‘सजना अनाड़ी’ से अभिनय की प्रेरणा लेकर थियेटर की दुनिया में छा गये रांची के रंगकर्मी ऋषिकेश लाल

Jharkhand Foundation Day|Ranchi Ke Rangkarmi|वर्ष 2003 में ऋषिकेश लाल नये उत्सही युवाओं के साथ ‘युवा नाट्य संगीत अकादमी’ की स्थापना की. आरा में आयोजित ‘भिखारी ठाकुर रंग माहोत्सव’ में नाटक ‘पुनर्जन्म’ का मंचन किया. दर्शकों ने इसकी काफी सराहना की. इसके बाद नाटक के निर्देशन का सिलसिला चल पड़ा.
Jharkhand Foundation Day|Ranchi Ke Rangkarmi|ऋषिकेश लाल रांची के जाने-माने रंगकर्मी हैं. बचपन से ही कला एवं संस्कृति में उनकी रुचि थी. अपने दादा स्वर्गीय कृष्ण नारायण लाल के साथ कार्यक्रमों में जाया करते थे. इनका पारिवारिक माहौल नृत्य-संगीत का था. सन् 2000 में एक फिल्म आयी थी, जिसका नाम था- ‘सजना आनाड़ी’. इस फिल्म को देखने के बाद अभिनय के प्रति उनकी रुचि जगी. उन्होंने ‘सजना अनाड़ी’ फिल्म के मुख्य कलाकार शेखर वत्स से मुलाकात की. उनसे अपने मन की बात कही.
शेखर वत्स ने उनकी मुलाकात जितेंद्र वाढेर उर्फ जीतू भैया से करायी. जीतू भैया ने प्रो अजय मलकानी से उन्हें मिलवाया. ऋषिकेश लाल ने प्रो अजय मलकानी के सान्निध्य में अभिनय की बारीकियां सीखनी शुरू कर दी. यहीं से उनकी अभिनय यात्रा की शुरुआत हुई. उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, संगीत नाटक आकदमी (नयी दिल्ली), ईस्ट जोन कल्चर सेंटर (कलकत्ता), कला-संस्कृति, खेल कूद विभाग झारखंड सरकार से प्रशिक्षण प्राप्त किया.
Also Read: प्रकाश झा, अनुपम खेर संग काम कर चुके रंगकर्मी दीपक चौधरी को खलती है रांची में ऑडिटोरियम की कमी
उन्होंने अजय मलकानी, रतन थियाम, सतीश आनंद, आलोक चटर्जी, प्रवीर गुहा, उषा गांगुली, सत्यब्रत राउत, वी रामामूर्ति जैसे भारत के नामचीन निर्देशकों, प्रशिक्षकों के सान्निध्य में प्रशिक्षण लिया. नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) की ओर से आयोजित ‘भारत रंग महोत्सव 2001’ में नाटक ‘उलगुलान का अंत नहीं’ एवं वर्ष 2003 में ‘क्या छूट रहा है’ नाटक का मंचन किया.
वर्ष 2003 में ऋषिकेश लाल नये उत्सही युवाओं के साथ ‘युवा नाट्य संगीत अकादमी’ की स्थापना की. आरा में आयोजित ‘भिखारी ठाकुर रंग माहोत्सव’ में नाटक ‘पुनर्जन्म’ का मंचन किया. दर्शकों ने इसकी काफी सराहना की. इसके बाद नाटक के निर्देशन का सिलसिला चल पड़ा. वर्ष 2008 में रांची के अपर बाजार में मेघदूत नामक प्रेक्षागृह का निर्माण कराया. रंगकर्मियों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने की वजह से कुछ ही वर्षों में इसे बंद करना पड़ा.
Also Read: मिलिए, झारखंड फिल्म एंड थियेटर एकेडमी के संस्थापक राजीव सिन्हा से, ऐसे लगी रंगमंच की लत
वर्ष 2014 में विश्व रंगमंच दिवस (27 मार्च) पर ऋषिकेश लाल ने ‘छोटानागपुर नाट्य माहोत्सव’ की शुरुआत की. यह आयोजन आज भी जारी है. वर्ष 2015 में 27 मार्च को कांति कृष्ण कला भवन के नाम से एक प्रेक्षाग्रह रांची को मिला. इसकी स्थापना ऋषिकेश लाल ने ही की. इस प्रेक्षागृह में सल भर देश के अलग-अलग राज्यों के नटककारों ने लगातार 52 सप्ताह तक (हर रविवार) नाटकों का मंचन किया.
ऋषिकेश लाल ने करीब 40 नाटकों का निर्देशन किया है. पूरे भारत में आयोजित होने वाले कई नाट्य प्रतियोगिताओं में श्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार भी जीत चुके हैं. इनके नाटकों को भी कई श्रेणियों में पुरस्कृत किया जा चुका है. ऋषिकेश कहते हैं कि दुनिया एक रंगमंच है और हम सभी इसके पात्र हैं. मुझे मेरी भूमिका मिल चुकी है और मैं अपने सभी गुरुजनों और शुभचिंतकों के सहयोग से इसे बखूबी निभाने की कोशिश कर रहा हूं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




