बिहार में बढ़ती गर्मी के कारण महामारी समिति हुई सक्रिय, सभी जिलों में सुखाड़ क्षेत्र चिह्नित करने के निर्देश
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 12 Apr 2023 3:24 AM
बिहार के हर जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक महामारी समिति गठित की गयी है. इसमें उप विकास आयुक्त, आरक्षी अधीक्षक, सिविल सर्जन, आपूर्ति विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के पदाधिकारी सदस्य हैं.
पटना. स्वास्थ्य विभाग ने आरंभ होने वाली भीषण गर्मी को देखते हुए राज्य के सभी जिलों में गठित महामारी कमेटियों को बचाव का निर्देश दिया है. विभाग के अपर मुख्य सचिव द्वारा जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में गठित महामारी कमेटी को निर्देश दिया गया है कि सुखाड़ से होने वाली बीमारियों के संभावित क्षेत्रों को पहले के अनुभव के आधार पर चिह्नित कर लिया जाये. साथ ही चिह्नित किये गये क्षेत्रों में कहीं भी सुखाड़ से बीमारी होती है तो अविलंब बचाव और इलाज का काम शुरू कर दिया जाये. राज्य स्वास्थ्य समिति को इसकी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी गयी है.
हर जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक महामारी समिति गठित की गयी है. इसमें उप विकास आयुक्त, आरक्षी अधीक्षक, सिविल सर्जन, आपूर्ति विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के पदाधिकारी सदस्य हैं. इस कमेटी को सुखाड़ की स्थिति में पेयजल स्रोतों में पीने का पानी की कमी के साथ पेयजल के दूषित होने की संभावना होती है. ऐसे सभी पेयजल स्रोतों की पहचान करने का निर्देश दिया गया है. यह काम लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के पदाधिकारी सहयोग करेंगे. सुखाड़ के समय बच्चे, दूध पिलानेवाली महिलाएँ, गर्भवती और वृद्ध व्यक्ति पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है. सुखाड़ के दौरान लोग पोषाहार की कमी से प्रभावित होते हैं. ऐसे में कमेटी को आवश्यकतानुसार पोषाहार कैंप की स्थापना करने का निर्देश दिया गया है.
सुखाड़ के दौरान डेंगू और मलेरिया का प्रकोप बढ़ जाता है. ऐसे में जिला मलेरिया पदाधिकारी का दायित्व होगा कि प्रभावित क्षेत्रों में डीडीटी का छिड़काव और फॉगिंग कार्य सुनिश्चित करायेंगे. सुखाड़ प्रभावित क्षेत्रों में जिला स्तर पर मेडिकल टीम का गठन किया जाये. इसे प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा सके. सुखाड़ की आशंका वाले क्षेत्रों में दस्त, कलरा, पेचिस, वायरल हेपेटाइटिस, मियादी बुखार, खाने-पीने की वस्तुओं में संक्रमण से बचाव की दवाएं रखी जाये.
सूखा के कारण त्वचा संबंधी बीमारी, अधिक गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन, हीट स्टोक और हीट एक्जर्शन से बचाव की व्यवस्था होनी चाहिए. साथ ही एक्युट ब्रोंकाइटिस, ब्रोंको निमोनिया, मानसिक बीमारियों में एनजाइटी, डिप्रेशन व भय की संभावना हो सकती है. इस प्रकार की बीमारियों से बचाव के लिए ओआरएस, एएसवीएस, आइवी फ्लुइड, एंटी एलर्जिक, बी कम्पलेक्स, एआरवी, एंटी पायरेटिक सहित अन्य दवाएं उपलब्ध रखी जाये.
अधिक गर्मी पड़ने पर कुत्ता और सियार के काटने की घटनाएं बढ़ जाती है. ऐसे में स्थानीय स्तर पर एंटीरेबीज की दवा भी आवश्यकतानुसार आकलन कर भंडारण कर लिया जाये. अगर कहीं से महामारी फैल जाये तो वहां के पंचायत भवन में अस्थायी अस्पताल खोला जाये. इन क्षेत्र में सभी पदाधिकारियों की जिम्मेदारी भी निर्धारित कर दी गयी है.
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