महिला आरक्षण विधेयक पर संशोधन क्यों लाया गया था? सरकार ने FAQ जारी कर दिया जवाब

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Women Reservation Bill FAQ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फोटो पीटीआई

Women Reservation Bill: महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित नहीं होने के बाद सरकार ने रविवार को इस मुद्दे से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू) और उनके उत्तर जारी किये.

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Women Reservation Bill: महिला आरक्षण विधेयक के तहत निचले सदन और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत कोटा प्रदान करने का प्रावधान किया गया है. विपक्ष के इस दावे के बीच अक्सर पूछे जाने वाले ये प्रश्न सामने आए हैं कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर 2011 की जनगणना के आधार पर मनमाने ढंग से परिसीमन करने की कोशिश कर रही है. सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों का जिक्र करते हुए बताया कि उसने 16 अप्रैल को ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया था.

नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन लाने की वजह?

इस संशोधन विधेयक को लाने के संदर्भ में सरकार ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम जिसे महिला आरक्षण अधिनियम के नाम से जाना जाता है, जो ये प्रावधान करता है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के बाद परिसीमन के आधार पर महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया जाएगा. यदि सरकार जनगणना और उसके बाद परिसीमन का इंतजार करती, तो जनगणना और उसके बाद परिसीमन की अवधि में समय लगने के कारण महिलाएं 2029 के आम चुनावों में भी 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं उठा पातीं.

विधेयक पारित होने से क्या होता लाभ?

विधेयक के पारित हो जाने से होने वाले लाभ को लेकर सरकार ने कहा- यदि ये विधेयक पारित हो जाते, तो महिलाओं को 2029 के आम चुनावों में ही लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त करने का अधिकार मिल जाता.

परिसीमन को नारी शक्ति वंदन अधिनियम से क्यों जोड़ा गया?

परिसीमन को नारी शक्ति वंदन अधिनियम से क्यों जोड़ा गया था, और सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव क्यों था, इसे लेकर सरकार ने कहा कि परिसीमन किया जाना महिला आरक्षण को लागू करने के लिए आवश्यक है क्योंकि लोकसभा में सीटों की सीमा 1976 में 550 निर्धारित की गई थी. सरकार ने बताया कि 1971 में भारत की जनसंख्या 54 करोड़ थी, और आज यह 140 करोड़ है इसलिए, लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना महत्वपूर्ण है.

क्या राजनीतिक लाभ के लिए लाया गया था संशोधन?

परिसीमन आयोग अधिनियम में राजनीतिक लाभ के लिए संशोधन करने के प्रयास या इससे मौजूदा समय में हो रहे विधानसभा चुनाव पर कोई प्रभाव पड़ने से जुड़े सवाल पर सरकार ने कहा कि परिसीमन आयोग अधिनियम में कोई परिवर्तन प्रस्तावित नहीं किया गया और मौजूदा कानूनी ढांचा यथावत बना हुआ है. उसने कहा कि तमिलनाडु या पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में जारी चुनाव प्रभावित नहीं होंगे, क्योंकि 2029 तक के चुनाव मौजूदा प्रणाली के तहत ही आयोजित किए जाएंगे.

क्या नये परिसीमन से दक्षिण के राज्यों को नुकसान होता?

नए परिसीमन प्रस्ताव से दक्षिणी या छोटे राज्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के सवाल पर सरकार ने कहा है कि किसी राज्य पर इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और सभी राज्यों में सीटों में एक समान 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी. उसने कहा कि दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व में कोई कमी नहीं होगी. जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने वाले राज्यों को किसी प्रकार की हानि का सामना करने से जुड़े मुद्दे को लेकर सरकार ने कहा कि ऐसा नहीं होगा क्योंकि सभी राज्यों में सीटों की संख्या में समान रूप से वृद्धि का प्रस्ताव है, तो उनका आनुपातिक प्रतिनिधित्व अपरिवर्तित रहेगा या उसमें मामूली सुधार होगा.

संशोधन विधयेक से ST, SC समुदाय पर प्रभाव पड़ता?

सरकार ने इन संशोधन विधयेक से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय पर किसी भी तरह के प्रभाव पड़ने से भी इनकार किया है.

ये भी पढ़ें: महिला आरक्षण: जब पक्ष-विपक्ष दोनों समर्थक, तो 543 सीटों पर क्यों लागू नहीं हो सकता कानून?

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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

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पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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