गुस्सा छोड़िये कूल बनिये, एंगर मैनेजमेंट से बदल सकती है जिंदगी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 20 Aug 2023 10:19 AM
हमारे बच्चों में भी गुस्से की प्रवृत्ति घर से ही आती है. गुस्सा तनाव को बुलावा देता है. ऐसे में इसे दूर करने के लिए गुस्से के कारणों को जानना होगा. एंगर मैनेजमेंट यानी कि क्रोध प्रबंधन की बारीकियों को समझना होगा.
रांची, लता रानी : आज की तनाव भरी जिंदगी में गुस्सा हमारी जिंदगी में अनायास ही शामिल हो गया है. ऐसा कहा जाता है कि क्रोध और आंधी, दोनों एक समान हैं. शांत होने के बाद ही पता चलता है कि नुकसान कितना हुआ है. आज के दौर में लोग छोटी-छोटी बातों पर क्रोधित होकर अपना आपा खो दे रहे हैं. गुस्से के कारण ही घरेलू हिंसा, पारिवारिक झगड़े और रिश्तों में दरार आने की घटनाएं बढ़ चली हैं. हमारे बच्चों में भी गुस्से की प्रवृत्ति घर से ही आती है. गुस्सा तनाव को बुलावा देता है. ऐसे में इसे दूर करने के लिए गुस्से के कारणों को जानना होगा. एंगर मैनेजमेंट यानी कि क्रोध प्रबंधन की बारीकियों को समझना होगा.
80 प्रतिशत भारतीय गुस्से में
शोध के अनुसार, लगभग पांच में से एक व्यक्ति को क्रोध की समस्या का अनुभव हुआ है. उसे अपने क्रोध को नियंत्रण करने में कठिनाई होती है. यह आंकड़ा हमारे समाज में क्रोध के मुद्दों की व्यापकता बयां करता है. वहीं एनआइएमएचएएनएस बेंगलुरु की स्टडी के अनुसार 80 प्रतिशत भारतीय गुस्से में हैं. दूसरी ओर ऐसे कई आयाम हैं, जिनसे हम अपने गुस्से पर काबू पा सकते हैं. इसके लिए हम प्राणिक हिलिंग, अध्यात्म और मोटिवशेनल गुरुओं से सलाह ले सकते हैं. साथ ही अपने मनोवैज्ञानिक से संपर्क कर सकते हैं.
एंगर मैनेजमेंट से भाव को करें नियंत्रित
मनोवैज्ञानिक डॉ अनुराधा वत्स ने बताया कि एंगर मैनेजमेंट यानी क्रोध प्रबंधन एक प्रकार का परामर्श है, जिससे आप अपने स्वास्थ्य, कार्य, व्यवहार या व्यक्तिगत संबंधों को प्रभावित करनेवाली नाराजगी के भाव को नियंत्रित कर सकते हैं. एंगर मैनेजमेंट एक थेरेपी है, जिसमें गुस्से को कैसे नियंत्रित करना है, कितनी प्रतिक्रिया देनी है, इसके बारे में बताया जाता है. सेल्फ एजुकेशन और सेल्फ अवेयरनेस से ही हम अपने गुस्से पर कंट्रोल कर सकते हैं.
इन कारणों से आ सकता है क्रोध
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किसी ऐसे व्यक्ति को खो देना, जिसे आप चाहते हों
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थका होना, भूख लगना या दर्द होना, कुछ दवाओं के प्रभाव से
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खतरे में महसूस करना
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यह महसूस करना कि आपको अनदेखा किया जा रहा है या गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है
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शराब या ड्रग्स के प्रभाव में होना
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वर्तमान में कुछ आपको अप्रिय यादों की याद दिलाता हो
क्रोध नियंत्रण के लिए इन उपायों को आजमायें
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आपके अंदर क्रोध आ रहा हो, तो कमरे से उठ कर चले जायें.
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किसी से बहस नहीं करें.
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डीप ब्रीदिंग करें. आप 20 की गिनती तक नाक से सांस लें. 20 की गिनती तक सांस को रोक कर रखें. फिर 20 की गिनती तक मुंह से सांस छोड़ें. सांस को लेते और छोड़ते रहने से मन शांत हो जाता है.
