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Sarva Pitru Amavasya 2025: सर्वपितृ अमावस्या पर इन मंत्रों के जप से मिलेगा पितरों का आशीर्वाद

20 Sep, 2025 9:57 am
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Sarva Pitru Amavasya 2025

Sarva Pitru Amavasya 2025

Sarva Pitru Amavasya 2025: श्राद्ध पक्ष के अंतिम दिन को सर्व पितृ अमावस्या के नाम से जाना जाता है. इस विशेष तिथि पर सभी लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिनकी पुण्यतिथि उन्हें पता नहीं है. वर्ष 2025 में यह तिथि 21 सितंबर को पड़ रही है. मान्यता है कि श्रीहरि के 108 नामों का जाप करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.

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Sarva Pitru Amavasya 2025: हिंदू धर्म में श्राद्ध पक्ष का विशेष महत्व माना जाता है. पितृपक्ष के अंतिम दिन को सर्व पितृ अमावस्या कहा जाता है. इस वर्ष यह तिथि 21 सितंबर 2025 को पड़ रही है. मान्यता है कि इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है जिनकी मृत्यु की तिथि पता न हो या किसी कारण से उनका श्राद्ध पहले न किया जा सका हो. इसलिए इसे पितृपक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है.

इस दिन श्राद्ध कर्म करने से नहीं होती अकाल मृत्यु

धार्मिक परंपरा के अनुसार, सर्व पितृ अमावस्या की सुबह स्नान के जल में गंगाजल मिलाना पवित्र माना जाता है. स्नान के बाद पूर्वजों के लिए तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोज का आयोजन किया जाता है. ऐसा करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और वे संतुष्ट होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं. कहा जाता है कि इस दिन श्राद्ध कर्म करने से व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है.

इसलिए है ये दिन खास

पौराणिक मान्यता यह भी है कि सर्व पितृ अमावस्या पर श्राद्ध करने से उन पितरों की आत्माओं को शांति मिलती है जिनका श्राद्ध किसी कारण से रह गया हो. यह तिथि केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि पारिवारिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दिन श्रद्धा और भक्ति से किए गए कर्म पितरों को प्रसन्न करते हैं और व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता के साथ सौभाग्य लेकर आते हैं.

श्रीहरि के इन मंत्रों के जाप से मिलेगी सफलता   

इस तिथि पर भगवान विष्णु की आराधना करना अत्यंत शुभ फल प्रदान करता है. मान्यता है कि श्रीहरि के 108 नामों का जाप करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. पूजा के अंत में दीप जलाकर भगवान की आरती करने से न केवल पितरों की कृपा मिलती है बल्कि जीवन में सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है.

श्री हरि विष्णु के 108 नाम

1) ऊँ श्री विष्णवे नम:

2) ऊँ श्री परमात्मने नम:

3) ऊँ श्री पुरुषोत्तमाय नम:

4) ऊँ श्री क्षेत्र क्षेत्राज्ञाय नम:

5) ऊँ श्री केशवाय नम:

6) ऊँ श्री विराट पुरुषाय नम:

7) ऊँ श्री ईश्वराय नम:

8) ऊँ श्री हृषीकेशाय नम:

9) ऊँ श्री पद्मनाभाय नम:

10) ऊँ श्री विश्वकर्मणे नम:

11) ऊँ श्री कृष्णाय नम:

12) ऊँ श्री प्रजापतये नम:

13) ऊँ श्री हिरण्यगर्भाय नम:

14) ऊँ श्री सुरेशाय नम:

15) ऊँ श्री सर्वदर्शनाय नम:

16) ऊँ श्री सर्वेश्वराय नम:

17) ऊँ श्री अच्युताय नम:

18) ऊँ श्री वासुदेवाय नम:

19) ऊँ श्री पुण्डरीक्षाय नम:

20) ऊँ श्री नर-नारायणा नम:

21) ऊँ श्री जनार्दनाय नम:

22) ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नम:

23) ऊँ श्री चतुर्भुजाय नम:

24) ऊँ श्री धर्माध्यक्षाय नम:

25) ऊँ श्री उपेन्द्राय नम:

26) ऊँ श्री माधवाय नम:

27) ऊँ श्री महाबलाय नम:

28) ऊँ श्री गोविन्दाय नम:

29) ऊँ श्री प्रजापतये नम:

30) ऊँ श्री विश्वातमने नम:

31) ऊँ श्री सहस्त्राक्षाय नम:

32) ऊँ श्री नारायणाय नम:

33) ऊँ श्री सिद्ध संकल्पयाय नम:

