पटना में रिश्वतखोर थानाध्यक्ष निलंबित, भारतीय सेना के अधिकारी से घूस लेने का आरोप, जानें पूरा मामला

प्रेमित रंजन ने एसएसपी राजीव मिश्रा व पुलिस उपाधीक्षक विधि व्यवस्था नुरूल हक को आवेदन दिया था कि उसने मकान के ऊपर निर्माण के लिए राजीव नगर थानाध्यक्ष नीरज कुमार ने पांच लाख की राशि मांगी और नहीं देने पर उनके भाई व मुंशी को थाने में बैठा कर रखा गया.
पटना. राजीव नगर थानाध्यक्ष नीरज कुमार को एसएसपी राजीव मिश्रा ने निलंबित कर दिया है. उन पर मकान के ऊपर निर्माण कराने के लिए राजीव नगर तीन निवासी प्रेमित रंजन से पांच लाख रुपये मांगने का आरोप है. साथ ही रकम नहीं देने पर प्रेमित रंजन के भाई लेफ्टिनेंट कर्नल अमित रंजन व मुंशी चंदन कुमार काे थाना में लाकर पांच घंटे बैठाने, स्टेशन डायरी देर से करने व नीलेश मुखिया के जरिये 90 हजार रुपए लेने का भी आरोप है.
बताया जाता है कि प्रेमित रंजन ने एसएसपी राजीव मिश्रा व पुलिस उपाधीक्षक विधि व्यवस्था नुरूल हक को आवेदन दिया था कि उसने मकान के ऊपर निर्माण के लिए राजीव नगर थानाध्यक्ष नीरज कुमार ने पांच लाख की राशि मांगी और नहीं देने पर उनके भाई व मुंशी को थाने में बैठा कर रखा गया.
इस मामले की जांच एसएसपी के निर्देश पर डीएसपी विधि- व्यवस्था नुरूल हक ने शुरू की. जिसमें उन्होंने मामले को सत्य पाया और अपनी रिपोर्ट एसएसपी को सौंप दी. इसके बाद एसएसपी ने थानाध्यक्ष नीरज कुमार को निलंबित करते हुए वापस लाइन में भेज दिया. इधर, इस मामले में नीरज कुमार पर विभागीय कार्रवाई भी चल सकती है और प्राथमिकी भी दर्ज होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है.
राजीव नगर रोड नंबर तीन में प्रेमित रंजन के भाई मकान के ऊपर निर्माण करा रहे थे. प्रेमित से मकान निर्माण के लिए पांच लाख रुपये मांगा गया. लेकिन जब नहीं मिला तो 23 अप्रैल काे मकान बनाने के दाैरान एसआइ शंकर सिंह दल-बल के साथ गये और अमित रंजन व चंदन को पकड़ कर थाना लाया. दाेनाें के ऊपर केस दर्ज किया गया और फिर नीलेश मुखिया भी थाना पहुंचे. इसके बाद 90 हजार रुपये लेने के बाद बांड भरवा कर छोड़ दिया गया.
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डीएसपी विधि व्यवस्था ने जांच शुरू की और एसआइ शंकर सिंह व अन्य पुलिसकर्मियों से पूछताछ की. साथ ही सीसीटीवी कैमरे के फुटेज को देखा. अमित रंजन व चंदन को थाना में लाये जाने व नीलेश मुखिया के परिसर में होने की पुष्टि हो गयी. साथ ही स्टेशन डायरी भी समय पर नहीं किये जाने की बात सामने आयी. इसके अलावा आवास बोर्ड के किसी अधिकारी के नहीं होने और पुलिस के बयान पर ही केस दर्ज किये जाने की बात प्रकाश में आयी. इसके बाद डीएसपी ने मामला सत्य पाते हुए रिपोर्ट को एसएसपी को भेज दिया.
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By Prabhat Khabar News Desk
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