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झारखंड में घने जंगल घटे, वन क्षेत्र में झाड़ियां भी हुईं कम, जानिए किस जिले में सबके कम है वनभूमि

Updated at : 15 Jan 2022 7:11 AM (IST)
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झारखंड में घने जंगल घटे, वन क्षेत्र में झाड़ियां भी हुईं कम, जानिए किस जिले में सबके कम है वनभूमि

Jharkhand News: फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में झारखंड में 110 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र बढ़ गया है. देश के कुल पांच राज्यों में ही वन क्षेत्र बढ़ा है. इसमें झारखंड भी शामिल है. वन क्षेत्र तो बढ़ा है, लेकिन राज्य में घना जंगल घट गया है.

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मनोज सिंह, रांची: फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में झारखंड में 110 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र बढ़ गया है. देश के कुल पांच राज्यों में ही वन क्षेत्र बढ़ा है. इसमें झारखंड भी शामिल है. वन क्षेत्र तो बढ़ा है, लेकिन राज्य में घना जंगल घट गया है. 2019 के सर्वे में झारखंड में घना वन क्षेत्र 2603.2 वर्ग किमी था. यह 2021 के सर्वे में 2601.05 वर्ग किमी हो गया है. करीब दो वर्ग किमी की कमी आयी है. पूरे राज्य में सबसे अधिक वन क्षेत्र गढ़वा में बढ़ा है. वहीं पाकुड़, लोहरदगा, लातेहार और कोडरमा में वन क्षेत्र घटा है. 2021 के सर्वे के अनुसार झारखंड के क्षेत्रफल के 29.76% में जंगल है. 2019 में यह 29.62% था.

घट गयीं झाड़ियां

वन विभाग के दायरे में झाड़ियां भी आती हैं, जो वन भूमि में होती हैं. 2021 में कुल 584.20 वर्ग किलोमीटर झाड़ी चिह्नित की गयी है. 2019 में यह करीब 688 वर्ग किलोमीटर में था. इसी तरह 2021 में मॉडरेट वन क्षेत्र 9688.91 वर्ग किलोमीटर पाया गया है. 2019 में यह 9687.37 वर्ग किलोमीटर था. इसी तरह 2021 में करीब 11431.18 वर्ग किलोमीटर ओपेन फॉरेस्ट पाया गया है. 2019 में 11320.85 वर्ग किलोमीटर था.

सर्वे रिपोर्ट

हालांकि मध्यम दर्जे का जंगल बढ़ने से कुल वन क्षेत्र 110 किमी बढ़ा, देश के कुल पांच राज्यों में ही वन क्षेत्र बढ़ा

गढ़वा में सबसे अधिक वन क्षेत्र बढ़ा, तो पाकुड़, लोहरदगा, कोडरमा व लातेहार में घटा

वर्ष 2019 में झारखंड में घना वन क्षेत्र 2603.2 वर्ग किमी था, 2021 के सर्वे में 2601.05 वर्ग किमी हो गया

तीन तरह से चिह्नित होता है वन क्षेत्र

फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया वन भूमि को तीन रूप में चिह्नित करता है. घना वन क्षेत्र (वीडीएफ), मॉडरेट वन क्षेत्र (एमडीएफ) और ओपेन फॉरेस्ट (ओएफ). घना वन क्षेत्र में 70 फीसदी या उससे अधिक एरिया में धूप नहीं दिखती है. एमडीएफ वन क्षेत्र में 40 से 70 फीसदी वन भूमि पर धूप की रोशनी नहीं आती है. ओपेन फॉरेस्ट वैसे जंगल को कहा जाता है, जहां 10 से 40 फीसदी धूप की रोशनी वन भूमि पर पड़े.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

अभी जंगल की जो सर्वे रिपोर्ट आयी है, वह 2017 से 2019 के बीच की है. घने जंगल के घटने के कारणों को जानने की कोशिश करती चाहिए कि घना जंगल कैसे घट रहा है. कोशिश करनी चाहिए कि घना जंगल बढ़े. जब एमडीएफ और वीसीएफ में पौधरोपण होगा, तो घना जंगल बढ़ेगा.

लाल रत्नाकर सिंह, पूर्व पीसीसीएफ, वन विभाग

किस जिले में कितनी वनभूमि (वन भूमि : वर्ग किलोमीटर में )

जिला 2021 2019

बोकारो 576 573.55

चतरा 1782.09 1777.35

देवघर 205.80 203.71

धनबाद 218.18 213.51

दुमका 577.63 577.31

पूर्वी सिंहभूम 1080.69 1079.38

गढ़वा 1431.72 1391.59

गिरिडीह 905.91 901.24

गोड्डा 423.35 423.35

गुमला 1443.15 1442.26

हजारीबाग 1363.19 1352.77

जामताड़ा 106.02 100.64

जिला 2021 2019

खूंटी 913.74 905.49

कोडरमा 1023.05 1023.47

लातेहार 2403.04 2406.34

लोहरदगा 504.42 504.62

पाकुड़ 287.00 287.13

पलामू 1215.73 1200.78

रामगढ़ 331.26 329.00

रांची 1168.78 1164.49

साहेबगंज 573.95 572.35

सरायकेला-खरसांवा 574.60 574.04

सिमडेगा 1243.40 1240.92

प सिंहभूम 3368.44 3366.12

Posted by: Pritish Sahay

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यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

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