कंटेनमेंट जोन से मुक्ति तभी, जब 28 दिनों तक नहीं मिलेगा एक भी केस

Updated at : 19 Jul 2020 4:35 AM (IST)
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कंटेनमेंट जोन से मुक्ति तभी, जब 28 दिनों तक नहीं मिलेगा एक भी केस

किसी कंटेनमेंट जोन में यदि 28 दिनों तक कोई कोरोना पॉजिटिव केस नहीं मिलता है, तभी उसे कंटेनमेंट जोन से मुक्त किया जायेगा. कंटेनमेंट जोन के संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने नया प्रोटोकॉल बनाया है, जिसे विभागीय सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी ने सभी उपायुक्तों को भेजा है. नये प्रोटोकॉल के अनुसार किसी क्षेत्र में कोई नया केस मिलते ही तत्काल उसे कंटेनमेंट जोन घोषित किया जाना है.

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स्वास्थ्य सचिव ने उपायुक्तों को भेजा कंटेनमेंट जोन का नया प्रोटोकॉल

रांची : किसी कंटेनमेंट जोन में यदि 28 दिनों तक कोई कोरोना पॉजिटिव केस नहीं मिलता है, तभी उसे कंटेनमेंट जोन से मुक्त किया जायेगा. कंटेनमेंट जोन के संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने नया प्रोटोकॉल बनाया है, जिसे विभागीय सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी ने सभी उपायुक्तों को भेजा है. नये प्रोटोकॉल के अनुसार किसी क्षेत्र में कोई नया केस मिलते ही तत्काल उसे कंटेनमेंट जोन घोषित किया जाना है.

पॉजिटिव केस का इलाज सांस्थिक या अस्पताल में क्लीनिकल मैनजेमेंट प्रोटोकॉल के तहत किया जाना है. केस के हाइ रिस्क और लो रिस्क कांटैक्ट की तलाश करनी है. कंटेनमेंट जोन का निर्धारण भौगोलिक या भौतिक बाउंड्री के तहत किया जायेगा. इसमें केस की मैंपिग और संपर्क देखा जाना है. केस के संपर्क के भौगोलिक फैलाव को देखना है. केस के हिसाब से माइक्रो कंटेनमेंट का प्लान भी किया जा सकता है. इसमें किसी अपार्टमेंट या फ्लैट, अलग मकान, छोटी बसावट या कॉलोनी, गली या स्थानीय स्थिति को देखकर इसका निर्धारण किया जा सकता है.

कंटेनमेंट जोन में किसी के आने-जाने की अनुमति नहीं : कंटेनमेंट जोन के प्रवेश व बाहर निकलने के रास्ते में बैरेकेडिंग की जानी है. किसी को भी इस क्षेत्र में अाने-जाने की इजाजत नहीं होगी. केवल मेडिकल टीम को ही प्रवेश की अनुमति दी जायेगी. कंटनमेंट जोन के तमाम लोगों की जांच करनी है. यदि किसी घर को कंटनमेंट जोन बनाया जाता है, तो परिवार के सभी सदस्यों को भी घर में ही बंद रहना होगा. कंटनमेंट जोन में आदेश की एक कॉफी भी लगायी जाये. सचिव ने लिखा है कि कंटेनमेंट जोन में इस दौरान सभी घरों की जांच की जाये. विशेष टीम गहन कांटैक्ट ट्रैसिंग करेगी. सिम्पटोमैटिक हाइ रिस्क कांटैक्ट की सैंपलिंग की जाये तथा लो रिस्क कांटैक्ट पर निगरानी रखी जाये और जांच की जाये. पॉजिटिव लोगों के घरों में पोस्टर या स्टीकर लगाया जाना चाहिए.

राज्य में बढ़ते गये संक्रमित घटती गयी रिकवरी दर

रांची. राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इससे मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने में परेशानी हो रही है. संक्रमितों में वृद्धि के साथ रिकवरी रेट कम होता जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े के अनुुसार, रिकवरी रेट में करीब नौ फीसदी की कमी आयी है. 13 जुलाई को कोरोना संक्रमितों का रिकवरी रेट 59.32% था, वहीं 17 जुलाई को यह घटकर 50.56% हो गया है. हालांकि आठ (69.24 %) और नौ जुलाई को (67.64 %) रिकवरी रेट बेहतर था. पड़ोसी राज्यों की तुलना मेें झारखंड मेें रिकवरी रेट कम है. बिहार में रिकवरी रेेट 60 फीसदी और बंगाल में 58 फीसदी है.

तिथि संक्रमित मिले रिकवरी रेट

  • 13 जुलाई 189 59.32

  • 14 जुलाई 244 57.44

  • 15 जुलाई 314 54.47

  • 16 जुलाई 203 52.54

  • 17 जुलाई 287 50.56

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