महिला आरक्षण विधेयक पर संशोधन क्यों लाया गया था? सरकार ने FAQ जारी कर दिया जवाब
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 19 Apr 2026 5:25 PM

Women Reservation Bill: महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित नहीं होने के बाद सरकार ने रविवार को इस मुद्दे से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू) और उनके उत्तर जारी किये.
Women Reservation Bill: महिला आरक्षण विधेयक के तहत निचले सदन और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत कोटा प्रदान करने का प्रावधान किया गया है. विपक्ष के इस दावे के बीच अक्सर पूछे जाने वाले ये प्रश्न सामने आए हैं कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर 2011 की जनगणना के आधार पर मनमाने ढंग से परिसीमन करने की कोशिश कर रही है. सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों का जिक्र करते हुए बताया कि उसने 16 अप्रैल को ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया था.
नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन लाने की वजह?
इस संशोधन विधेयक को लाने के संदर्भ में सरकार ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम जिसे महिला आरक्षण अधिनियम के नाम से जाना जाता है, जो ये प्रावधान करता है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के बाद परिसीमन के आधार पर महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया जाएगा. यदि सरकार जनगणना और उसके बाद परिसीमन का इंतजार करती, तो जनगणना और उसके बाद परिसीमन की अवधि में समय लगने के कारण महिलाएं 2029 के आम चुनावों में भी 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं उठा पातीं.
विधेयक पारित होने से क्या होता लाभ?
विधेयक के पारित हो जाने से होने वाले लाभ को लेकर सरकार ने कहा- यदि ये विधेयक पारित हो जाते, तो महिलाओं को 2029 के आम चुनावों में ही लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त करने का अधिकार मिल जाता.
परिसीमन को नारी शक्ति वंदन अधिनियम से क्यों जोड़ा गया?
परिसीमन को नारी शक्ति वंदन अधिनियम से क्यों जोड़ा गया था, और सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव क्यों था, इसे लेकर सरकार ने कहा कि परिसीमन किया जाना महिला आरक्षण को लागू करने के लिए आवश्यक है क्योंकि लोकसभा में सीटों की सीमा 1976 में 550 निर्धारित की गई थी. सरकार ने बताया कि 1971 में भारत की जनसंख्या 54 करोड़ थी, और आज यह 140 करोड़ है इसलिए, लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना महत्वपूर्ण है.
क्या राजनीतिक लाभ के लिए लाया गया था संशोधन?
परिसीमन आयोग अधिनियम में राजनीतिक लाभ के लिए संशोधन करने के प्रयास या इससे मौजूदा समय में हो रहे विधानसभा चुनाव पर कोई प्रभाव पड़ने से जुड़े सवाल पर सरकार ने कहा कि परिसीमन आयोग अधिनियम में कोई परिवर्तन प्रस्तावित नहीं किया गया और मौजूदा कानूनी ढांचा यथावत बना हुआ है. उसने कहा कि तमिलनाडु या पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में जारी चुनाव प्रभावित नहीं होंगे, क्योंकि 2029 तक के चुनाव मौजूदा प्रणाली के तहत ही आयोजित किए जाएंगे.
क्या नये परिसीमन से दक्षिण के राज्यों को नुकसान होता?
नए परिसीमन प्रस्ताव से दक्षिणी या छोटे राज्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के सवाल पर सरकार ने कहा है कि किसी राज्य पर इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और सभी राज्यों में सीटों में एक समान 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी. उसने कहा कि दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व में कोई कमी नहीं होगी. जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने वाले राज्यों को किसी प्रकार की हानि का सामना करने से जुड़े मुद्दे को लेकर सरकार ने कहा कि ऐसा नहीं होगा क्योंकि सभी राज्यों में सीटों की संख्या में समान रूप से वृद्धि का प्रस्ताव है, तो उनका आनुपातिक प्रतिनिधित्व अपरिवर्तित रहेगा या उसमें मामूली सुधार होगा.
संशोधन विधयेक से ST, SC समुदाय पर प्रभाव पड़ता?
सरकार ने इन संशोधन विधयेक से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय पर किसी भी तरह के प्रभाव पड़ने से भी इनकार किया है.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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