सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर रोक बरकरार, 9 शिक्षकों की नियुक्ति मामले में भी हुई सुनवाई
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 13 Oct 2023 10:50 AM
आचार संहिता उल्लंघन मामले में झारखंड हाइकोर्ट ने गोड्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर रोक जारी रखी है. अदालत ने राज्य सरकार को शपथ पत्र दायर करने के लिए समय दिया है. देवघर में 300 विद्यार्थी वाले माध्यमिक विद्यालय में 9 शिक्षकों की नियुक्ति मामले में भी हाईकोर्ट में सुनवाई हुई.
झारखंड हाइकोर्ट ने मधुपुर उप चुनाव-2021 में आचार संहिता उल्लंघन मामले में आरोपी गोड्डा के सांसद डॉ निशिकांत दुबे के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर रोक बरकरार रखा. गुरुवार को जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने उनकी ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई के दाैरान राज्य सरकार की ओर से कुछ अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए समय देने का आग्रह किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया. राज्य सरकार को शपथ पत्र दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय प्रदान किया. साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तक सभी चार मामलों में प्रार्थी के खिलाफ पीड़क कार्रवाई करने पर रोक जारी रखा. मामले की सुनवाई अब तीन सप्ताह के बाद होगी. इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रशांत पल्लव व अधिवक्ता पार्थ जालान ने पैरवी की.
क्या है पूरा मामला
बता दें कि प्रार्थी निशिकांत दुबे ने क्रिमिनल क्वैशिंग याचिका दायर कर उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करने की मांग की है. वर्ष-2021 में मधुपुर उप चुनाव के दौरान सांसद निशिकांत दुबे पर गलत ट्वीट करने और बयानबाजी को लेकर आचार संहिता उल्लंघन के आरोप में मधुपुर अनुमंडल के अलग-अलग थानों में पांच प्राथमिकी दर्ज की गयी थी.
देवघर में 300 विद्यार्थी वाले माध्यमिक विद्यालय में नौ शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में मांगा जवाब
झारखंड हाइकोर्ट ने शिक्षा के अधिकार (आरटीइ) के तहत 300 विद्यार्थी वाले माध्यमिक विद्यालय में नाै शिक्षकों की पदस्थापना को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की. चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्र व जस्टिस आनंद सेन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दाैरान प्रार्थी का पक्ष सुनने के बाद राज्य सरकार को जवाब दायर करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि इस सरकारी स्कूल में जो दो शिक्षक हैं, उसमें से एक शिक्षक के स्थानांतरण की बात है. क्या वह सरप्लस शिक्षक की श्रेणी में आते हैं.
मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने एक नवंबर की तिथि निर्धारित की. इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रशांत पल्लव व अधिवक्ता शिवानी जालूका ने पक्ष रखा. उन्होंने बताया कि आरटीइ अधिनियम के तहत सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों व शिक्षकों का अनुपात निर्धारित किया गया है. 35 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक का होना अनिवार्य है, लेकिन माध्यमिक विद्यालय मेदिनीडीह, देवघर में इसका पालन नहीं किया जा रहा है. अधिवक्ताओं ने स्कूल में 300 विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए नाै शिक्षकों की पदस्थापना सुनिश्चित करने के लिए आदेश देने का आग्रह किया. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी सोनी कुमारी ने जनहित याचिका दायर की है.
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