आनंद से सराबोर होते हैं छठ के चार दिन, रूठे रिश्तेदार भी अर्ध्य देने पहुंचते हैं घाट, मिलकर बनाते हैं प्रसाद
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Oct 2019 12:45 PM
अनुपमा सिंहanupmanu001@gmail.comदीवाली के खत्म होने के साथ ही लोग छठ की तैयारी में जुट चुके हैं. चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व की शुरुआत 31 अक्टूबर को (गुरुवार) नहाय-खाय से होगी. 1 नवंबर को खरना है जबकि 2 को पहला अर्ध्य लोग सूर्य को देंगे. 3 नवंबर को सुबह के अर्ध्य के साथ इस […]
अनुपमा सिंह
anupmanu001@gmail.com
दीवाली के खत्म होने के साथ ही लोग छठ की तैयारी में जुट चुके हैं. चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व की शुरुआत 31 अक्टूबर को (गुरुवार) नहाय-खाय से होगी. 1 नवंबर को खरना है जबकि 2 को पहला अर्ध्य लोग सूर्य को देंगे. 3 नवंबर को सुबह के अर्ध्य के साथ इस महापर्व का समापन हो जाएगा. छठ मात्र एक पर्व नहीं है, बल्कि उन भावनाओं का समावेश है, जिसमें रूठे फूफा, चाचा, मामा सब एक ही घाट पर एक साथ खड़े होकर अर्घ्य देते हैं, रात भर जाग कर प्रसाद बनाते हैं और परिवार में आपसी मतभेद से जिन लोगों की बीच बात तक बंद हो चुकी हो, उसके छठ करने पर भी पैर छूकर समृद्धि का आशीर्वाद लेते हैं.
जब उमंग में डूब कर परिवार के कोई सदस्य एकसाथ मिल कर नहाय-खाय के लिए गंगा जल लेने जाता है, कोई कद्दू समेत हरी सब्जियां खरीदने जाता है तो कुछ अन्य घर में मिट्टी का चूल्हा जोड़ कर प्रसाद बनाने की तैयारी करते हैं. छठव्रती जब गंगा स्नान करके लौटते हैं, तो उनके धुले कपड़ों को बच्चे टीवी-मोबाइल सब भूल कर खुशी-खुशी सूखाने के लिए लेने दौड़ पड़ते हैं. कद्दू भात का भोजन तैयार होने पर छठव्रती के खाने के बाद ही बाकी लोग खाते है. नहाय-खाय के उस कद्दू भात में जो स्वाद होता है, वो पांच सितारा होटल के खाने में भी नहीं मिल सकता है.
अगले दिन सांझ ढ़लते खरना का प्रसाद खाने के लिए टोले-मुहल्ले से लेकर परिवार तक के लोग एकजुट होते है. प्रसाद खाने से लेकर बांध कर ले जाने तक का सिलसिला देर रात तक चलता रहता है. फिर तीसरे दिन अहले सुबह से ही सारी साफ-सफाई निपटा कर चूल्हा जल जाता है और फिर शुरू होती है ठेकुआ तथा लडुआ बनाने की तैयारी. इसकी शुरुआत छठव्रती करती हैं, बाद में अन्य लोग जुड़ते हैं.
घर के पुरुष बाहर से फल फूल सूप दौड़ा के इंतजाम में व्यस्त रहते हैं. सांझ ढ़लने पर डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाता है. वापस लौट कर लोग चाय-पानी पीकर फिर लग जाते हैं अगले दिन मतलब उगते सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी में. रात भर जग कर तैयारी करने के बावजूद भी सुबह-सुबह नहा धोकर फिर से अर्घ्य्र देने की तैयारी करने का भी जो उत्साह होता है, उसका वर्णन शब्दों में करना मुश्किल है.
दरअसल छठ क्या है, इसे जानने और समझने के लिए इसमें शामिल होना जरूरी है. कारण छठ कोई त्योहार नहीं, यह एक पारंपरिक अनुष्ठान है, जो सदियों से पीढ़ी-दर-पीढी एक विरासत के तौर पर हस्तांतरित होता रहा है, बावजूद इसके इसका स्वरूप आज भी पूर्ववत बना हुआ है. अब तो अपना छठ इंटरनेशनल हो गया है. कहने का मतलब कि अब छठ बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश की सीमाओं को पार कर देश-विदेश में पहुंच चुका है. वहां भी इन प्रदेशों से गये लोग पूरे जोश और उत्साह से मना रहे हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










