कब है शनिदेव जयंती, जानिए इस मंत्र के जाप करने से सभी समस्याएं होती हैं दूर
Author : Radheshyam Kushwaha Published by : Prabhat Khabar Updated At : 18 May 2020 11:27 AM
हिन्दू धर्म के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर शनि जयंती मनाई जाती है. इस बार 22 मई को शनि जयंती मनाई जाएगी. शनिदेव जयंती कृत्तिका नक्षत्र में मनाई जाएगी. शनिदेव भगवान सूर्य और छाया के पुत्र हैं. उनके भाई यमराज और बहन यमुना हैं. शनि का रंग काला है और वे नीले वस्त्र धारण करते हैं.
हिन्दू धर्म के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर शनि जयंती मनाई जाती है. इस बार 22 मई को शनि जयंती मनाई जाएगी. शनिदेव जयंती कृत्तिका नक्षत्र में मनाई जाएगी. शनिदेव भगवान सूर्य और छाया के पुत्र हैं. उनके भाई यमराज और बहन यमुना हैं. शनि का रंग काला है और वे नीले वस्त्र धारण करते हैं. इसी तिथि पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए वट यानी बरगद की पूजा करती हैं. ये परंपरा पुराने समय से चली आ रही है. शनि जिन्हें कर्मफलदाता माना जाता है. दंडाधिकारी कहा जाता है, न्यायप्रिय माना जाता है. जो अपनी दृष्टि से राजा को भी रंक बना सकते हैं.
हिंदू धर्म में शनि देवता भी हैं और नवग्रहों में प्रमुख ग्रह भी जिन्हें ज्योतिषशास्त्र में बहुत अधिक महत्व मिला है. शनिदेव को सूर्य का पुत्र माना जाता है. मान्यता है कि ज्येष्ठ माह की अमावस्या को ही सूर्यदेव एवं छाया (संवर्णा) की संतान के रूप में शनि का जन्म हुआ था. शनि जयंती पर शनि की साढ़ेसाती-ढय्या के अशुभ से बचने के लिए तेल का दान करना चाहिए. किसी मंदिर में तेल चढ़ाएं. हनुमानजी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें. शनि के मंत्र ऊं शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप करें. इस मंत्र के जाप करने से सभी समस्याएं दूर हो जाती है.
22 मई को ज्येष्ठ माह की अमावस्या है. इस तिथि पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन के लिए बरगद की पूजा करती हैं. इस दिन महिलाएं पूरा शृंगार करती हैं. निर्जला व्रत रखती हैं और पति के सौभाग्य के लिए व्रत-उपवास करती हैं. वट-वृक्ष के नीचे बैठकर सावित्री और सत्यवान की कथा सुनती है. व्रत रखने वाली महिलाएं अगले दिन पूजा-अर्चना करने के बाद पारण करतीं है.
शनिदेव की पूजा अन्य देवी-देवताओं की तरह ही होती है. शनि जयंती के दिन उपवास भी रखा जाता है. सुबह स्नान करने के बाद लकड़ी के एक पाट पर साफ-सुथरे काले रंग के कपड़े को बिछाना चाहिये. कपड़ा नया हो तो बहुत अच्छा अन्यथा साफ अवश्य होना चाहिये. इसके बाद इस पर शनिदेव की प्रतिमा स्थापित करें. यदि प्रतिमा या तस्वीर न भी हो तो एक सुपारी के दोनों और शुद्ध घी व तेल का दीपक जलाये.
इसके पश्चात धूप जलाएं. फिर इस स्वरूप को पंचगव्य, पंचामृत, इत्र आदि से स्नान करवायें. सिंदूर, कुमकुम, काजल, अबीर, गुलाल आदि के साथ-साथ नीले या काले फूल शनिदेव को अर्पित करें. इमरती व तेल से बने पदार्थ अर्पित करें. वहीं, श्री फल के साथ-साथ अन्य फल भी अर्पित कर सकते हैं. पंचोपचार व पूजन की इस प्रक्रिया के बाद शनि मंत्र की एक माला का जाप करें. माला जाप के बाद शनि चालीसा का पाठ करें. फिर शनिदेव की आरती उतार कर पूजा संपन्न करना होता है.
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By Radheshyam Kushwaha
पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.
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