर्यास्त: शाम 7:23 बजे
- तिथि: प्रतिपदा
- योग: सुकर्मा, रात 9:06 बजे तक
- नक्षत्र: शतभिषा, शाम 4:43 बजे तक
वरलक्ष्मी व्रत के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:36 से 5:18 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:15 से 1:09 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:56 से 3:49 बजे तक
- अमृत काल: सुबह 10:14 से 11:53 बजे तक
पहली बार वरलक्ष्मी व्रत रखने के नियम
सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ कर वहां चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. इसके बाद माता वरलक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. कई जगह कलश स्थापना की परंपरा भी है. कलश में जल भरकर उसके ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें.
पूजा के दौरान माता को फूल, फल, मिठाई, हल्दी, कुमकुम और अन्य श्रृंगार सामग्री अर्पित करें. मां वरलक्ष्मी का ध्यान करें और परिवार की सुख-शांति व समृद्धि की कामना करें. व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म की शुद्धता बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है.
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व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
- पूजा और व्रत को श्रद्धा व विश्वास के साथ करें.
- घर में साफ-सफाई और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें.
- पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें.
- अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य कर सकते हैं.
- पहली बार व्रत रख रही हैं तो सरल विधि से पूजा करना भी पर्याप्त है.
वरलक्ष्मी व्रत का महत्व
माता वरलक्ष्मी को महालक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है. मान्यता है कि ‘वर’ और ‘लक्ष्मी’ के मेल से बना नाम वरलक्ष्मी सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाली देवी का प्रतीक है. इस व्रत को रखने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत आर्थिक परेशानियों को दूर करने और परिवार के कल्याण के लिए किया जाता है. कई महिलाएं संतान सुख और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना से भी यह व्रत रखती हैं.
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