गणगौर सिंधारा उत्सव को लेकर रांची के बाजार में बढ़ी रौनक, नवविवाहिताओं में पूजा को लेकर दिख रहा है खासा उत्साह

Gangaur Sindhara Festival: गणगौर सिंधारा उत्सव शुरू हो गया है. इस पर्व को लेकर मारवाड़ी समाज के लोगों में खास उत्साह रहता है. सिंधारा के तहत बहू-बेटियों का लाड-प्यार शुरू हो जाता है. उनके हाथों में मेहंदी रचा कर उन्हें उपहार दिये जाते हैं.
रांची, लता रानी : शीतला अष्टमी के साथ ही मारवाड़ी समाज का गणगौर सिंधारा उत्सव शुरू हो गया है. इसको लेकर नवविवाहिताओं में उत्साह है. चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन शीतला अष्टमी यानी माता शीतला की पूजा के बाद बहू-बेटियों का सिंधारा किया जाता है. अब सुबह-शाम भगवान ईसर और गौरा यानी शंकर और पार्वती की पूजा की जायेगी. इससे पूर्व केवल सुबह में ही कुंडो की पूजा हाे रही थी.
इस पर्व को लेकर मारवाड़ी समाज के लोगों में खास उत्साह रहता है. सिंधारा के तहत बहू-बेटियों का लाड-प्यार शुरू हो जाता है. उनके हाथों में मेहंदी रचा कर उन्हें उपहार दिये जाते हैं. सास अपनी बहू के हाथों में मेहंदी रचाती है. घरों में गणगौर के गीत बजाये जाते हैं. 16 दिवसीय गणगौर महोत्सव में भगवान शिव और-पार्वती की पूजा होती है. यह होली के दूसरे दिन से शुरू होकर चैती नवरात्र के तृतीया के दिन संपन्न होती है.
गणगौर पर्व को लेकर बाजार में रौनक बढ़ गयी है. महिलाएं मिट्टी और लकड़ी के गणगौर की खरीदारी कर रही हैं. पूजा के बाद इसे विसर्जन किया जायेगा. कई महिलाएं लकड़ी के गणगौर को अपने घरों में रख लेती हैं. बाजार में मिट्टी के गणगौर (वस्त्र धरण किये शंकर-पार्वती की मूर्ति) 200 से लेकर 2000 रुपये तक में मिल रहे हैं. वहीं, लकड़ी के गणगौर 1000 से 2000 रुपये में मिल रहे हैं. कई महिलाओं ने पर्व को लेकर राजस्थान से गणगौर की प्रतिमा ऑनलाइन मंगवाया है.
गणगौर पर्व को लेकर महिलाएं राजस्थानी लहरिया चूड़ी व साड़ी की खरीदारी कर रही हैं. वहीं, बाजार भी इस पर्व को लेकर पूरी तरह से तैयार है. बाजार में हमेशा की तरह लहरिया व बंधेज साड़ियों की पेशकश की गयी है. साथ हीं ट्रेंड में चल रहे जामनगर के घाटचाेला की भी खूब बिक्री हो रही है. वहीं, औरगंजा और मारबल डाई भी खास इस पर्व के लिए मंगवाया गया है. इसके अलावा गोटा वर्क की साड़ियां भी महिलाएं खूब पसंद कर रही हैं. बालाजी साड़ी के संचालक सुनील बजाज ने बताया कि गणगौर पर्व को लेकर खास कर नयी नवेली दुल्हनें गुलाबी, लाल और मैरून रंग की साड़ियां ले रही हैं. हमेशा की तरह इस बार भी लहरिया और बंधेज साड़ी की ज्यादा डिमांड है.
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लहरिया व बंधेज 4000-10000
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गोटा वर्क 2000-5000
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घाटचोला 3000-8000
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औरगंजा 2000-8000
इस पर्व में महिलाएं शिव-पार्वती की डिजाइन वाली मेहंदी लगाना पसंद करती हैं. इसको लेकर कई महिलाओं ने पहले ही बुकिंग कर ली है. मेहंदी डिजाइनर जितेंद्र सिंह ने बताया कि कि गणगौर उत्सव हमारे राजस्थान में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. उसी तर्ज पर रांची की महिलाएं भी तैयारी कराती हैं. महिलाओं ने 1000 से शुरू शिव-पार्वती डिजाइन वाली मेहंदी की बुकिंग करायी है. गणगौर में महिलाएं 200 से लेकर 5000 रुपये तक की मेहंदी लगवाती हैं.
लक्ष्मी नारायण मंदिर में 24 मार्च को सामूहिक गणगौर उत्सव मनाया जायेगा. यहां महिलाएं सुबह छह बजे से ईसर और गौरा की पूजा करेंगी. मालूम हो कि 1981 से लक्ष्मी नारायण मंदिर में गणगौर महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. यहां शहर के समस्त मारवाड़ी समाज की महिलाएं पूजा के लिए जुटती हैं. वहीं, इस वर्ष चार साल बाद माहेश्वरी महिला समिति की ओर से लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में गणगौर मेला का आयोजन किया जायेगा. यहां खाने-पीने एवं फन गेम के स्टॉल लगाये जायेंगे. मेला दिन भर चलेगा.
मैं पहली गणगौर पूजा को लेकर बहुत उत्साहित हूं. मेरा सिंधारा किया जा रहा है. बहुत अच्छा लग रहा है. मां व सास का लाड-प्यार मिलता है. तरह-तरह के उपहार भी मिलते हैं.
–डोली सर्वेश बागला, अपर बाजार
पहला सिंधारा को लेकर बहुत अच्छा लग रहा है. घर पर गणगौर के गीत सुनना अच्छा लगता है. 24 मार्च को लक्ष्मी नारायण मंदिर में सामूहिक रूप पूजा करने का अवसर मिलेगा.
–दीपिका हिमांशु चितलांगिया, अपर बाजार
मेरी शादी पिछले माह फरवरी में हुई है. यह मेरा पहला गणगौर है. इसलिए पूजा को लेकर बहुत उत्साहित हूं. पूरे विधि-विधान से प्रतिदिन पूजा कर रही हूं. पर्व के लिए बहुत सारी खरीदारी भी की है.
–श्वेता अनीश बथवाल, कांके राेड
यह मेरी पहली गणगौर पूजा है. इसलिए बहुत खुशी हो रही है. हर दिन ईसर व गौरा की पूजा करना अच्छा लग रहा है. विसर्जन के दिन हम महिलाएं एकजुट होते हैं.
–ऐश्वर्या रौनक बगड़िया, रातू रोड
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By Prabhat Khabar News Desk
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