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नगर निकाय चुनाव : दो से ज्यादा बच्चे बने जंजाल, जुडवां बच्चे होने पर लड़ सकेंगे चुनाव

Updated at : 04 Sep 2022 5:01 AM (IST)
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नगर निकाय चुनाव : दो से ज्यादा बच्चे बने जंजाल, जुडवां बच्चे होने पर लड़ सकेंगे चुनाव

नगर निकाय चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने दो टूक कहा है कि दो से अधिक संतान होने के बाद गोद देने के बाद भी तीन संतान के ही जैविक पिता माने जायेंगे. आयोग ने दो बच्चों से अधिक संतान वाले किसी भी महिला व पुरुष के चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगा दी है

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बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय चुनाव को लेकर मुकम्मल तैयारियां तेज कर दी है. इस क्रम में आयोग ने दो बच्चों से अधिक संतान वाले किसी भी महिला व पुरुष के चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगा दी है. इसके अलावे बोगस वोटिंग रोकने तथा मतदाताओं की जांच के लिए महिला शिक्षकों की ड्यूटी लगाने सहित कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी दिये हैं.

संतान को लेकर भी दिशा-निर्देश

आयोग ने दो या दो से अधिक संतान को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी कर दिया. आयोग ने दो टूक कहा है कि नगरपालिका आम चुनाव 2022 में दो से अधिक संतान वाले प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ सकते हैं. अगर किसी प्रत्याशी को जुड़वां संतान है तो उनके लिए कुछ बंदिशें लागू होती है. बंदिश यह है कि प्रत्याशी का जुड़वा संतान का जन्म कब हुआ है. अगर किसी प्रत्याशी को पहले एक संतान हैं. बाद में अगर उसे जुड़वा संतान होता है और वह माता-पिता बनता है तो उसे चुनाव लड़ने की इजाजत मिलेगी. अगर किसी प्रत्याशी का पहले से जुड़वा संतान है और उसके बाद एक भी संतान पैदा होता है तो वह चुनाव लड़ने से अयोग्य हो जायेगा.

राज्य निर्वाचन आयोग ने संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों पत्र लिखकर स्पष्ट कर दिया है. आयोग से जारी पत्र में कहा गया है कि कई परिवार जिनकी अपनी दो संतान हैं और उन्होंने लोक कल्याणार्थ अनाथ बच्चों को गोद लेने संबंधी सूचना देते हुए जैविक व दत्तक संतान के संबंध में मार्गदर्शन मांगा था. ऐसे में स्पष्ट किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति के पुत्र को दूसरे को कानूनी रूप से गोद दे दिये जाने के बाद भी उस संतान के पिता मूल रूप से वहीं कहे जायेंगे, जो बायोलॉजिकल हैं न कि जिस व्यक्ति ने गोद लिया है. किसी व्यक्ति विशेष अभ्यर्थी, समर्थक, प्रस्तावक के द्वारा अपने बच्चों को गोद दिये जाने के बाद भी उनके वास्तविक बच्चों की संख्या में कोई कमी नहीं मानी जायेगी. वैसे व्यक्ति चुनाव लड़ने के अयोग्य माने जायेंगे. हालांकि इसका लाभ उन लोगों को मिल सकेगा जिन्होंने अपनी दो संतानों के अलावा दूसरे किसी के बच्चे को गोद ले रखा है.

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निकाय चुनाव को लेकर सरगर्मी बढ़ी

जानकारी के मुताबिक प्रदेश में नगर निकाय के चुनाव दशहरे और दीपावली के बीच संपन्न कराये जा सकते हैं. राज्य निर्वाचन आयोग सभी जिलों को निर्देश दे चुका है कि पहले चरण वोटिंग के लिए आठ अक्तूबर और दूसरे चरण के लिए 18 अक्तूबर तक बैलेट यूनिट में मतपत्र लगाकर तैयार रखे जाएं. आयोग के इस निर्देश के बाद यह कयास लगाया जा रहा है कि बिहार में नगरपालिका चुनाव 10 एवं 20 अक्तूबर को कराये जा सकते हैं.

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