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अग्रणी होम्स पर ग्राहकों का 100 करोड़ से अधिक बकाया, रेरा में 1500 केस दर्ज, ED ने 12 ठिकानों पर मारा छापा

Updated at : 19 Apr 2023 1:43 AM (IST)
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अग्रणी होम्स पर ग्राहकों का 100 करोड़ से अधिक बकाया, रेरा में 1500 केस दर्ज, ED ने 12 ठिकानों पर मारा छापा

बिहार रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में बिल्डरों व प्रमोटरों के खिलाफ दर्ज कुल मामलों में आधे से अधिक (करीब 1500 मामले) अग्रणी कंस्ट्रक्शन कंपनी से जुड़े हैं. लोगों ने करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि के लिए मामले दर्ज करा रखे हैं.

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पटना. इंफोर्समेंट डायरेक्ट्रेट (इडी) ने मंगलवार को फ्लैट बुकिंग के नाम पर गड़बड़ी करने वाले बिल्डर अग्रणी होम्स के पटना, दिल्ली, लखनऊ और वाराणसी के 12 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. इडी की टीम ने अग्रणी होम्स के सारे दस्तावेज और कंप्यूटर अपने कब्जे में ले लिए. देर रात तक दस्तावेजों की जांच जारी थी.

तीन सौ लोगों से ठगी और फ्लैट नहीं देने का आरोप

उल्लेखनीय है कि आम लोगों से फ्लैट बुकिंग के नाम पर 14 करोड़ रुपये डकारने के मामले में अक्टूबर 2022 में पटना जिले की शाहपुर पुलिस ने अग्रणी होम्स के निदेशक आलोक कुमार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से गिरफ्तार किया था. अग्रणी होम्स के निदेशक पर पटना के करीब तीन सौ लोगों से ठगी और फ्लैट नहीं देने का आरोप है. इस मामले को लेकर लोग भू-संपदा विनियमन प्राधिकरण (रेरा) में भी गए थे, वहां से अग्रणी होम्स को रुपये लौटाने या फ्लैट देने का आदेश निर्गत किया गया था, लेकिन निदेशक ने उसकी अनदेखी की थी.

अग्रणी पर ग्राहकों का 100 करोड़ से अधिक मूल बकाया, सिर्फ रेरा में 1500 मामले दर्ज

बिहार रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में बिल्डरों व प्रमोटरों के खिलाफ दर्ज कुल मामलों में आधे से अधिक (करीब 1500 मामले) अग्रणी कंस्ट्रक्शन कंपनी से जुड़े हैं. लोगों ने करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि के लिए मामले दर्ज करा रखे हैं. ब्याज सहित यह राशि 200 से 250 करोड़ रुपये के आस-पास होती है. कंपनी के एमडी आलोक कुमार को कुछ माह पहले गिरफ्तार किया गया था.

Also Read: इडी का अग्रणी होम्स के पटना, दिल्ली, लखनऊ और वाराणसी समेत 12 ठिकानों पर छापा…

आर्थिक अपराध इकाई पांच दर्जन मामलों में कर रही छानबीन

दरअसल अग्रणी ने सस्ते दर पर फ्लैट का लालच देकर बड़ी संख्या में प्रोजेक्ट बुकिंग करायी, लेकिन अधिकांश प्रोजेक्ट राशि के अभाव में अधूरे रह गये. आर्थिक अपराध इकाई भी लगभग पांच दर्जन मामलों में छानबीन कर रही है.

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