गृह निर्माण में महत्वपूर्ण है शनि का स्थान भाव
शनि अगर आपके कुंडली के दूसरे भाव में हों, तो मकान बनाना अति शुभ है, लेकिन राहु चौथे एवं आठवें भाव में न हों. तीसरे भाव में शनि होने से उपाय स्वरूप कुत्ता पालना चाहिए, अन्यथा दरिद्रता का प्रकोप छा सकता है. लेकिन राहु चौथे एवं आठवें स्थान में न हो. वहीं अगर शनि चौथे भाव में हो, तो 42 वर्ष के बाद ही घर बनाएं.
पंचम शनि हो, तो पैतृक मकान या संतान द्वारा निर्मित घर मे रहें. अगर छठे शनि हो, तो 39 वर्ष की आयु के बाद मकान बनाना शुभ होता है. सप्तम भावस्थ शनि हों, तो मकान कभी भी बनाएं, लेकिन पैतृक मकान कभी न बेचें. अष्टम भाव में शनि हो, तब भी मकान न बनाएं. नवम भाव में स्थित शनि हों, तो गृह निर्माण करें मगर जब पत्नी गर्भावस्था नहीं हो. दशम भाव में स्थित शनि में मकान नहीं बनाना अच्छा है. अगर जरूरी है, तो 60 वर्ष के बाद ही मकान बनाएं, अन्यथा गरीबी आ जायेगी.
यदि कुंडली में एकादश भाव में शनि हों, तो 55 वर्ष के बाद ही घर बनाएं. लेकिन किसी भी स्थिति में घर दक्षिनामुखी नहीं हो. नहीं तो दुःख ही दुःख होगा. अगर शनि बारहवें घर में हो, तो मकान कभी भी बनाया जा सकता है, बशर्ते गृह निर्माण बीच में न रोकें. लेकिन ध्यान रहे उस वर्ष राहु चौथे या आठवें भाव में न हों. ज्योतिष जगत में ग्रहों के बलाबल के आधार पर जान लिया जाता है कि घर की आयु कितनी है, इसलिए गृह निर्माण के पहले ज्योतिषीय परामर्श लेना आवश्यक है.

