MP: जिंदगी की जंग हार गयी सृष्टि, 300 फीट गहरे बोरवेल से तीन दिन बाद रोबोट टीम ने बाहर निकाला
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 08 Jun 2023 6:46 PM
रोबोटिक टीम के प्रभारी महेश आर्य ने बताया, हमने जानकारी एकत्र करने के लिए एक रोबोट को बोरवेल में उतारा है और उससे प्राप्त तस्वीरों को हम बच्ची की स्थिति जानने के लिए स्कैन करके डेटा को प्रोसेस किया. इसके बाद बच्ची को बाहर निकालने की कोशिश की गयी.
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के मुंगावली गांव में 300 फुट गहरे बोरवेल में फंसी ढाई साल की बच्ची सृष्टि जिंदगी की जंग हार गयी. तीसरे दिन गुरुवार की शाम उसे बड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया. लेकिन उसकी जान नहीं बचायी जा सकी. गौरतलब है कि बच्ची खेत में खेलते समय बोरवेल में गिर गयी थी. रोबोट टीम की मदद से बच्ची को बाहर निकाला गया था.
बोरबेल से बाहर निकालने के बाद बच्ची को ले जाया गया अस्पताल
एक अधिकारी ने कहा कि सहयोगियों की मदद से बोरवेल से बाहर निकालने के तुरंत बाद बच्ची को एक एम्बुलेंस में जिला अस्पताल ले जाया गया. बच्ची को बेहोशी का हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. कलेक्टर सीहोर ने बताया, तमाम कोशिशों के बावजूद हम बच्ची को नहीं बचा सके. दो डॉक्टरों की टीम द्वारा किए गए पोस्टमॉर्टम से खुलासा हुआ है कि बच्ची की मौत दम घुटने से हुई.
Madhya Pradesh | Despite all our attempts, we could not save the girl. Postmortem by a team of two doctors reveals that the body is in a decomposed state, further details awaited: Collector Sehore
The cause of death is due to suffocation, says the doctor. pic.twitter.com/kx0O6R639W
— ANI MP/CG/Rajasthan (@ANI_MP_CG_RJ) June 8, 2023
रोबोटिक विशेषज्ञ ने बच्ची को किया रेस्क्यू
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में बोरवेल में गिरी ढाई साल की बच्ची को बचाने के लिए जारी अभियान में तीसरे दिन गुरुवार को रोबोटिक विशेषज्ञों की एक टीम को शामिल किया गया. टीम को तीन दिन के बाद सफलता मिली. जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि बच्ची को बोरवेल में एक पाइप के जरिए ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही थी.
रोबोट टीम ने कैसे बच्ची को बोरवेल से बाहर निकाला
रोबोटिक टीम के प्रभारी महेश आर्य ने बताया, हमने जानकारी एकत्र करने के लिए एक रोबोट को बोरवेल में उतारा और उससे प्राप्त तस्वीरों को हम बच्ची की स्थिति जानने के लिए स्कैन करके डेटा को प्रोसेस किया. इसके बाद बच्ची को बाहर निकालने की कोशिश की गयी.
30 फुट से नीचे फिसल कर 100 फुट में फंस गयी थी बच्ची
अधिकारियों ने बताया बच्ची को बोरवेल से बाहर निकालने का काम और अधिक कठिन तब हो गया जब वह 30 फुट से और नीचे फिसल कर लगभग 100 फुट की गहराई में फंस गई थी.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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