1993 मुंबई ब्लास्ट केस: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की गैंगस्टर अबू सलेम की याचिका, 2030 से पहले रिहाई नहीं
गैंगस्टर अबू सलेम की फाइल तस्वीर, फोटो एक्स
गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने 1993 मुंबई सीरियल बम धमाकों के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे सलेम की समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. अब सलेम को 2030 से पहले जेल से रिहा नहीं किया जा सकेगा.
Abu Salem: 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. कोर्ट ने उसकी समय से पहले जेल से रिहा किए जाने की मांग वाली याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है.
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच को बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले में कोई कमी नहीं मिली, जिसमें सलेम की याचिका को खारिज कर दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 25 साल की यह अवधि 2005 से शुरू मानी जाएगी और उसकी सजा 2030 में पूरी होगी.
सलेम ने कहा- सजा के 25 साल पूरे कर लिए, रिहाई का है हकदार
सलेम ने तर्क दिया था कि जेल में रहने के दौरान मिली छूट को ध्यान में रखते हुए, उसने अपनी सजा के 25 साल पूरे कर लिए हैं और इसलिए वह रिहाई का हकदार है. हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा था कि उसकी 25 साल की सजा 2030 में ही पूरी होगी. सलेम ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसने 27 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
सलेम को 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत किया गया था प्रत्यर्पित
मुंबई के 1993 के सिलसिलेवार बम धमाकों के दोषी सलेम को लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था. भारत और पुर्तगाल के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते की शर्तों के अनुसार, सलेम को मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता और उसकी जेल की सजा 25 वर्ष से अधिक नहीं हो सकती.
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