क्रोध के शारीरिक लक्षण
हर किसी में क्रोध की शारीरिक प्रतिक्रिया होती है. शरीर कोर्टिसोल और एड्रेनालाइन जैसा तनाव हार्मोन रिलीज़ करता है, जो हृदय की गति, रक्तचाप, तापमान और श्वास प्रतिक्रिया को बढ़ाते हैं. यह खतरे पर ध्यान केंद्रित करने और जल्दी से प्रतिक्रिया करने की अनुमति देता है.
क्रोध का स्वास्थ्य पर प्रभाव
गुस्से से उच्च रक्तचाप, सिरदर्द, पीठ दर्द, अनिद्रा, त्वचा की स्थिति जैसे एक्जिमा, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसे पाचन विकार, अवसाद, चिंता, ह्रदयाघात और स्ट्रोक आदि का खतरा रहता है.
क्रोध का कारण अज्ञान
स्वामी परिपूर्णानंद, आचार्य, प्रभारी राम कृष्ण मिशन रांची कहते हैं कि क्रोध का कारण अज्ञान है. अज्ञानी को हीं क्रोध आता है. व्यक्ति, वस्तु एवं परिस्थिति, ये तीनों क्रोध का कारण बनते हैं. आनंद अथवा चाह के बीच जो बाधा आती है, उसके कारण ही क्रोध आता है. हमें खुद क्रोध को नियंत्रित करना आना होगा.
यहां लें एंगर मैनेजमेंट का मुफ्त परामर्श
हर बुधवार को सिंधी मार्ग पीपी कंपाउंड स्थित आयोमा केंद्र में नि:शुल्क प्राणिक हीलिंग कैंप का आयोजन किया जाता है. जिसमें इसका लोग नि:शुल्क लाभ उठा सकते हैं. कैंप में लोगों को ध्यान तकनीक सिखायी जाती है और नि:शुल्क हीलिंग दी जाती है. आप अपने एंगर मैनजमेंट के जरिये अपने क्रोध पर नियंत्रण पाना सीख सकते हैं.
क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु
योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया के मुख्य सचिव स्वामी ईवरानंद गिरि कहते हैं कि क्रोध पर नियंत्रण पाना अत्यंत आवश्यक है. क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है. क्रोध में नियंत्रण नहीं रखने से लोग अनर्थ कर बैठते हैं.क्रोध में आनंद सुख, शांति की स्थिति का विनाश हो जाता है. क्रोध आने पर सबसे पहले तो स्वयं विश्लेषण करना चाहिए. अपना विवेक बनाये रखें, जिससे आप अपने क्रोध पर नियंत्रण पा सकते हैं.
प्राणिक हीलिंग से दूर होती है क्रोध की भावना
प्राणिक हीलर संगीता चितलांगिया कहती हैं कि प्राणिक हीलिंग ग्रैंड मास्टर चोआकाक सूई जी द्वारा बतायी गयी प्राणशक्ति के माध्यम से उपचार करने की प्रभावशाली आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति है. इसमें बिना स्पर्श के हीलिंग से उपचार किया जाता है. क्रोध, चिंता, तनाव व अवसाद तथा ऐसे भावनात्मक रोगों के इलाज में प्राणिक हीलिंग बहुत ही असरदार है.
योग और प्राणायाम का पड़ता है प्रभाव
योग एक्सपर्ट अविनाश पटेल कहते हैं कि गुस्से को कंट्रोल करने के लिए योग और प्राणायाम काफी कारगर हैं. जिसमें योग एक्सपर्ट एंगर मैनेजमेंट के तहत तनाव को दूर करने के लिए ब्रिदिंग करने पर जोर देते हैं. टेक्निक के माध्यम से गुस्से पर काबू करना सिखाया जाता है. रेगुलर प्रैक्टिस और योग निद्रा से जरिये गुस्सा को दूर किया जा सकता है. एंगर मैनजमेंट में उत्तानाशन, शशांकासन, विपरीत करणी, नौकासन, शवासन, मत्स्यासन एवं शीतली , शीतकारी जैसे प्राणायाम कारगर हैं.
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