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झारखंड : जुलाई में कोरोना संक्रमित 95 लोगों की हुई मौत, 8876 कोरोना पॉजिटिव केस मिले

Updated at : 02 Aug 2020 3:41 PM (IST)
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झारखंड : जुलाई में कोरोना संक्रमित 95 लोगों की हुई मौत, 8876 कोरोना पॉजिटिव केस मिले

रांची : झारखंड में जुलाई के महीने में कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलने की रफ्तार चरम पर थी. आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि इस एक महीने में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संक्रमण ने 95 लोगों की जान ले ली. 8,876 लोग इस संक्रमण की चपेट में आये. 2,459 लोगों ने कोविड19 को मात दी, लेकिन इसी दौरान इस बीमारी से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या इससे ढाई गुणा ज्यादा हो गयी. साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना से लड़ने में काफी आगे दिखने वाला झारखंड हर पैमाने पर नीचे खिसकता चला गया. आज मृत्यु दर को कर हर पैमाने पर यह राष्ट्रीय स्तर से नीचे है.

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रांची : झारखंड में जुलाई के महीने में कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलने की रफ्तार चरम पर थी. आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि इस एक महीने में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संक्रमण ने 95 लोगों की जान ले ली. 8,876 लोग इस संक्रमण की चपेट में आये. 2,459 लोगों ने कोविड19 को मात दी, लेकिन इसी दौरान इस बीमारी से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या इससे ढाई गुणा ज्यादा हो गयी. साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना से लड़ने में काफी आगे दिखने वाला झारखंड हर पैमाने पर नीचे खिसकता चला गया. आज मृत्यु दर को कर हर पैमाने पर यह राष्ट्रीय स्तर से नीचे है.

मार्च की आखिरी तारीख से जून महीने की आखिरी तारीख तक प्रदेश में कोरोना वायरस से संक्रमण के कुल 2,490 मामले सामने आये थे. इस दिन मात्र 591 एक्टिव केस राज्य में थे. इस बीमारी को मात देने वालों की संख्या एक्टिव मरीजों की तुलना में तीन गुणा थी. उस वक्त झारखंड में कोरोना के संक्रमण के बढ़ने की रफ्तार 1.78 फीसदी थी. कोरोना के मरीजों की संख्या के दोगुना होने में 39.33 दिन लगते थे. वहीं रिकवरी रेट 75.66 फीसदी था. कोरोना से मरने वालों की दर की बात करें, तो यह मात्र 0.60 फीसदी था.

जुलाई के महीने में कोरोना वायरस से होने वाले संक्रमण में तेजी आयी और फिर इस पर ब्रेक लग ही नहीं पाया. आज (शनिवार, 1 अगस्त, 2020 की रिपोर्ट) इस बीमारी के संक्रमण के साथ मरने वाले लोगों की संख्या 115 पहुंच गयी है. कोविड19 के कुल 12,188 पॉजिटिव केस हो गये हैं. एक्टिव केस की संख्या बढ़कर 7,560 हो गयी है. यदि यही रफ्तार रही, तो दो-तीन दिन में ही ठीक होने वालों की संख्या नये मरीजों की आधी रह जायेगी.

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यहां बताना प्रासंगिक होगा कि जुलाई की शुरुआत में झारखंड में कोरोना के संक्रमण के बढ़ने की रफ्तार 1.78 फीसदी थी, जो अब बढ़कर 5.29 फीसदी हो चुकी है. उस वक्त मरीजों के दोगुना होने में 39 दिन से अधिक लगते थे, अब 14 दिन से भी कम (13.45 दिन) वक्त लग रहा है. रिकवरी रेट घटकर करीब आधी रह गयी है. एक जुलाई, 2020 तक इस बीमारी से 75.66 फीसदी मरीज ठीक हो रहे थे, अब यह दर घटकर 38.12 फीसदी रह गयी है. मृत्यु दर उस वक्त 0.60 फीसदी थी, आज 0.93 फीसदी है.

राज्य में कोरोना वायरस के संक्रमित लोगों की मौत के आंकड़े में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुई है. 30 जून तक मरने वालों की संख्या मात्र 15 थी, जो 31 जुलाई को बढ़कर 110 हो गयी. यानी एक महीने के भीतर 95 लोगों की मौत हो गयी. इनमें से 57 लोगों की मौत आखिरी 15 दिनों में यानी 16 जुलाई से 31 जुलाई के बीच हुई है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड सरकार की रिपोर्ट बताती है कि 15 जुलाई तक मात्र 38 लोगों की मौत हुई थी. लेकिन, 31 जुलाई को यह आंकड़ा 110 पहुंच गया. एक अगस्त की रात तक के आंकड़ों में मरने वालों की संख्या 115 हो चुकी है.

इस दौरान सरकार ने कोरोना की जांच की रफ्तार भी बढ़ायी है. 31 मार्च से 30 जून तक कुल 1,42,641 लोगों के सैंपल की जांच हुई थी, जो 31 जुलाई तक बढ़कर 2,94,869 हो गयी. यानी इस एक महीने के दौरान 1,52,228 सैंपल की जांच हुई. हालांकि, जिस रफ्तार से संक्रमण फैल रहा है, जांच की रफ्तार में उतनी तेजी नहीं आयी है. बावजूद इसके तीन महीने के दौरान हुई जांच से ज्यादा सैंपल की जांच एक महीने में हुई. स्वास्थ्य विभाग इसे और बढ़ाने पर विचार कर रहा है.

जांच रिपोर्ट में देरी भी एक परेशानी है. राज्य में बहुत से लोग ऐसे हैं, जिन्होंने सैंपल लिये और उनकी रिपोर्ट ही नहीं आयी. रांची के सदर अस्पताल में इसकी वजह से एक दिन जमकर हंगामा भी हुआ. उनका आरोप था कि जब भी रिपोर्ट लेने आते हैं, अगले दिन आने के लिए कहा जाता है. अगले दिन भी रिपोर्ट नहीं मिलती. सरकारी आंकड़े भी बताते हैं कि काफी संख्या में जांच रिपोर्ट पेंडिंग है. 30 जून तक 1,44,132 लोगों के सैंपल लिये गये थे, जिसमें 1,42,641 की ही जांच पूरी हो पायी थी.

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इसका अर्थ यह है कि 1,491 लोगों के सैंपल की जांच होनी बाकी थी. बात 31 जुलाई की स्थिति की करें, तो कुल 3,07,068 लोगों के सैंपल कलेक्ट किये गये. इनमें से 2,94,869 लोगों की ही रिपोर्ट आयी. यानी 12,199 लोग अब भी अपनी कोरोना जांच की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं. जांच कराने वाले लोग इसे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के रूप में देख रहे हैं, तो सरकारी महकमा संसाधन की कमी बताकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहा है.

Posted By : Mithilesh Jha

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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