बह गये 8 करोड़ की राशि, रांची के बामलाडीह पुल की रिपेयरिंग की संभावना कम, कई गांवों का टूटा संपर्क

Updated at : 09 Aug 2021 5:07 PM (IST)
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बह गये 8 करोड़ की राशि, रांची के बामलाडीह पुल की रिपेयरिंग की संभावना कम, कई गांवों का टूटा संपर्क

रांची के कांची नदी पर बने बामलाडीह पुल का जीर्णोद्धार होने की संभावना नहीं है. इसकी जगह नये पुल बनाने की बात कही जा रही है. इससे 8 करोड़ की राशि यूं ही बर्बाद हो जायेंगे.

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Jharkhand News (रांची) : झारखंड की राजधानी रांची के तमाड़ स्थित कांची नदी के बामलाडीह घाट पर बने पुल बारिश में क्षतिग्रस्त हो गया. इस पुल के रिपेयरिंग की संभावना कम हो गयी है. इसकी जगह नया पुल बनाने की बात कही जा रही है. रिपेयरिंग नहीं होने से अब 8 करोड़ की राशि यूं ही बर्बाद होने की संभावना प्रबल हो गयी है.

बता दें कि रविवार को बामलाडीह पुल का दो स्लैब पानी की तेज रफ्तार में बह गया. इससे पहले एक अगस्त, 2021 को एक स्लैब भी बह गया था. इस तरह से यह पुल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया. इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से तमाड़ और सोनाहातू प्रखंड के कई गांवों के बीच संपर्क टूट गया है.

रविवार को क्षतिग्रस्त पुल के स्लैब गिरने की जानकारी मिलने पर ग्रामीण विकास विभाग (विशेष प्रमंडल) के इंजीनियर मौके पर पहुंचे. लेकिन, क्षतिग्रस्त पुल की स्थिति को देखने के बाद विभाग अब रिपेयरिंग को लेकर अधिक आश्वस्त नहीं दिख रहे हैं. इसकी जगह नया पुल बनाने की बात कह रहे हैं.

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मालूम हो कि सोनाहातू से तमाड़ के बीच कांची नदी पर बामलाडीह घाट पर पुल की शुरुआत वर्ष 2011-12 में हुआ था. वर्ष 2014 से इस पुल पर आवागमन शुरू हो गया था, लेकिन 27 जुलाई, 2017 को पुल के बीच का एक स्लैब दब गया. हालांकि, विभाग की ओर से वर्ष 2018 तक पुल को दुरुस्त कर लिया गया था.

17 स्पैन वाले इस पुल में अब तक 3 स्लैब गिर चुके हैं. वहीं, एक स्लैब टेढ़ा होकर गिरने की स्थिति में आ गया था. रहा-सहा कसर रविवार की बारिश ने पूरा कर दिया. करीब तीन स्लैब के गिरने और कुछ के क्षतिग्रस्त होने के बाद ही अब रिपेयरिंग को लेकर हाथ खड़े कर दिये गये हैं.

इधर, ग्रामीणों का कहना है करीब 7 साल में ही पुल के स्लैब के गिरने का मुख्य कारण अवैध रूप से लगातार बालू का उठाव होना है. बालू माफिया ने कांची नदी की बालू को काफी मात्रा में उठाव किया. इसका ही परिणाम रहा कि पुल क्षतिग्रस्त हो गया. बालू माफिया पर अंकुश लगाने के लिए ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से गुहार लगायी, लेकिन किसी का इस ओर ध्यान नहीं गया और आज इसका खामियाजा इस क्षेत्र के ग्रामीण उठाने को मजबूर हो रहे हैं.

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Posted By : Samir Ranjan.

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