पीएम मोदी ने दिल्ली के विज्ञान भवन में कहा, 'लोकतांत्रिक महाशक्ति के रूप में उभर रहा भारत'

Updated at : 17 Sep 2022 8:08 PM (IST)
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पीएम मोदी ने दिल्ली के विज्ञान भवन में कहा, 'लोकतांत्रिक महाशक्ति के रूप में उभर रहा भारत'

पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया भर के विशेषज्ञ कह रहे हैं कि भारत आज एक लोकतांत्रिक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है. वे भारत के असाधारण प्रतिभा पारिस्थितिकी तंत्र से बहुत प्रभावित हैं.

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी का शुभारंभ किया. इस अवसर पर यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (यूलिप) को आज लॉन्च किया गया. इससे निर्यातकों के लिए लॉजिस्टिक्स सेवाओं में आसानी होगी. यूलिप परिवहन क्षेत्र से संबंधित सभी सेवाओं को एक मंच पर एकीकृत करेगा. पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया भर के विशेषज्ञ कह रहे हैं कि भारत आज एक लोकतांत्रिक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है. वे भारत के असाधारण प्रतिभा पारिस्थितिकी तंत्र से बहुत प्रभावित हैं. एक विकसित भारत बनने के लिए हमें दुनिया के अन्य विकसित देशों के साथ प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा करने की जरूरत है.

लॉजिस्टिक लागत में आएगी कमी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति की शुरुआत करते हुए कहा कि यह नीति परिवहन क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान देने वाली, अंतिम छोर तक डिलीवरी की गति बढ़ाने और कारोबारों के लिए धन की बचत करने वाली है. इस नीति से कारोबारों की लॉजिस्टिक लागत मौजूदा 13-14 फीसदी से घटकर एकल अंक में आने का अनुमान है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भारतीय बंदरगाहों की कुल क्षमता में काफी वृद्धि हुई है और पोतों का औसत ‘टर्न-अराउंड टाइम’ 44 घंटे से घटकर अब 26 घंटे पर आ गया है. उन्होंने कहा कि बंदरगाहों और समर्पित माल गलियारों को जोड़ने वाली सागरमाला परियोजना ने लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी तथा अवसंरचना विकास के व्यवस्थित कार्यों में सुधार लाना शुरू कर दिया है.

भारत दुनिया की पांवचीं बड़ी अर्थव्यवस्था

मोदी ने कहा कि भारत अब दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और यह विनिर्माण के केंद्र के तौर पर उभर रहा है. उन्होंने कहा कि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) को विश्व ने स्वीकार किया है. उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक क्षेत्र को मजबूती देने के लिए सरकार प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रही है और सीमाशुल्क में बिना अधिकारी के सामने जाए आकलन की व्यवस्था शुरू कर दी गई है. वहीं ई-वे बिल तथा फास्टटैग भी लॉजिस्टिक क्षेत्र में प्रभावशीलता बढ़ा रहे है.

भारत लोकतंत्र की महाशक्ति

विश्वभर के बाजारों में भारतीय उत्पादों की पैठ बनाने के लिए इसके समर्थन तंत्र को मजबूत करने का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति समर्थन प्रणाली को आधुनिक बनाने में मदद देगी. मोदी ने बताया कि वैश्विक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत लोकतंत्र की महाशक्ति के तौर पर उभर रहा है और ये विशेषज्ञ भारत के अभूतपूर्व कुशल परिवेश से प्रभावित हैं. उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ भारत के दृढ़-निश्चय एवं प्रगति की सराहना कर रहे हैं.

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नियमों को व्यवस्थित करेगी ड्रोन नीति

ड्रोन नीति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे लॉजिस्टिक क्षेत्र बेहतर होगा. उन्होंने कहा कि महामारी के दो वर्ष के बाद वृद्धि को गति देने में मदद की खातिर बनाई गई यह नीति नियमों को व्यवस्थित करेगी, आपूर्ति चेन के अवरोधकों को दूर करेगी और ईंधन लागत तथा लॉजिस्टिक लागत को कम करने के लिए रूपरेखा देगी. केंद्र सरकार बीते तीन साल से राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति पर काम कर रही है. वाणिज्य मंत्राल यने मसौदा नीति 2019 में जारी की थी लेकिन कोविड-19 के कारण इसमें विलंब हुआ. बजट 2022-23 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बार फिर इस नीति की घोषणा की.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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