ब्रेस्टफीडिंग महिलाओं में स्तन कैंसर के खतरे को करता है कम, टाइप-2 डायबिटीज की आशंका भी होती है कम
मां और बच्चे का भावनात्मक संबंध
World Breastfeeding Week : ब्रेस्टफीडिंग संभवत: दुनिया के सबसे प्यारे रिश्ते को मजबूती देता है, उसे और गहरा बनाता है, जिसे कहते हैं मां और बच्चे का रिश्ता. यह तो बात हुई भावनात्मक संबंधों की, लेकिन स्तनपान के कई शारीरिक और मानसिक फायदे भी हैं, जो मां को कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियों से बचाता है, यह बात कई वैज्ञानिक शोधों में साबित भी हो चुकी है.
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World Breastfeeding Week : विश्व स्तनपान सप्ताह का उद्देश्य यह बताना है कि मां का दूध बच्चे का हक है और उसके बेहतर स्वास्थ्य के लिए उसे यह मिलना ही चाहिए. स्तनपान ना सिर्फ बच्चे के लिए फायदेमंद होता है, बल्कि इसका मां के स्वास्थ्य पर भी बहुत बेहतर असर होता है. बाल चिकित्सा पर आधारित जर्नल Acta Paediatrica में यह बताया गया है कि 12 महीने स्तनपान कराने से स्तन कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है.
स्तनपान कम करता है कैंसर का खतरा
आधुनिक जीवनशैली में कई महिलाएं स्तनपान कराने से बचती हैं, क्योंकि उन्हें यह डर सताता है कि स्तनपान से उसके स्वास्थ्य पर खतरा उत्पन्न होगा और उनके शरीर का आकार भी बिगड़ जाएगा. जबकि शोध अध्ययन और डाॅक्टर इसके विपरीत सलाह देते हैं. Acta Paediatrica में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कोई मां एक साल या उससे अधिक समय तक अपने बच्चे को स्तनपान कराती है, तो उसे स्तन कैंसर होने का खतरा लगभग 26% तक घट जाता है. वहीं ओवेरियन कैंसर का खतरा 37% तक कम हो जाता है.
डायबिटीज और मोटापे के खतरे को भी कम करता है
स्तनपान कराने से महिलाओं के शरीर में प्रोलैक्टिन और ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन बढ़ते हैं, बच्चे और मां के बीच बाॅडिंग को बढ़ाते हैं. स्तनपा मां को मानसिक रूप से शांत और संतुलित रखता है. साथ ही मां के शरीर में ग्लूकोज और इंसुलिन का निर्माण भी सही मात्रा में होता है. डाॅक्टर बताते हैं कि इससे टाइप-2 डायबिटीज की आशंका 32% तक कम होती है. स्तनपान से पीरियड्स और हार्मोनल परिवर्तन भी प्रभावित होते हैं, जो मधुमेह के जोखिम को कम करने में भूमिका निभा सकते हैं. डाॅक्टर रूही बताती हैं कि स्तनपान कराने से वजन घटाने में मदद मिलती है. इसकी वजह यह है कि दूध के उत्पादन में बहुत कैलोरी खर्च होती है, जिससे वजन घटता है.
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स्तनपान के हैं कई फायदे
स्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅरूही बताती है कि ब्रेस्ट फीडिंग के फायदे ना सिर्फ बच्चे को हैं, बल्कि मां को इससे बहुत लाभ होता है. एक ओर जहां बच्चे को इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता मिलती है और संपूर्ण आहार जिसे पौष्टिक आहार कहा जाता है, वह मिलता है. जब एक औरत स्तनपान कराती है तो उसका पीरियड्स बंद हो जाता है, इस दौरान उसके शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का विकास कम हो जाता है, जिससे स्तन कैंसर का खतरा कम हो जाता है. उसके अलावा जब मां स्तनपान कराती है, तो उसके गर्भाशय को पुरानी स्थिति में लाने में भी मदद मिलती है.
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क्या स्तनपान से कम होता है स्तन कैंसर का खतरा?
जी हां, अगर एक मां एक साल तक बच्चे को स्तनपान कराती है, तो स्तन कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है.
क्या स्तनपान मां और बच्चे दोनों को के लिए फायदेमंद है?
जी हां, स्तनपान से बच्चे को जहां पौष्टिक आहार और रोगप्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है, वहीं मां की कई बीमारियों से रक्षा करता है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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