बिहार के 50 फीसदी कमर्शियल ड्राइवरों को चश्मे की जरूरत, लाइसेंस रिन्यूवल में बढ़ेगी सख्ती
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Jan 2023 1:14 AM
कमर्शियल गाड़ी चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस हर पांच साल पर रिन्यूवल होता है. जिसमें मेडिकल प्रमाण पत्र भी लिया जाता है, लेकिन दलालों के माध्यम से इसमें डीटीओ कार्यालय में भी कोताही होती है और लाइसेंस बिना जांच के बन जाता हैं.
बिहार में व्यावसायिक गाड़ी चलाने वाले पचास फीसदी ड्राइवर अपनी आंखों की नियमित जांच नहीं करा रहे. परिवहन विभाग की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है. जांच रिपोर्ट के अनुसार आधे चालकों को चश्मे की जरूरत है. लेकिन, नियमित जांच नहीं कराने के कारण वह बिना चश्मा गाड़ी चला रहे हैं. इसके चलते बेहतर सड़क होने के बावजूद दुर्घटनाओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. परिवहन विभाग ने सभी डीटीओ को निर्देश दिया है कि कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस के रिन्यूवल करते समय उनके मेडिकल प्रमाण पत्र की सख्ती से जांच करें. बिला नेत्र जांच सर्टिफिकेट के किसी का लाइसेंस रिन्यूवल नहीं किया जाये.
कमर्शियल गाड़ी चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस हर पांच साल पर रिन्यूवल होता है. जिसमें मेडिकल प्रमाण पत्र भी लिया जाता है, लेकिन दलालों के माध्यम से इसमें डीटीओ कार्यालय में भी कोताही होती है और लाइसेंस बिना जांच के बन जाता हैं. यही कारण है कि गाड़ी चालते वक्त अधिक लोग चश्मा नहीं पहनते है. क्योंकि उन्होंने कभी आंखों की जांच ही नहीं कराया होता है.
परिवहन विभाग की ओर से राज्य में सड़क सुरक्षा सप्ताह चलाया जाता है. जिसमें लोगों को सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों के संबंध में जानकारी दी जाती है. वहीं, ड्राइवरों का नेत्र जांच होता है और चश्मा का वितरण किया जाता है. लेकिन अब सरकारी शिविरों में नेत्र जांच के दौरान यह पाया गया कि आंखों में दिक्कत काफी समय से है और इन्होंने नेत्र जांच नहीं कराया है, तो उनके लाइसेंस को जब्त कर लिया जायेगा.
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विभाग ने यह निर्णय लिया है कि कॉमर्शियल वाहन चलाने वाले ड्राइवरों का नेत्र जांच नियमित शिविर लगाकर कराया जायेगा. शिविर सरकारी बस डिपो या अन्य जगहों पर जिला प्रशासन की मदद से लेगा, ताकि इन इनके नेत्र की जांच नियमित होती रहे. वहीं, ड्राइवरों के बीच इस संबंध में जागरूकता अभियान भी चलाया जायेगा.
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