34) ऊँ श्री महेन्द्राय नम:

35) ऊँ श्री वामनाय नम:

36) ऊँ श्री अनन्तजिते नम:

37) ऊँ श्री महीधराय नम:

38) ऊँ श्री गरुडध्वजाय नम:

39) ऊँ श्री लक्ष्मीपतये नम:

40) ऊँ श्री दामोदराय नम:

41) ऊँ श्री कमलापतये नम:

42) ऊँ श्री परमेश्वराय नम:

43) ऊँ श्री धनेश्वराय नम:

44) ऊँ श्री मुकुन्दाय नम:

45) ऊँ श्री आनन्दाय नम:

46) ऊँ श्री सत्यधर्माय नम:

47) ऊँ श्री उपेन्द्राय नम:

48) ऊँ श्री चक्रगदाधराय नम:

49) ऊँ श्री भगवते नम

50) ऊँ श्री शान्तिदाय नम:

51) ऊँ श्री गोपतये नम:

52) ऊँ श्री श्रीपतये नम:

53) ऊँ श्री श्रीहरये नम:

54) ऊँ श्री श्रीरघुनाथाय नम:

55) ऊँ श्री कपिलेश्वराय नम:

56) ऊँ श्री वाराहय नम:

57) ऊँ श्री नरसिंहाय नम:

58) ऊँ श्री रामाय नम:

59) ऊँ श्री हयग्रीवाय नम:

60) ऊँ श्री शोकनाशनाय नम:

61) ऊँ श्री विशुद्धात्मने नम :

62) ऊँ श्री केश्वाय नम:

63) ऊँ श्री धनंजाय नम:

64) ऊँ श्री ब्राह्मणप्रियाय नम:

65) ऊँ श्री श्री यदुश्रेष्ठाय नम:

66) ऊँ श्री लोकनाथाय नम:

67) ऊँ श्री भक्तवत्सलाय नम:

68) ऊँ श्री चतुर्मूर्तये नम:

69) ऊँ श्री एकपदे नम:

70) ऊँ श्री सुलोचनाय नम:

71) ऊँ श्री सर्वतोमुखाय नम:

72) ऊँ श्री सप्तवाहनाय नम:

73) ऊँ श्री वंशवर्धनाय नम:

74) ऊँ श्री योगिनेय नम:

75) ऊँ श्री धनुर्धराय नम:

76) ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नम:

77) ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नम

78) ऊँ श्री अक्रूराय नम:

79) ऊँ श्री दु:स्वपननाशनाय नम:

80) ऊँ श्री भूभवे नम:

81) ऊँ श्री प्राणदाय नम:

82) ऊँ श्री देवकी नन्दनाय नम:

83) ऊँ श्री शंख भृते नम:

84) ऊँ श्री सुरेशाय नम:

85) ऊँ श्री कमलनयनाय नम:

86) ऊँ श्री जगतगुरूवे नम:

87) ऊँ श्री सनातन नम:

88) ऊँ श्री सच्चिदानन्दाय नम:

89) ऊँ श्री द्वारकानाथाय नम:

90) ऊँ श्री दानवेन्द्र विनाशकाय नम:

91) ऊँ श्री दयानिधि नम:

92) ऊँ श्री एकातम्ने नम:

93) ऊँ श्री शत्रुजिते नम:

94) ऊँ श्री घनश्यामाय नम:

95) ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नम:

96) ऊँ श्री जरा-मरण-वर्जिताय नम:

97) ऊँ श्री सर्वयज्ञफलप्रदाय नम:

98) ऊँ श्री विराटपुरुषाय नम:

99) ऊँ श्री यशोदानन्दनयाय नम:

100) ऊँ श्री परमधार्मिकाय नम:

101) ऊँ श्री गरुडध्वजाय नम:

102) ऊँ श्री प्रभवे नम:

103) ऊँ श्री लक्ष्मीकान्ताजाय नम:

104) ऊँ श्री गगनसदृश्यमाय नम:

105) ऊँ श्री वामनाय नम:

106) ऊँ श्री हंसाय नम:

107) ऊँ श्री वयासाय नम:

108) ऊँ श्री प्रकटाय नम

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JayshreeAnand

लेखक के बारे में

By JayshreeAnand

कहानियों को पढ़ने और लिखने की रुचि ने मुझे पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. सीखने और समझने की इस यात्रा में मैं लगातार नए अनुभवों को अपनाते हुए खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करती हूं. वर्तमान मे मैं धार्मिक और सामाजिक पहलुओं को नजदीक से समझने और लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हूं.

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