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कब लें वैक्सीन की दूसरी डोज ? वैज्ञानिकों ने बताया कब होगा इसका सबसे ज्यादा असर, कितना रखना है अंतर

Updated at : 19 May 2021 10:11 AM (IST)
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कब लें वैक्सीन की दूसरी डोज ? वैज्ञानिकों ने बताया कब होगा इसका सबसे ज्यादा असर, कितना रखना है अंतर

वैक्सीन की दूसरी डोज के बीच कितना अंतर रखें चार से छह हफ्ते, छह से आठ हफ्ते या आठ से 12 हफ्ते इसे लेकर अब भी असमंजस की स्थिति है. भारत ने वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के अंतराल को बढ़ा दिया है. विशेषज्ञों ने कहा है कि छह महीने के अंदर कभी भी कोविशील्ड की दूसरी डोज ले सकते हैं. इसे चार सप्ताह के बाद यानि लगभग एक महीने के बाद या छह महीने के भीतर कभी भी लिया जा सकता है जिसमें यह कारगर रहेगा और बुस्टर की तरह काम करेगा.

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पहली डोज और दूसरी डोज के बीच का अंतर क्या होना चाहिए ? इस सवाल को लेकर अबतक कई तरह की राय आ चुकी है. सरकार भी इस वैक्सीन की दूसरी डोज के अंतराल को बढ़ा रही है. इसे लेकर राजनीति भी तेज है और लोगों के मन में कई सवाल भी घर कर रहा है.

वैक्सीन की दूसरी डोज के बीच कितना अंतर रखें चार से छह हफ्ते, छह से आठ हफ्ते या आठ से 12 हफ्ते इसे लेकर अब भी असमंजस की स्थिति है. भारत ने वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के अंतराल को बढ़ा दिया है. विशेषज्ञों ने कहा है कि छह महीने के अंदर कभी भी कोविशील्ड की दूसरी डोज ले सकते हैं. इसे चार सप्ताह के बाद यानि लगभग एक महीने के बाद या छह महीने के भीतर कभी भी लिया जा सकता है जिसमें यह कारगर रहेगा और बुस्टर की तरह काम करेगा.

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सरकार ने वैक्सीन की दूसरी डोज के अंतराल को बढ़ाने का फैसला राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह की सिफारिश के बाद लिया. भारत ने जहां वैक्सीन की दूसरी डोज का अंतराल बढ़ाया तो ब्रिटेन ने इसे कम कर दिया. ब्रिटेन में कोरोना की नयी स्ट्रैन को देखते हुए यह फैसला लिया गया और 12 हफ्ते से घटाकर आठ हफ्ते कर दिया.

वैक्सीन की दूसरी डोज लेने का सबसे बेहतर समय कब है इसे लेकर विज्ञानी सत्यजीत रथ ने कहा, चार हफ्ते के बाद छह महीने के भीतर कभी भी दूसरी डोज ली जा सकती है लेकिन इस अंतराह में उसका ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता ज्यादा अंतराल में वैक्सीन की दूसरी डोज लेने से इसका प्रभाव बढ़ता है.

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इस पूरे मसले पर वैज्ञानिकों के तथ्यों के साथ- साथ राजनीति में नेताओं के बयान भी सामने आ रहे हैं. कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर यह कहकर निशाना साधा है कि विदेश में वैक्सीन का निर्यात करने की वजह से देश में वैक्सीन की कमी आयी है.

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