पितृपक्ष से क्या आशय है? प्रेत और पितृ में क्या फ़र्क़ है ? जानें क्या कहते हैं सद्गुरु स्वामी आनंद जी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Sep 2019 7:39 AM
सद्गुरुश्री स्वामी आनंद जीसद्गुरु स्वामी आनंद जी एक आधुनिक सन्यासी हैं, जो पाखंड के धुरविरोधी हैं और संपूर्ण विश्व में भारतीय आध्यात्म व दर्शन के तार्किक तथा वैज्ञानिक पक्ष को उजागर कर रहे हैं. सद्गुरुश्री के नाम से प्रख्यात कार्पोरेट सेक्टर से अध्यात्म में क़दम रखने वाले यह आध्यात्मिक गुरु नक्षत्रीय गणनाओं तथा गूढ़ विधाओं […]
सद्गुरुश्री स्वामी आनंद जी
सद्गुरु स्वामी आनंद जी एक आधुनिक सन्यासी हैं, जो पाखंड के धुरविरोधी हैं और संपूर्ण विश्व में भारतीय आध्यात्म व दर्शन के तार्किक तथा वैज्ञानिक पक्ष को उजागर कर रहे हैं. सद्गुरुश्री के नाम से प्रख्यात कार्पोरेट सेक्टर से अध्यात्म में क़दम रखने वाले यह आध्यात्मिक गुरु नक्षत्रीय गणनाओं तथा गूढ़ विधाओं में पारंगत हैं तथा मनुष्य के आध्यात्मिक, सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक व्यवहार की गहरी पकड़ रखते हैं. आप भी इनसे अपनी समस्याओं को लेकर सवाल पूछ सकते हैं. इसके लिए आप इन समस्याओं के संबंध में लोगों के द्वारा किये गये सवाल के अंत में पता देख सकते हैं…
सवाल- पितृपक्ष से क्या आशय है? प्रेत और पितृ में क्या फ़र्क़ है?
-रमेश सिंह, सासाराम
जवाब- आध्यात्मिक मान्यताएं कहती हैं कि आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक विशिष्ट ब्रह्माण्डिय किरणें और ऊर्जा पृथ्वी का पूर्ण स्पर्श करती हैं और उन ऊर्जा में ही पितृऊर्जा समाहित होती है. 15 दिवस के पश्चात शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से पितृ के संग ब्रह्मांडीय किरणें वापस ब्रम्हाण्ड में लौट जाती हैं. इसलिए इस पखवाड़े पितृपक्ष कहते हैं. आध्यात्म कहता है कि एक स्थूल देह के अंत के बाद दशविधि और त्रयोदश कर्म-सपिण्डन तक दिवंगत आत्मा प्रेत देह में होती है. यूं समझे कि एक दैहिक जीवन में बने प्रियजन, प्रियतम व प्रिय वस्तुओं के बिछोह की स्थिति प्रेत है. पंचभौतिक देह के त्याग के बाद रूह में देह नष्ट होने के बाद भी काम, क्रोध लोभ, मोह, अहंकार, तृष्णा और क्षुधा शेष रह जाती है. सपिण्डन के बाद वो जब अस्थायी प्रेत शरीर से नए तन में अवतरित होती है, पितृ कहलाती है.
सवाल- श्राद्ध क्या है?
-रीमा राय, हाजीपुर
जवाब- श्राद्ध शब्द श्रद्धा से उपजा है, जो कभी अपने अस्तित्व से और अपनी जड़ों से जुड़ने, उसे पहचानने और सम्मान देने की एक सामाजिक मिशन, मुहिम या प्रक्रिया का हिस्सा थी, जिसने प्राणायाम, योग, व्रत, उपवास, यज्ञ और असहायों की सहायता जैसे अन्य कल्याणकारी सकारात्मक कर्मों और उपक्रमों की तरह कालांतर में आध्यात्मिक और धार्मिक चादर ओढ़ ली.
सवाल- क्या ऊन के गोले से वास्तु दोष होता है?
-नियति कुशवाहा, गिरीडीह
जवाब- ऊन मंगल की राशि मेष से संबंधित है. मंगल ऊर्जा का पुंज यानी आग का गोला है. लिहाज़ा ऊन के वस्त्र तो ठीक हैं पर प्राचीन मान्यतायें इसके गोले को आग का ऐसा गोला मानती हैं, जो यदि विकृत हो जाए, तो अपनी तपिश से नकारात्मक फल देता है. प्राचीन सलोहित शास्त्र जो आज लाल किताब के नाम से जानी जाती है, में ऊन और पतली रस्सी के बँधे गोले की घर में उपस्थिति को शुभ नहीं माना गया है. उस ग्रंथ के बहुत से शोध और हिस्से अब लुप्त हो चुके हैं। हो सकता है कि खोए हुए शोध पत्रों में इसका कोई तकनीकी या तार्किक पक्ष भी रहा हो, पर आज का सत्य तो ये है कि बचे हुए पन्नों में इस मान्यता का कोई वैज्ञानिक और तार्किक कारण नहीं मिलता. उन का वास्तु से कोई सीधा संबंध नहीं है.
सदगुरु ज्ञान- अग्नि तत्व
अग्नि उन पंच तत्वों में से एक है जिनसे हमारी देह निर्मित है, ऐसा आध्यात्मिक मान्यतायें कहती हैं. शरीर में इस तत्व के असंतुलन से ऊर्जा का ह्रास, क्रोध, आलस्य, तेजहीनता, आकर्षणहीनता, नपुंसकता और धन की कमी का सामना करना पड़ता. इसके असंतुलन से दांपत्य जीवन में तनाव, विवाह में विलम्ब और मित्रों व भाइयों से वैमनस्य होता है. अग्नि तत्व को सक्रीय करने के लिए थाली में भोजन नहीं छोड़ना चाहिए. असहाय लोगों की भूख मिटानी चाहिए। किसी की निन्दा या आलोचना से परहेज़ करना चाहिए.
–यदि कुंडली में मंगल शुभ हो तो भाइयों और मित्रों से सहयोग के साथ जीवन में कभी न कभी सरकारी अनुकंपा प्राप्त होती है और मित्र सदैव आस- पास ढाल की तरह खड़े नज़र आते हैं। इनकी राजनीति में सुप्त रुचि अवश्य होती है. इनका व्यक्तित्व आकर्षक होता है.
उपाय जो जीवन बदले
-यदि समय समय पर वृद्धाश्रम और विधवा आश्रम में जाकर वहां समाज की उपेक्षित विधवा स्त्रियों और उम्रदराज लोगों का तथा परिवार के बड़े बुजुर्गों का नियमित रूप से दोनो हाथों की समस्त उंगलियों से चरण स्पर्श किया जाए, तो बुरी घटना या दुर्घटना घटित नहीं होगी, ऐसा मान्यताएं कहती हैं.
यदि आपकी कोई ज्योतिषीय, आध्यात्मिक या गूढ़ जिज्ञासा हो, तो आप अपनी जन्म तिथि, जन्म समय व जन्म स्थान के साथ कम-से-कम शब्दों में हमें अपना प्रश्न saddgurushri@gmail.com पर भेजें. सब्जेक्ट लाइन में ‘प्रभात खबर’ जरूर लिखें. चुनिंदा सवालों के जवाब प्रकाशित किये जायेंगे.
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