सीजेआई ने पेंडिंग केस की फास्ट ट्रैक सुनवाई के लिए पेश की नई प्रणाली, सुप्रीम कोर्ट की पीठ हो गई नाराज

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक आपराधिक मामले में जारी आदेश में कहा है कि मामलों को सूचीबद्ध करने की नई प्रणाली मौजूदा मामले की तरह के मुकदमों की सुनवाई के लिए पर्याप्त समय नहीं दे पा रही है, क्योंकि ‘भोजनावकाश के बाद के सत्र' में कई मामले सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं.
नई दिल्ली : भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) उदय उमेश ललित ने लंबित मामलों की फास्ट ट्रैक सुनवाई के लिए एक नई प्रणाली पेश की. इसमें उन्होंने यह तय किया कि सुप्रीम कोर्ट में भोजनावकाश के बाद के सत्र में लंबित मामलों की सुनवाई की जाएगी. उनके इस न्यायिक आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने नाराजगी जाहिर की है. देश में किसी न्यायिक आदेश पर नाराजगी जाहिर करने का यह अनोखा उदाहरण बताया जा रहा है.
मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक आपराधिक मामले में जारी आदेश में कहा है कि मामलों को सूचीबद्ध करने की नई प्रणाली मौजूदा मामले की तरह के मुकदमों की सुनवाई के लिए पर्याप्त समय नहीं दे पा रही है, क्योंकि ‘भोजनावकाश के बाद के सत्र’ में कई मामले सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं. न्यायमूर्ति कौल वरीयता क्रम में सुप्रीम कोर्ट के तीसरे सीनियर जज हैं. उनकी अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश 13 सितंबर को जारी किया, जिसे आज की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था.
नई प्रणाली के तहत सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश दो अलग-अलग पालियों में कार्य कर रहे हैं. नई प्रणाली के तहत प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को कुल 30 न्यायाधीश मुकदमों की सुनवाई करते हैं और दो-दो न्यायाधीशों की पीठ का ही गठन किया जाता है. प्रत्येक पीठ औसतन 60 से अधिक मामलों की सुनवाई करती है, जिनमें नई जनहित याचिकाएं शामिल हैं. सूत्रों के अनुसार, 27 अगस्त को सीजेआई का पदभार ग्रहण करने के दिन से अभी तक नई प्रणाली के तहत सर्वोच्च अदालत में कुल 5000 से अधिक मामलों का निपटारा किया गया है.
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सीजेआई के शपथ ग्रहण के दिन से लेकर 13 कार्यदिवसों में सर्वोच्च अदालत ने 3500 मिश्रित मामलों, 250 से अधिक नियमित और 1200 स्थानांतरण याचिकाओं का निपटारा किया है. इस सप्ताह की शुरुआत में एक मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि अगले सप्ताह से यह निर्णय लिया गया है कि वैसे मामलों की एक ही समेकित सूची होगी, जिनमें नोटिस जारी हो चुके हैं. यह सूची एक पीठ के लिए पूरे हफ्ते जारी रहेगी.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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